साक्षात्कार क्या है ? साक्षात्कार की तैयारी कैसे करें ?

सामान्यत: दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी विशेष उद्देश्य से आमने-सामने की गयी बातचीत केा साक्षात्कार कहा जाता है। साक्षात्कार एक प्रकार की मौखिक प्रश्नावली है जिसमें हम किसी भी व्यक्ति के विचारों और प्रतिक्रियाओं केा लिखने के बजाय उसके सम्मुख रहकर बातचीत करके प्राप्त करते हैं। साक्षात्कार एक आत्मनिष्ठ विधि है इसके माध्यम …

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प्रश्नावली क्या है ?

प्रश्नावली प्रश्नों या कथनों का समूह हैं, जिसके माध्यम से व्यक्ति से पूछकर सूचनाएं एकत्रित की जाती हैं। यह निर्माण में एक आत्मनिष्ठ तथा प्रयोग में वस्तुनिष्ठ विधि है तथा इसका प्रयोग तब किया जाता है जब तथ्यात्मक सूचनाओं की आवश्यकता होती है। प्रश्नावली का निर्माण इस प्रकार किया जाता है जिससे व्यक्ति के वांछित गुणों …

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अधिगम (सीखने) का अर्थ एवं सिद्धान्त

सीखने का अर्थ  सीखना अनुभव व प्रशिक्षण द्वारा व्यिक्त्त के व्यवहार में परिवर्तन है। अनुभव दो प्रकार का हो सकता है, प्रथम प्रकार का अनुभव बालक स्वयं ग्रहण करता है जबकि दूसरे प्रकार का अनुभव, अन्य लोगों के अनुभव से लाभ उठाने की श्रेणी में आता है। प्रशिक्षण के अन्तर्गत औपचारिक शिक्षा आती है। एक माँ …

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समाजमिति विधि क्या है ?

समाजमिति तकनीक का प्रयोजन समूह में व्यक्ति विशेष के सामाजिक सम्बन्धों का अध्ययन करना है। इसके द्वारा विशेषकर से एकाकी और उपेक्षितों तथा अस्वीकृत व्यक्तियों की व्यक्तित्व सम्बन्धी समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। व्यक्तियेां के सामाजिक व्यवहार का आकलन करने हेतु यह तकनीक सूचना प्राप्त करने का एक उपयोग माध्यम है। इस …

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शैक्षिक मापन एवं मूल्यांकन

मापन का अर्थ शैक्षिक मापन की विशेषताएँ हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षण अपने चारों ओर हो रहे परिवर्तनों के प्रति सजग रहते हैं तथा उन प्रत्येक परिवर्तनों का मात्रात्मक आंकलन करते हैं जो हमें किसी न किसी प्रकार प्रभावित करते हैं। शिक्षा सतत् गत्यात्मक प्रक्रिया में इससे जुडे़ प्रत्येक व्यक्ति, छात्र, अभिभावक, अध्यापक, प्रशासक तथा …

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शैक्षिक मापन तथा मूल्यांकन की तकनीक

मापन तथा मूल्यांकन का शिक्षण प्रक्रिया की गुणवत्ता के निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह केवल वर्तमान स्थिति की ही व्याख्या नहीं करता वरन भविष्य में होने वाले परिवर्तन की रूपरेखा भी तैयार करता है। चूंकि आज लिया जाने वाला कोर्इ भी निर्णय तुरन्त कोर्इ परिणाम नहीं देता बल्कि उसका असर भविष्य में दिखता है …

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भारत की पंचवर्षीय योजनाएं

भारत में आथिर्क नियोजन के लगभग छ: दशक पूरे हो चुके है।। इन वर्षों में नियोजन के अन्तगर्त कितना आथिर्क विकास हुआ, क्या विकास के दर पयार्प्त है।? क्या विकास उचित दिशा में हो रहा है? इत्यादि बातों का अध्ययन हम यहां करेगें। प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) यह योजना 1 अप्रैल, 1951 से प्रारभं हुर्इ। इस …

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परीक्षण वैधता क्या है ?

परीक्षण वैधता का परीक्षण के उद्देश्यों से घनिष्ठ सम्बन्ध है। एक अवैध परीक्षण कभी भी निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता। कोर्इ परीक्षण जितनी शुद्धता और सार्थकता से अपने उद्देश्यों का मापन करता है वह परीक्षण उतना ही वैध होता है। अत: किसी परीक्षण की वैधता उसकी वह मात्रा है जिस सीमा तक वह उस वस्तु …

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परीक्षण मानक का अर्थ एवं महत्व

शिक्षा, मनोविज्ञान व समाजशास्त्र के अधिकांश चरों की प्रकृति अपरोक्ष होती है जिसके कारण उनके मापन की किसी एक सर्वस्वीकृत मानक र्इकार्इ का होना सम्भव नही हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्राप्तांकों को अर्थयुक्त बनाने या उसकी व्याख्या करने की समस्या उत्पन्न होती है। इसके लिए परीक्षण निर्माता कुछ ऐसे सन्दर्भ बिन्दु निर्धारित करता है …

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निर्देशन का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

मानव अपने जीवन काल में व्यक्तिगत व सामाजिक दोनों ही पक्षों में अधिकतम विकास लाने के लिए सदैव सचेष्ट रहता है इसके लिये वह अपने आस पास के पर्यावरण को समझता है और अपनी सीमाओं व सम्भावनाओं, हितों व अनहितों गुणों व दोषों को तय कर लेता है। परन्तु जीवन की इस चेष्टा में कभी वे …

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