पर्यावरण संरक्षण क्या है पर्यावरण संरक्षण के उपाय?

मानव जन्म लेते ही पर्यावरण के सम्पर्क में आ जाता है। पृथ्वी पर विद्यमान जल, थल, वायु, वनस्पति, पशु-पक्षी आदि ऐसे प्राकृतिक तत्त्व हैं जो प्राणिजगत् के जीवन को सञ्चालित करने के लिए एक ऐसी पर्यावरणीय दशा का निर्माण करते हैं जिससे न केवल समस्त प्राणिजगत् के क्रिया-कलाप सञ्चालित होते हैं अपितु उन्हें एक दूसरे पर …

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पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं तत्व

पर्यावरण (Environment) शब्द का निर्माण दो शब्दों से मिलकर हुआ है – परि आवरण। ‘परि’ का अर्थ है- चारों तरफ से और ‘आवरण’ का अर्थ है- ढँके हुए। इस प्रकार पर्यावरण या वातावरण शब्द का अर्थ हुआ व्यक्ति के आस-पास और चारों ओर जो कुछ भी है, वही उसका पर्यावरण कहा जाता है। मानव के चारों …

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पर्यावरण शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, प्रकृति, महत्व

पर्यावरण शिक्षा उस विशिष्ट शिक्षा को कहते है जो जन-समुदाय को पर्यावरण जानकारियों से परिचित कराकर पर्यावरण बोध को पुष्ट करती है, पर्यावरण कठिनाइयों के कारण और निवारण का मार्ग ढूँढती है तथा भविष्य की कठिनाइयों से आगाह कर जीवन को निरापद बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। पर्यावरणीय शिक्षा मानव की पर्यावरण जन्य चेतना को …

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जल संरक्षण के उपाय एवं प्रकार – Water conservation measures and types

जीवन के लिए वायु के बाद सबसे जरूरी तत्व जल है। जल ही जीवन है। पृथ्वी पर कुल जल क्षेत्र 1460 मिलियन घन किमी. है। लेकिन यह उपलब्ध जल पूरी तरह से उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। इस जल का बहुत मामूली अंष ही मनुष्य के पीने और अन्य के उपयोग में लाने हेतु उपयुक्त …

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हिमनद के प्रकार और उनकी विशेषताएं

हिम रेखा से ऊपर स्थित एक विशाल बर्फ संहति (Mass of Ice) को हिमनद कहते हैं जो गुरुत्वाकर्षण के कारण गतिशील रहती है। ये उच्च अक्षांशों या उच्च पर्वतीय भागों में स्थित हिमक्षेत्र में गतिशील रहते हैं। हिमनद हिमरेखा के ऊपर बर्फ के संचयन तथा संहनन (Accumulation and Compaction) से बनते हैं। सम्पूर्ण पृथ्वी पर सभी …

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जल संसाधन का महत्व एवं जल संसाधन के क्या उपयोग है?

जल एक प्राकृतिक संसाधन है, जिसको एक बार उपयोग के बाद पुन: शोधन कर उपयोग योग्य बनाया जा सकता है। जल ही ऐसा संसाधन है जिसकी हमें नियमित आपूर्ति आवश्यक है जो हम नदियों, झीलों, तालाबों, भू-जल, महासागर तथा अन्य पारस्परिक जल संग्रह क्षेत्रों से प्राप्त करते है। विश्व का 70.87 प्रतिशत भाग जलीय है जबकि …

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नेपाल की प्रमुख नदियाँ, भाषा, जातियां, इतिहास

नेपाल (Nepal) मुख्यत: हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य बसा एक पर्वतीय देश है, जो भारत से पूरी तरह से घिरा हुआ है। इसकी सीमाओं में अगर मानचित्र के आधार पर देखा जाए तो उत्तर में चीन का तिब्बत क्षेत्र तथा दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम में भारत की सीमाएं आती हैं। नेपाल का सम्पूर्ण क्षेत्रफल लगभग …

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वर्षा जल संग्रहण क्या है वर्षा जल के संग्रहण के लिए विभिन्न विधियों को आवश्यकता अनुसार अपनाया जा सकता है

वर्षा जल संग्रहण का सामान्य अर्थ वर्षा के जल को एकत्रित करने से है। विशेष अर्थों में यह भूमिगत जल के पुनर्भरण बढ़ाने की तकनीक है। इस तकनीक में जल को बिना प्रदूषित किए स्थानीय रूप से वर्षा जल को एकत्रित करके जल को भूमिगत किया जाता है। इससे स्थानीय घरेलू मांग को, अभाव वाले दिनों …

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प्राकृतिक वनस्पति किसे कहते हैं भारत में प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार?

पौधों की जातियों, जैसे पेड़ों, झाड़ियों, घासों, बेलों, लताओं आदि के समूह, जो किसी विशिष्ट पर्यावरण में एक दूसरे के साहचर्य में विकसित हो रहे हैं, को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं।  भारत में प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार आर्द्र उष्णकटिबन्धीय सदाहरित एवं अर्द्ध सदाहरित वनस्पति उष्णकटिबन्धीय आर्द्र पर्णपाती वनस्पति उष्णकटिबन्धीय शुष्क वनस्पति ज्वारीय वनस्पति तथा पर्वतीय वनस्पति …

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भारत में पायी जाने वाली विभिन्न मृदाओं का उल्लेख

पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत को मृदा कहते हैं। यह अनेक प्रकार के खनिजों, पौधों और जीव-जन्तुओं के अवशेषों से बनी है। यह जलवायु, पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं और भूमि की ऊँचाई के बीच लगातार परस्पर क्रिया के परिणामस्वरूप विकसित हुई है। इनमें से प्रत्येक घटक क्षेत्र विशेष के अनुरूप बदलता रहता है। अत: मृदाओं में भी एक …

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