जैव भू-रसायन चक्र के प्रकार

विभिन्न अध्ययनों से पता चला हे कि पिछले 100 करोड़ों वर्षों में वायुमंडल व जलमंडल की सरंचना में रसायनिक घटकों का संतुलन लगभग एक जैसा अर्थात बदलाव रहित रहा है। रासायनिक ऊतकों से होने वाले चक्रीय प्रवाह के द्वारा बना रहता है। यह चक्र जीवों द्वारा रासायनिक तत्वों के अवशोषण से आरंभ होता हे और उनके वायु जल …

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ऊर्जा के अनवीकरणीय व नवीकरणीय स्रोत

सामान्य अर्थ में हम यह कहते हैं कि कोई भी वस्तु जिससे कि उपयोग में लाई जाने वाली ऊर्जा का हम दोहन कर सकते हैं, वह ऊर्जा का स्रोत है। ऐसे विविध स्रोत हैं जो हमें विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। आप कोयला, पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और प्राकृतिक गैस से परिचित होंगे। इसी …

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आयनिक बंध किसे कहते हैं सोडियम क्लोराइड में आबंधन इस प्रकार समझा जा सकता है।

एक धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉनों के हस्तांतरण से जो रासायनिक बंध बनता है उसे आयनिक बंध (ionic bond or electrovalent bond) कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब सोडियम धातु और क्लोरीन गैस (अधातु) को एक-दूसरे के पास लाया जाता है तो वे तीव्र अभिक्रिया द्वारा सोडियम क्लोराइड बनाते हैं। इसे नीचे दिखाया गया है। 2Na(s) …

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अणु किसे कहते हैं ? अणुओं का द्रव्यमान

अणु एक निश्चित व्यवस्था में एक या अलग तत्वों के दो या दो से अधिक परमाणुओं का समुच्चय है। जिसमें परमाणु रासायनिक बलों या रासायनिक संयोजन द्वारा एक दूसरे से बंधे हुये हैं। परमाणु किसी भी पदार्थ का सबसे सूक्ष्म कण है परन्तु वह स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता। इसके विपरीत अणु पदार्थ या यौगिक …

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आकाश तत्व का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

संसार में पंच महा भूतो में आकाश तत्व प्रधान होता है। यह सबसे अधिक उपयोगी एवं प्रथम तत्व है। जिस प्रकार परमात्मा असीम एंव निराकार है उसी प्रकार आकाश तत्व का असीम एवं निराकार है। आकाश तत्व का उसी प्रकार नाश नही हो सकता जिस प्रकार ईश्वर को कभी नश्ट नहीं किया जा सकता। भारतीय मान्यताओं …

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प्राकृतिक चिकित्सा का अर्थ एवं परिभाषा || भारत में प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

प्राकृतिक तत्वों जैसे- धूप, मिट्टी, जल, हवा आदि द्वारा रोग पर तुरन्त नियंत्रण प्राप्त करने की पद्धति को प्राकृतिक चिकित्सा कहते है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों को जड़ से समाप्त करने में सक्षम है। प्राकृतिक चिकित्सा सभी चिकित्सा प्रणालियों में सर्वाधिक पुरानी चिकित्सा पद्धति है। प्राचीन काल से पंचमहाभूतों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश तत्व की …

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पैरा थायराइड ग्रंथि का कार्य क्या है?

पैरा थायराइड ग्रंथि (Parathyroid gland) मसूर के दाने के आकार की चार छोटी-छोटी ग्रंथियों का समूह है, जिनमें से प्राय: दो-दो थाइरॉइड ग्रंथि के प्रत्येक खण्ड की पोस्टीरियर (पिछली सतह) में स्थित रहती है। ये लगभग 3-4 मि0मी0 व्यास की होती है और पीले भूरे रंग की होती है। जिन कोशिकाओं से ये बनी होती है, …

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थायराइड ग्रंथि की संरचना एवं कार्यो का वर्णन कीजिए |

थायराइड ग्रंथि ग्रीवा में श्वास प्रणाल (Trachea) के सामने निचले सर्वाइकल और प्रथम थोरेसिक वर्टिब्रा के स्तर पर स्थित रहती है। यह दो खण्डों में विभक्त रहती है जो लेरिक्स (स्वर यंत्र) और ट्रेकिया (श्वास प्रणाल) के मध्य जोड़ के दोनों तरफ स्थित रहती है। एक सामान्य वयस्क में थायराइड ग्रंथि का वजन लगभग 25-40 ग्राम …

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अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए |

हमारे शरीर में दो अधिवृक्क ग्रंथियाँ Adrenal gland होती हैं तथा दोनों गुर्दों की चोटी पर स्थित होती है। यह connective tissue capsule से घिरी होती हैं और आंशिक रूप से वसा के एक द्वीप में दबी रहती हैं। अधिवृक्क ग्रंथि को Suprarenal Glands भी कहा जाता है । एड्रीनल कॉर्टेक्स एड्रीनल मैड्यूला (Adrenal Cortex) (Adrenal Medulla) …

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पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) की संरचना एवं कार्य

पीयूष ग्रंथि क्या है? मानव शरीर रचना में पीयूष ग्रंथि Pituitary Gland या Hypophysis एक मटर के आकार की अंत:स्रावी ग्रंथि है। मनुष्यों में इसका वजन 0.5 ग्राम (0.02 ओस) होता है। यह  Sella Turnica या  Hypophysial Fosa में Hypothalamus के नीचे स्थित होती है। पीयूष ग्रंथि Pituitary Gland एक अति महत्वपूर्ण अंत:स्रावी ग्रंथि है जिसे …

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