निर्देशन क्या है?

निर्देशन का सामान्य अर्थ संचालन से है।  प्रत्येक स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मार्गदर्शन करना, उनको परामर्श देना, प्रोत्साहन करना तथा उनके कार्यों का निरीक्षण करना निर्देशन कहलाता है। निर्देशन का अर्थ  निर्देशन का तात्पर्य संचालन से है। विभिन्न स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मार्गदर्शन करना, उनको परामर्श देना तथा उनके कार्य …

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हड़ताल क्या है?

हड़ताल का तात्पर्य अस्थायी रूप से श्रमिकों द्वारा कार्य में विध्न डालना है। यह श्रमिक द्वारा स्वत: कार्यमुक्ति है।औद्योगिक संघर्ष अधिनियम की धारा 2 (क्यू) के अनुसार व्यक्तियों के समूह द्वारा, जो मिलकर कार्य करते हैं सामूहिकता से कार्य नहीं करना अथवा एकमत होकर कार्य करने से मना करना, हड़ताल कहलाता है।’इसी प्रकार हड़ताल का तात्पर्य …

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संघर्ष सम्बन्धी अधिनियम

यदि हम भारत में औद्योगिक संघर्षों के विधानों का अवलोकन करें, तो स्पष्ट होता है कि यह पुराना नहीं है। इसका कारण यह है कि भारत में औद्योगिक जीवन में संघर्ष का प्रारम्भ 1914-18 के बाद हुआ। इससे पहले मालिक और मजदूरों के विवादों का निबटारा 1860 के मालिक एवं श्रमिक (विवाद) अधिनियम द्वारा होता था। …

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ऊष्मागतिकी के नियम

ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम  जूल के नियमानुसार ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम ही है। W=JHA निकाय को दी गर्इ ऊष्मा संपूर्ण रूप से कार्य में परिवर्तित नहीं होता। इसका कुछ भाग आंतरिक ऊर्जा वृद्धि में व्यय होता है एवं बाकी कार्य में बदलता है अत: प्रथम नियम इस प्रकार होगा ∆Q=∆U+∆W ∆Q …

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प्रागैतिहासिक संस्कृति

प्रागैतिहासिक काल  प्रागैतिहासिक शब्द प्राग+इतिहास से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है- इतिहास से पूर्व का युग । मानव प्रगति की कहानी के उस भाग को इतिहास कहते है जिसके लिये लिखित वर्णन मिलते है । परन्तु लेखन-कला के विकास के पहले भी मानव लाखों वर्षो तक पृथ्वी पर जीवन व्यतीत कर चुका था । …

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हड़प्पा सभ्यता की विशेषताएं

इस सभ्यता के लिये साधरत: तीन नामो का प्रयोग होता है- सिन्धु सभ्यता, सिंधु घाटी की सभ्यता और हड़प्पा सभ्यता। इन तीनों शब्दों को एक ही अर्थ है। इनमें से प्रत्येक शब्द की एक विशिष्ट पृष्ठभूमि है। प्रारंभ में 1921 में जब पश्चिमी पंजाब के हड़प्पा स्थल पर इस सभ्यता का पता चला है और अगले …

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हड़प्पा सभ्यता का महत्व और पतन

हड़प्पा सभ्यता का प्राचीन भारतीय संस्कृति का भारत और विश्व के इतिहास को जानने में महत्वपूर्ण योगदान है । धार्मिक विश्वासों सामाजिक परम्पराओं व अन्य कर्इ क्षेत्रों में आज भी भारत में हड़प्पा से समानतायें है । इसे भारत की श्रेष्ठ व गौरवपूर्ण प्राचीनतम सभ्यता कहा जाता है । सिन्धु सभ्यता की खोज ने भारत के …

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उत्तर वैदिक सभ्यता

सामाजिक जीवन-  उत्तर वैदिक काल में साहित्य से तात्कालीन सामाजिक दशा पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । उत्तर वैदिक काल में ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में समाज का चार सही-विभाजन शुरू हुआ । गोत्र और आश्रम की नर्इ संकल्पनाएं पनपीं । पितृसत्तात्मक परिवार चलते रहे । लेकिन महिलाओं की स्थिति में गिरावट आर्इ । उत्तर …

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जैन धर्म की उत्पत्ति एवं सिद्धान्त

वैदिक काल के अन्तिम चरण में हमें जटिल और महंगे कर्मकाण्ड, पशु-बलि, ब्राम्हणों की सर्वोच्चता और वर्ण व्यवस्था द्वारा समाज में, पैदा किये गये भेद-भाव के प्रति उग्र प्रतिक्रिया दिखार्इ पड़ती है । धार्मिक सुधार का यह बिलकुल सही अवसर था । र्इसा पूर्व छठी शताब्दी के दौरान वैदिक धर्म की औपचारिक और कर्मकाण्ड की व्यवस्थाओं …

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गौतम बुद्ध का जीवन परिचय

बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे, जो बाद में बुद्ध (या ज्ञान प्राप्त व्यक्ति) के रूप में जाने जाने लगे । उनका जन्म 563 र्इ.पू. नेपाल की पहाड़ियों में स्थित लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ । उनके पिता शाक्य क्षत्रिय कुल के थे और कपिलवस्तु के (सम्भवत:) निर्वाचित शासक थे । जीवन की क्रूर वास्तविकताओं …

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