भारत में क्रांतिकारी आंदोलन का विकास : प्रथम चरण

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की एक पृथक धारा क्रांतिकारी आंदोलन है। भारत के नवयुवकों का एक वर्ग हिंसात्मक संघर्ष को राजनीतिक प्राप्ति के लिए आवश्यक मानते थे। वे स्वयं को मातृभूमि के लिए बलिदान करने को तैयार थे और हिंसक माध्यमों से ब्रिटिश शासन को भयभीत कर, आतंकित कर देश से निकाल देना चाहते थे। यह आक्रामक …

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गोलमेज सम्मेलन : (प्रथम, द्वितीय, तृतीय)

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की तीव्रता को देखकर ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों एवं ब्रिटिश राजनीतिज्ञों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया जाएगा। इसमें साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर भारत की राजनीतिक समस्या पर विचार-विमर्श होगा। प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवम्बर 1930-19 जनवरी 1931) प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड की …

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भारत सरकार अधिनियम 1919 की मुख्य धाराऐं

सन 1919 में जलियावाला बाग की दुर्घटना के विरोध में दिल्ली, लाहौर आदि स्थानों में उपद्रव हुए और पंजाब के कुछ भागों में फौजी शासन लगा दिया गया। नेताओं की गिरफ्तारी से असंतोष की अग्नि और भडक उठीं इस तूफान तथा विपत्ति के वातावरण में 1918 की रिपाटेर् में की गई शिफारिशों से युक्त एक बिल …

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लखनऊ समझौता क्या है || लखनऊ समझौते की मुख्य बातें || lucknow pact in hindi

भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का दिसंबर 1916 में लखनऊ में अधिवेशन होना तय था। अधिवेशन के अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की विभाजित कांग्रेस के खेमों ने अलगाववाद को त्याग दिया है, और  एकता के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है। लखनऊ अधिवेशन का महत्व इसलिये भी है क्योंकि इस अधिवेशन …

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उग्रवादी आंदोलन के कारण, उद्देश्य, प्रगति

उग्रवादी आंदोलन के कारण उग्रवादी आंदोलन के राजनीतिक कारण  उग्रवादी आंदोलन के आर्थिक कारण उग्रवादी आंदोलन के धार्मिक तथा सामाजिक कारण  उग्रवादी आंदोलन के राजनीतिक कारण –  सरकार द्वारा कांग्रेस की मांगों की उपेक्षा करना – 1892 ई. के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा जो भी सुधार किये गये थे, अपर्याप्त एवं निराशाजनक थे। लाला लाजपत राय ने …

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स्वदेशी आंदोलन क्या है?

स्वदेशी आंदोलन क्या है? बंगाल – विभाजन आंदोलन अंतत: स्वदेशी आंदोलन में परिणत हो गयां बंगालियों ने महसूस किया कि संवैधानिक आंदोलन अर्थात् जनसभाओं में भाषण देना, प्रेस द्वारा प्रचार, निवेदन, आवेदन-पत्र एवं सम्मेलन आदि बेकार है। ब्रिटिश सरकार का विरोध बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन द्वारा किया जाना चाहिए। बहिष्कार के मलू में आर्थिक अवधारणा हैं …

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लार्ड कर्जन के प्रशासनिक सुधार

लाॅर्ड कर्जन 1899 से 1905 तक भारत का गवर्नर जनरल रहा। लाॅर्ड कर्जन का जन्म 1859 में हुआ था। लाॅर्ड कर्जन ने प्रशासन, न्याय, शिक्षा, सेना एवं सिंचाई सहित अनेक क्षेत्रों में सुधार कार्य किये। कर्जन का वायसराय काल आधुनिक भारत के इतिहास का परिवर्तन काल माना जाता है। लाॅर्ड कर्जन 1899 ई. में भारत का …

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महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र | Queen Victoria’s proclamation in hindi

1857 के विद्रोह के बाद कंपनी से सत्ता ताज के हाथों में आ जाने पर, महारानी विक्टोरिया ने 01 नवम्बर 1858 को घोषणा की। यह घोषणा पत्र बड़ी सावधानी से सोच विचार कर तैयार किया गया था। महारानी विक्टोरिया की घोषणा में अंग्रेजी राज ने भारत के शासन का सीधा उत्तरदायित्व सम्भाला था।  भारत का प्रशासन …

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लॉर्ड डलहौजी (lord dalhousie) की हड़प नीति

1848 ई. से 1856 ई. का काल ब्रिटिश काल इस काल में लॉर्ड डलहौजी भारत का गवर्नर जनरल रहा। वह बहुत ही सक्रिय प्रशासक था, उसने युद्धों और कूटनीतियों से भारतीय राज्यों पर अधिकार करके भारत में ब्रिटिश कंपनी के साम्राज्य का विस्तार किया। लॉर्ड डलहौजी साम्राज्यवादी विचारों का व्यक्ति था अत: उसने भारत में गवर्नर …

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अधिनायकतंत्र अर्थ, परिभाषा, लक्षण, गुण एवं दोष

आधुनिक युग को ‘लोकतंत्र का युग’ कहा जाता है। परन्तु शायद सत्य बात है कि यह युग अधिनायकतंत्र‘ का युग बनता जा रहा है। यद्यपि हमने लोकतंत्र का मूल्यांकन करते समय यह निष्कर्ष निकाला है कि सुदूर भविष्य में लोकतंत्र व्यवस्थाएं ही लोकप्रिय होंगी, फिर भी आज दुनिया के अनेक राज्य लोकतंत्र शासन प्रतिमान के प्रतिकूल …

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