अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं?

प्रत्येक अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपने देश में उपलब्ध सीमित साधनों के प्रयोग से मानव की असीमित आवश्यकताओं की संतुष्टि है। मनुष्य की आवश्यकताएं वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन से संभव है। उत्पादन के पश्चात् जिसे व्यक्ति उपभोग करता है। उत्पादन के साधन आर्थिक गतिविधियों द्वारा उत्पादन की प्रक्रिया पूर्ण करते है। आर्थिक गतिविधियों के माध्यम …

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आर्थिक वृद्धि और विकास

आर्थिक वृद्धि किसी अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पादित वस्तुओं सेवाओं की कुल मात्रा में वृद्धि करना आर्थिक वृद्धि कहलाता है । यह वृद्धि निरतंर व दीर्घकाल तक जारी रहनी चाहिये । यदि आकस्मिक रूप से वस्तुओं और सेंवाओं की मात्रा में हुर्इ वृद्धि आर्थिक वृद्धि नहीें कहलायेगी । जैसे एक साल सभी परिस्थितियों के अनुकूल रहने पर कृषि …

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भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

1. कृषि पर निर्भरता :- भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। कृषि का कुल राष्ट्रीय आय में 30 प्रतिशत का योगदान है। विकसित देशों में राष्ट्रीय आय में योगदान 2से 4 प्रतिशत है। वर्षा कृषि के लिये जल का प्रमुख स्त्रोत है। अधिकांश क्षेत्रों में पुरानी तकनीक से कृषि की जाती है। …

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पूर्ति तथा पूर्ति का नियम

पूर्ति शब्द का अर्थ किसी वस्तु की उस मात्रा से लगाया जाता है, जिसे कोर्इ विक्रेता ‘एक निश्चित समय’ तथा ‘एक निश्चित कीमत’ पर बाजार में बेचने के लिए तैयार रहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह कहा जाये कि बाजार में गेहू की पूर्ति 1,000 क्विटंल की है, तो यह कथन उचित नहीं है, क्योकि …

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मुद्रा की परिभाषा

विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा को अलग-अलग दृिष्टकोण से परिभाषित किया है विभिन्न दृिष्टकोणों को वर्गीकृत किया सकता है। सामान्य स्वीकृत के अनुसार परिभाषाएं इस वर्ग की परिभाषाएं मुद्रा के सर्वग्राहयता के गुण पर बल देती है। प्रो माशर्ल -’’मुद्रा के अन्तर्गत ये समस्त वस्तएुं सम्मिलित की जाती है जो किसी समय अथवा किसी स्थान में बिना …

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मुद्रा के कार्य

मुद्रा का कार्य लेन -देन को इतना सरल और सस्ता बनाना है कि उत्पादन में जितना भी माल बने वह नियमित रूप से वह उपभोक्ताओं के पास पहचुंता रहे और भगु तान का क्रम निरंतर चलता रहे। प्रो. चैण्डला के अनुसार-“किसी आथिर्क प्रणाली में मुद्रा का कवे ल एक मौलिक कार्य है, वस्तुए तथा सेवाओं के …

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मुद्रा के प्रकार

मुद्रा समाज में अनके रूपों में प्रचलित रही हैं तथा विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा के वगीर्करण की विभिन्न रीतियाँ अपनायी हैं। मुद्रा का वर्गीकरण  है- वास्तविक मुद्रा और हिसाब की मुद्रा, विधि ग्राह्य मुद्रा और ऐच्छिक मुद्रा, धातु मुद्रा और पत्र-मुद्रा, सुलभ मुद्रा और दुर्लभ मुद्रा, सस्ती मुद्रा और महँगी मुद्रा, वास्तविक मुद्रा और हिसाब की …

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हठयोग साधना की परम्परा और ऐतिहासिक विकास

हठयोग साधना की परम्परा हठयोग साधना का अन्तिम लक्ष्य महाबोध समाधि है। हठयोग साधना की परम्परा में हठयोग के आदि उपदेष्टा योगीश्वर भगवान शिव से प्रारम्भ होती है। अन्य योगों की परम्परा की तरह ही योग विज्ञान का ऐतिहासिक विकास तभी से शुरू हो जाता है जब से मनुष्य का अस्तित्व शुरू होता हैं। भारतीय संस्कृति …

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सरकारी बजट क्या है?

बजट शब्द फ्रेंच  शब्द बजटे (Baugatte) से लिया गया है जिसका आशय एक छोटे से थैले से है। इस प्रकार बजट सरकार की आय एवं व्ययों का एक आथिर्क विवरण है। भारतीय संविधान के अनुसार- ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ को लोक सभा तथा राज्य सभा के सम्मुख प्रस्ततु करना चाहिए। संविधान में बजट पर बहस के लिए …

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आर्थिक नियोजन का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

‘‘आर्थिक क्षेत्र में नियोजन का वही महत्व है जो आध्यात्मिक क्षेत्र में र्इश्वर का है’’ आथिर्क नियोजन बीसवीं शताब्दी की देन है। यूरोपीय देषो में आद्यैागिक क्रांि त के फलस्वरूप उत्पादन की नर्इ प्रणाली का जन्म हुआ। इस प्रणाली में निजी सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षा प्रदान की गर्इ और प्रत्येक व्यक्ति को व्यावसायिक स्वतंत्रता प्रदान …

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