हिन्दू धर्म के सोलह 16 संस्कार I 16 Sanskar details in hindi

संस्कार शब्द की व्युत्पत्ति सम पूर्वक ‘कृन्’ धातु से ‘‘धम’’ प्रत्यय करने पर होती है। सम् + कृ + धन = संस्कार। विभिन्न स्थलों पर भिन्न-भिन्न सन्दर्भों में इसका उपयोग अनेक अर्थों में किया जाता है। प्रसंग के अनुसार संस्कार शब्द के अर्थ, शिक्षा, संस्कृति प्रशिक्षण, व्याकरण सम्बन्धी शुद्धि संस्करण, परिष्करण, शोभा, आभूषण, प्रभाव, स्वरुप, स्वभाव …

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भारत में कृषि का महत्व एवं कृषि पर वैश्वीकरण का प्रभाव

भारत में कृषि, यहाँ की अर्थव्यवस्था व मानव-विकास तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप एवं उत्थान की आधारशिला बनी हुयी है। देश की लगभग 64 प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है तथा देश के 6.38 लाख से भी अधिक गांवों में निवास करने वाली 75 प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका कृषि से ही …

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श्रृंगार का अर्थ, परिभाषा, भेद एवं तत्व

श्रृंगार का अर्थ श्रृंगार का अर्थ श्रृंगार शब्द ‘श्रृंग’ एंव ‘आर’ इन शब्दों के योग से बना है। श्रृंग का अर्थ कामोहेक या काम की वृद्धि और आर का अर्थ आगमन या प्राप्ति है। इस प्रकार श्रृंगार का शाब्दिक अर्थ हुआ काम की प्राप्ति अथवा वृद्धि होना। श्रृंगार की परिभाषा भरतमुनि से लेकर हिन्दी एवं संस्कृति …

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भक्ति का अर्थ क्या है भक्ति के प्रकार एवं महत्व का वर्णन ?

भक्ति शब्द का अर्थ सेवा अथवा आराधना होता है। श्रद्धा और अनुराग भी इसी के अर्थ माने जाते हैं। ‘भक्ति’ शब्द ‘भज सेवायाम्’ धातु से क्तिन् प्रत्यय लगाकर बना है, जिसका अर्थ है भगवान का सेवा-प्रकार। शाण्डिल्य भक्तिसूत्र में भक्ति की व्याख्या इस प्रकार की गई है- ‘सा परानुरक्तिरीष्वरै:’ अर्थात् ईश्वर में परम् अनुरक्ति ही भक्ति …

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भक्ति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं महत्व

भक्ति शब्द संस्कृत के ‘भज’ सेवायाम् धातु में ‘ क्तिन्’ प्रत्यय लगाने पर बनता है। वस्तुत: ‘क्तिन्’ प्रत्यय भाव अर्थ में होता है। ‘भजनं भक्ति:’ परन्तु वैयाकरणों के अनुसार कृदन्तीय प्रत्ययों में अर्थान्तर अर्थ परिवर्तन प्रक्रिया का अंग है। अत: वही ‘क्तिन्’ प्रत्यय अर्थान्तर में भी हो सकता है।“भजनं भक्ति:”, “भज्यते अनया इति भक्ति:”, “भजन्ति अनया …

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स्लम का अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप

स्लम्स क्या है? किन तथ्यों के मद्देनज़र किसी क्षेत्र को स्लम क्षेत्र माना जाता है? अर्थात् ऐसे कौन से मानदंड है जो किसी क्षेत्र को स्लम का अर्थ प्रदान करते है। इस सदंर्भ में सर्वप्रथम ‘स्लम’ शब्द की उत्पत्ति को स्पष्ट करना अपेक्षित है – “एरिक पैट्रिज़ की ‘ए शॉर्ट एटीम्लोजिक़ ल डिक्शनरी ऑफ मॉर्डन इंग्लिश’ …

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CBSE board सीबीएसई बोर्ड के प्रमुख उद्देश्य और संरचना

CBSE board सीबीएसई बोर्ड का पूरा नाम सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेण्ड्री एजूकेशन है। जिसका कार्यालय दिल्ली में स्थित है। यू0पी0 बोर्ड की तरह यह बोर्ड भी हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट स्तर पर परीक्षाएं कराता है। उसका प्रमुख कार्य परीक्षा में सुधार करना तथा पाठ्यक्रम को विकसित करने के लिए अर्थपूर्ण बनाना है तथा समाज में उच्च प्रकार …

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हिंदू विवाह के उद्देश्य क्या है?

यह प्राचीन हिन्दू समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है जिसकी महत्ता आज भी समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है जिसकी महत्ता आज भी विद्यमान है। गृहस्थाश्रम का प्रारम्भ उसी संस्कार से होता था । ” विवाह” शब्द “वि” उपसर्गपूर्वक “वह” धातु से बनता है जिसका शाब्दिक अर्थ है “वधू को वर के घर ले जाना या …

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आश्रम व्यवस्था क्या है (ब्रम्हचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम)

हिन्दू जीवन दर्शन ने आध्यात्मिक भोग, त्याग तथा वैधानिक और सामाजिक विकास के संतुलन के लिये हिन्दू सामाजिक संगठन के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाएं की है। आश्रम व्यवस्था भी उनमें से एक है। चारांे पुरुषार्थों की क्रमबद्ध विधिवत और सुनियोजित पूर्ति के लिये इसकी परिकल्पना की गई है। ब्रह्यचर्य आश्रम में ज्ञानार्जन के माध्यम से …

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सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उठाए कदम

सशक्तिकरण वह शस्त्र है जो न सिर्फ महिलाओं के अधिकारों दिलाने के लिए आवाज देता हैं बल्कि समाज के प्रत्येक मानव को अपने अधिकारों के प्रति जागृत करता है। वही महिला सशक्तिकरण का सीधा सा अभिप्राय है कि महिलाओं को अधिक शक्ति सम्पन्न बनाना है। ताकि उनकी सुप्त चेतना, क्षमता व योग्यताओं का विकास संभव हो …

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