गैर सरकारी संगठन (NGO) क्या है गैर सरकारी संगठन तथा स्वयं सेवी संगठन में अन्तर ?

गैर सरकारी संगठन (NGO) के अन्तर्गत ऐसे समूह व संस्थान आते हैं जो पूर्ण रुप से या अधिकांश रुप से गैर-सरकारी होते हैं। इनका उद्देश्य व्यावसायिक न होकर मुख्यतः मानव मात्र के कल्याण और सहकारी तौर पर काम करना होता है। औद्योगिक देशों में ये प्राइवेट एजेंसियां होती हैं ये (एजेसियां) संगठन अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए …

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सामाजिक क्रिया का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, उद्देश्य, सिद्धांत

सामाजिक क्रिया समाज कार्य की सहायक व्यवस्था है। शुरु से ही समाज कार्य का आधार मानवता रही है। सामाजिक क्रिया का जिसे शुरुआत में समाज सुधार का नाम दिया गया है, समाज कार्य के अभ्यास में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। 1922 में मेरी रिचमंड ने सामाजिक क्रिया का उल्लेख समाज कार्य की चार प्रमुख प्रणालियों …

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सामुदायिक विकास कार्यक्रम क्या है? सामुदायिक विकास कार्यक्रम का क्या उद्देश्य है?

सामुदायिक विकास सम्पूर्ण समुदाय के विकास की एक ऐसी पद्धति है जिसमें जन-सहभाग के द्वारा समुदाय के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयत्न किया जाता है। भारत की लगभग 74 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामों में रहती है। जनसंख्या के इतने बडे़ भाग की सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का प्रभावपूर्ण समाधान किये बिना हम कल्याणकारी राज्य के लक्ष्य को …

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सामुदायिक संगठन क्या है, परिभाषा, उद्देश्य, सिद्धांत

सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया है। सामुदायिक संगठन का तात्पर्य किस समुदाय या समूह में लोगों द्वारा आपस में मिलकर कल्याण कार्यों की योजना बनाना तथा इसके कार्यान्वयन के लिए उपाय तथा साधनों को निश्चित करना है किसी समुदाय से सम्बन्धित प्रक्रियाएं अनेक प्रकार की हो सकती है अत: सामुदायिक संगठन की प्रक्रिया का अभिप्राय केवल उस …

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स्वयंसेवी संस्था क्या है स्वयंसेवी संस्था के नियम, मापदंड, विशेषताएं

स्वयंसेवी शब्द लैटिन भाषा के शब्द, जिसका अर्थ है ‘इच्छा’ अथवा ‘स्वतंत्रता’ से लिया गया है। भारतीय संविधान की धारा 19 (1) (ऋ) के अन्तर्गत भारतीय नागरिकों को समुदाय बनाने का अधिकार प्राप्त है। स्वयंसेवी संस्था बनाने के नियम स्वयंसेवी समाज सेवाओं की विभिन्न परिभाषाओं की समीक्षा करते हुए इनकी चार प्रमुख विशेषताएं बतलायी हैं :- …

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वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा, विशेषताएँ, उद्देश्य

भारतीय समाज में आरम्भ में वैयक्तिक आधार पर सहायता करने की परम्परा रही है। यहाँ पर निर्धनों को भिक्षा देने, असहायों की सहायता करने, निराश्रितों की सहायता करने, वृद्धों की देखभाल करने आदि कार्य किये जाते रहे हैं, जिन्हें समाज सेवा का नाम दिया जाता रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाये तो हम निश्चित रूप …

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