सामाजिक यथार्थ का अर्थ, परिभाषा, प्रकृति
सामाजिक यथार्थ से तात्पर्य ‘‘समाज से सम्बन्धित किसी भी घटनाक्रम का ज्यों का त्यों चित्रण ही सामाजिक यथार्थ कहलाता है।’’ इसके अतिरिक्त सामाजिक यथार्थ से तात्पर्य आम प्रचलित शब्दों में मनुष्य द्वारा की गई सामान्य क्रियाओं के सच्चे चित्रण से लिया जाता है। साहित्य से ही हमें तत्कालीन समाज की परिस्थितियों तथा जन-सामान्य के जीवन का …