सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की प्रमुख रचनाएँ

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म सन् 1896 ई. में बसन्त पंचमी के दिन बंगाल के महिषादल नामक स्थान पर हुआ। निराला की जन्म तिथि के विषय में विद्वान में पर्याप्त मतभेद भी पाये जाते है। निराला के पिता पं. राम सहाय, गढ़ा कोला, जिला उन्नाव के रहने वाले थे आर्थिक परिस्थिति के कारण कलकत्ता में जाकर पुलिस …

Read more

सुमित्रानंदन पंत की प्रमुख रचनाएँ

सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई  सन 1900 ई. रविवार को कौसानी में हुआ। यह स्थान अल्मोड़ा नगर से 53 किलोमीटर की दूरी पर हिमालय की सौन्दर्य  पुलकित घाटी में स्थित है। सुमित्रानंदन पंत 1910 ई में अल्मोड़ा गए। यही 15-16 वर्ष  की आयु से नियमित कविता लिखना शुरू किया। आठवी कक्षा से ही सुमित्रानंदन पंत ने हिन्दीकविता …

Read more

छायावादी कवि के नाम और उनकी रचनाएँ

छायावादी काव्य का प्रारम्भ कब हुआ? यह प्रश्न आज भी विवाद का विषय बना हुआ है। स्थूल  रूप से यह माना जाता है कि द्विवेदी युग  सन् 1920 के बाद निष्पभाव हो गया था। वस्तुतः आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित पत्रिका ‘‘सरस्वती‘‘ ही संपादन अवधि को ही द्विवेदी युग की संज्ञा देना उपयुक्त है। उनके कार्यकाल …

Read more

भाषा की परिभाषा, प्रकृति, विशेषताएं, महत्व

उच्चरित ध्वनि संकेतों की सहायता से भाव या विचार की पूर्ण अथवा जिसकी सहायता से मनुष्य परस्पर विचार-विनिमय करता या सहयोग करते हैं, उस यादृच्छिक रूढ़ ध्वनि-संकेतों की प्रणाली को भाषा कहते हैं’’। यहां तीन बातें विचारणीय हैं- ’’सार्थक शब्दों के समूह या संकेत को भाषा कहते हैं। यह संकेत स्पष्ट होने चाहिए। मनुष्य के जटिल …

Read more

केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय एवं रचनाएं

समकालीन कविता में केदारनाथ सिंह एक महत्वपूर्ण नाम है। अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक‘ (1959) से  लेकर ‘सृष्टि पर पहरा‘ ‘2014‘तक उनका व्यापक काव्य संसार फैला हुआ है। समकालीन कविता में उन्हें बहुश्रुत और  बहुउद्धत कवि के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने अपने समय की कविता के दनात्मक पक्ष को सबल करने के साथ …

Read more

शरद जोशी जीवन परिचय, रचनाएँ, भाषा शैली, साहित्य में स्थान

शरद जोशी ने सामाजिक परिवर्तनों, राजनीतिक और सांस्कृतिक उथल-पुथल को बड़ी बारीकी से समझा और देखा था।  शरद जोशी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर गहरा असर पड़ा। शरद जोशी वर्तमान व्यवस्था से बहुत क्षुब्ध थे। वे स्वयं कदम-कदम पर दिखने वाले व्यवस्था के खोखलेपन को एक पल भी सहने के लिए तैयार नहीं होते थे। वे …

Read more

श्रीलाल शुक्ल का जीवन परिचय, प्रमुख रचनाएँ, भाषा शैली

श्रीलाल शुक्ल हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार थे। वह समकालीन कथा-साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिये विख्यात थे। श्री लाल शुक्ल का (जन्म 31 दिसम्बर 1925) को हुआ, तथा निधन- 28 अक्तूबर 2011 को। जनपद के समकालीन कथा साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिये विख्यात साहित्यकार माने जाते थे। उन्होंने ‘‘1947 में’’ इलाहाबाद विश्वविद्यालय से …

Read more

तुलनात्मक साहित्य का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

तुलनात्मक साहित्य का अर्थ तुलना मानव की सहज प्रवृत्ति है। तुलना विकसित मस्तिष्क की पिपासा से परिनित ज्ञान-यात्रा है। मानक हिंदी कोश में ‘तुलना’ शब्द के अर्थ दिए हैं- ‘‘) काँटे, तराजू आदि पर रखकर तौला जाना। ) दो या अधिक वस्तुओं के गुण, मान आदि के एक-दूसरे से घट या बढ़कर होने का विचार।) तारतम्य, …

Read more

उपन्यास – अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

उपन्यास शब्द का शाब्दिक अर्थ है सामने रखना। उपन्यास मे प्रसादन अर्थात् पाठक को प्रसन्न रखने का मुख्य भाव छिपा होता है, अतएव पाठक जिज्ञासावश अनवरत् उससे जुड़ा रहना चाहता है। ‘‘उपन्यास की व्याख्या में कहा जा सकता है कि उपन्यास लेखक घटनाओं का संयोजन इस तरह करता है कि उसे पढ़कर पाठक को प्रसन्नता हो, …

Read more

ब्रजभाषा का विकास और ब्रजभाषा की विशेषताएं

साहित्य समाज का उपजीव्य है और मनुष्यों के समूह से बनता है। ब्रजभाषा काव्य का व्यवस्थित इतिहास अष्टछाप के कवियों से ही प्राप्त होता है इससे पहले यत्र-तत्र स्फुट रचनाएँ तो प्राप्त होती हैं किन्तु प्रामाणिक रूप से ब्रजभाषा की किसी भी रचना या रचनाकार का उल्लेख नहीं प्राप्त होता भाषा की दृष्टि से सूर और …

Read more