मगध साम्राज्य का उदय

प्राचीन भारतीय इतिहास में मगध का विशेष स्थान है । प्राचीन काल में भारत अनेक छोटे-बड़े राज्यों की सत्ता थी । मगध के प्रतापी राजाओं ने इन राज्यों पर विजय प्राप्त कर भारत के एक बड़े भाग पर विशाल एवं शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की और इस प्रकार मगध के शासकों ने सर्वप्रथम अपनी साम्राज्यवादी प्रवृत्ति …

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गुप्त साम्राज्य

मौर्यो के पश्चात् भारत पुन: छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त हो गया यद्यपि कुषाणों ने उत्तरी भारत के विशाल भू-भाग पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था, वे सम्पूर्ण देश की राजनीतिक एकता के सूत्र में आबद्ध नहीं कर सके गुप्तवंश के अभ्युदय के साथ ही साथ उत्तरी भारत में पुन: राजनीतिक एकता की स्थापना हुर्इ । …

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महापाषाण संस्कृति

दूसरी शताब्दी र्इसा पूर्व तक कावेरी नदी के मुहाने के आस-पास के क्षेत्र पर उन लोगों का अधिकार था जिन्हें मेगालिथि (महापाषाण) संस्कृति का निर्माता कहा जाता है । क्या आप जानते हैं कि मेगालिप (महापाषाण) क्या है ? मेगालिप दो शब्दों ‘मेगा’ और ‘लिप’ से मिलकर बना है । ‘मेगा’ का अर्थ है ‘बड़ा’ और …

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सातवाहन वंश का इतिहास

सातवाहन वंश का संस्थापक ‘सिमुक’ था। सिमुक के बाद उसका छोटा भार्इ कन्ह (कृष्ण) राजा बना क्योंकि सिमुक पुत्र शातकर्णि अवयस्क था। कृष्ण के पश्चात सिमुक का अवयस्क पुत्र श्री शातकर्णि (प्रथम शातकर्णि) शासक हुआ। शातकर्णि प्रथम प्रारम्भिक सातवाहन नरेशो  में सबसे महान था। उसने अंगीय कुल के महारठी त्रनकयिरों की पुत्री नागविका के साथ विवाह …

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वाकाटक वंश का इतिहास

सातवाहनों के पतन के बाद पश्चिमी और दक्षिणी भारत पुन: छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त हो गया । आन्तरिक कलह के कारण शक क्षत्रपों की शिक्त् का हास हो गया सर्वोच्च शक्ति के अभाव में वाकाटक वंश के शासको ने पश्चिमी और दक्षिणी भारत में अपनी सत्ता की स्थापना की। तीसरी से छठी शताब्दी र्इ. तक वाकाटकों …

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पल्लव वंश का इतिहास

पल्लव भी स्थानीय कबीले के लोग थे । इन्होंने दक्षिणी आंध्र और उत्तरी तमिलनाडु में अपना राज्य स्थापित किया था । वे स्वयं को ब्राम्हण मानते थे । इन्होंने कांचीपुरम को अपनी राजधानी बनाया । यह वैदिक ज्ञान का एक बड़ा केन्द्र बन गया । पल्लवों का राजनैतिक इतिहास स्पष्ट नहीं है । प्रारम्भिक राजा पाण्ड्य …

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राष्ट्रकूट वंश इतिहास

राष्ट्रकूट वंश वाले बादामी के चालुक्यों के सामन्त थे । राष्ट्रकूट वंश का प्रथम प्रसिद्ध शासक दंतिदुर्ग था। उसने अपने अधिराज विक्रमादित्य प्रथम की सहायता उस समय की थी जब वह पल्लवों से युद्ध कर रहा था । राष्ट्रकूट वंशों ने र्इस्वी की आठवी शताब्दी के मध्य में चालुक्यों की अधीनता का जुआ उतार फेंका और …

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चोल वंश क्या है ?

पल्लव और पाण्डय जैसे अधिक शक्तिशाली राज्यों के उदय के कारण चोल वंश को अनेक वर्षो तक ग्रहण सा लगा रहा । इन शक्तियों के पतन के साथ ही चोल एक बार फिर उभरे । नवीं से बारहवीं शताब्दी तक यह राज्य दक्षिण में सर्वाधिक शक्तिशाली बना रहा । चोल शासकों ने केवल सुदृढ शासन व्यवस्था …

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इस्लाम धर्म का उदय एवं विस्तार

इस्लाम धर्म के उदय के पूर्व अरबवासी मूर्तिपूजक थे । वे अनेक कबीलों में बंटे हुए थे । प्रत्येक कबीले का एक नेता (सरदार) था । मुहम्मद साहब का जन्म (570-632 र्इ) हुआ था । उन्होंने इस्लाम नामक नए धर्म की शिक्षा दी । इस धर्म ने अरब लोगों के अतिरिक्त, विश्व के अन्य भागों में …

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तुगलक वंश क्या है ?

गयासुदु्दीन तुगलक (1320-1325 ई.) तुगलक वंश का संस्थापक गाजी मलिक था । वह 1320 र्इ. में गयासुद्दीन तुगलक शाह के नाम से गद्दी पर बैठा था ।गयासुद्ददीन तुगलक ने सुल्तान अलाउद्दीन खलजी के शासन काल में महत्वपूर्ण पद प्राप्त कर लिया था । वह दीपालपुर का हाकिम था । उसने सफलतापूर्वक सीमाओं की रक्षा की। उसने …

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