स्वास्थ्य की परिभाषा

मनुष्य की शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक तथा सामाजिक सुखावह अवस्था को स्वास्थ्य (Health) कहते हैं । स्वास्थ्य जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है।  व्यक्ति को स्वस्थ तब कहा जाता है जब उसे कोई रोग नहीं होता है अर्थात् रोग न होने की अवस्था स्वास्थ्य है। स्वास्थ्य की परिभाषा अनेक विचारकों ने समय-समय पर स्वास्थ्य की परिभाषा दी …

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मस्तिष्क के विभिन्न भाग एवं उनके कार्य का वर्णन

केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र की दो प्रमुख संरचनाएँ सुषुम्ना (spinal cord) एवं मस्तिष्क (brain) हैं इसका अनुमानित भार 1420 ग्राम होता हें मस्तिष्क सिर की खोपड़ी में अवस्थित होता हैं मस्तिष्क तीन सुरक्षा परतों से घिरा होता हे जो कि उत्तकों से बनी होती हे, ऐसी सुरक्षा परतों को मेनिंग्स कहा जाता हैं सबसे बाहरी परत को …

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औषधि का अर्थ, परिभाषा एवं वर्गीकरण

कई प्रकार के वनस्पतियां से प्राप्त होने वाली पार्थिव द्रव्य जिनके द्वारा शरीर में उत्पन्न रोग सही होकर रोगी स्वस्थ होता है औषधि कहलाते हैं। औषधि का अर्थ औषधि शब्द के अनेक अर्थ दिये गए हैं। सायण ने व्युत्पत्ति दी है-ओश: पाक: आसु धीयते इति ओशधय: जिनके फल पकते हैं, उन्हें औषधि कहते हैं। यास्क ने …

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रोग क्या है रोग के प्रकार?

शरीर में जब किसी प्रकार का कष्ट या तकलीफ होता है या जब स्वास्थ्य हमारा साथ नहीं देता हम अपने स्वाभाविक कार्य को ठीक प्रकार से नहीं कर पाते, तब हम कहते हैं कि हमें रोग हो गया या हम बीमार हो गए।  जब हमारा खान-पान अनियमित या प्रकृति विरूद्ध हो, आहार-विहार दूषित होता है, चिन्तन …

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जल चिकित्सा की विधियाँ

जल चिकित्सा का बहुत अधिक महत्व दिया गया है। रूद्र और वरूण देवों को जल चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रगण्य बताया गया है। रूद्र को प्रथम दिव्य भिशक् माना गया है। इसीलिए रूद्र को जल-चिकित्सक भी कहा जाता हैं। इसी प्रकार वरूण को वैद्यों का स्वामी और चिकित्सक कहा गया है। सोम राजा का कथन है …

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वायु चिकित्सा एवं प्राणायाम चिकित्सा क्या है?

मानव-जीवन का आधार प्राण है। प्राणों की सत्ता से ही जीवन की गतिविधियां हैं एवं शरीर में बल, स्फूर्ति, उद्यम, उत्साह और ओजस्विता है। यदि प्राणशक्ति का संरक्षण, पोषण और संवर्धन किया जाए तो शरीर को व्याधियों से मुक्त किया जा सकता है। शरीर के कण-कण में प्राणों का समावेश है। इनकी शक्ति का हरास होने …

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सूर्य चिकित्सा का वर्णन

प्रकृति मनुष्य के लिए वरदान है। प्रकृति के सभी तत्त्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु ,सूर्य, चन्द्र आदि किसी न किसी रूप में मनुष्य का हित करते हैं। इनमें भी सूर्य की किरणों का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। वेदों में सूर्य-किरणों से चिकित्सा का विस्तार से वर्णन प्राप्त होता है। सूर्य को इस चराचर जगत की आत्मा …

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सांप के प्रकार, सांप के काटने पर क्या करना और नहीं करना चाहिए?

साँप का खौफ मात्रा व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल में रात को ‘साँप’ शब्द का प्रयोग वर्जित है। बच्चों को सिखाया जाता है कि सूरज ढलने के बाद ‘साँप’ की जगह ‘लता’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए और अगर किसी बच्चे ने निषिद्ध शब्द को ऊंची आवाज में बोल दिया तो उसे आस्तिक …

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भूटान का इतिहास, भौगोलिक विवरण और सामाजिक स्थिति

भूटान हिमालय की गगनचुंबी पहाड़ियों और घाटियों में स्थित उन्नत लाभाओं का देश है। भूटान का अपना एक प्राचीन इतिहास है। शायद भूटान ही एक मात्र ऐसा देश है जिसके पास अपनी अविरल ऐतिहासिक किवदन्तियाँ जनश्रुतियाँ,, ऐतिहासिक कथायें, धार्मिक दृष्टान्त के लिए बहुत ही कम और अपर्याप्त सामग्री है।  भूटान का इतिहास भूटान का अपना एक …

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वृद्धावस्था के लक्षण क्या है?

सम्पूर्ण विश्व की सामाजिक व्यवस्था में वृद्धावस्था के लक्षण सामान्यत: एक जैसे ही हैं। देश एवं परिस्थितियों के अनुसार उनके स्तर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं।  वृद्धावस्था के लक्षण वृद्धावस्था के विविध लक्षण है-  30 से 65 वर्श की आयु में रक्त चाप (ब्लड प्रेषर) में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने लगती है।  कोलेस्ट्राल के स्तर …

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