राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, महत्व

इसे सही ढंग से समझने के लिए ‘राजनीतिक’ तथा ‘सिद्धांत’ इन दोनों शब्दों को अलग-अलग समझना आवश्यक है। यहाँ शब्द ‘सिद्धांत’ तथा ‘राजनीतिक’ एक दूसरे की विशेषता बताते हैं कि राजनीति सिद्धांत या राजनीति का सिद्धांत किसी विशिष्ट विषय की तरफ इशारा करते हैं। आइये इन्हें थोड़ा बारीकी से समझें।  पहला, सिद्धांत का अर्थ क्या है? …

Read more

रघुवीर सहाय का जीवन परिचय एवं प्रमुख रचनाएँ

रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसम्बर, सन् 1929 ई. को उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के एक सामान्य मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। इनके पिता हरदेव सहाय साहित्य शिक्षक थे । 1955 ई. में इनका विवाह विमलेश्वरी सहाय से हुआ, इनकी पढ़ाई-लिखाई लखनऊ में हुई और वहीं से इन्होंने अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य में एम. ए.की परीक्षा …

Read more

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय एवं प्रमुख रचनाएं

जयशंकर प्रसाद (सन् 1890-1937 ई.) का जन्म माघ शुक्ल दशमी, संवत् 1946 वि. को वाराणसी के प्रसिद्ध तंबाकू के भारी व्यापारी सुंघनी साहू के पुत्र रूप में हुआ। जयशंकर प्रसाद के पिता शिवरतन साहू काशी के अति प्रतिष्ठित नागरिक थे। अवधि में सुंघनी सूंघने वाली तंबाकू को कहते हैं। यह परिवार अति उत्तम कोटि की तम्बाकू …

Read more

रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ एवं धाराएँ

सम्पूर्ण रीति साहित्य को तीन वर्गों में विभक्त किया जा सकता है। (1) रीतिशास्त्रीय काव्य, (2) रीतिबद्ध काव्य, (3) रीतिमुक्त काव्य। किन्तु इस सन्दर्भ में विद्वानों में मतभेद है। डॉ. नगेन्द्र द्वारा सम्पादित ‘हिन्दी साहित्य’ के इतिहास में लिखा गया है। “रीतिकालीन कविता के प्रसंग में विद्वानों ने तीन प्रकार के काव्य का विवरण दिया गया …

Read more

रीतिकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएं

वस्तुतः उत्तर मध्य काल के नामकरण को लेकर विद्वानों में मतभेद रहे हैं। मिश्रबधुओं ने इसे अलंकृत काल कहा है तो आचार्य शुक्ल ने इसे रीतिकाल नाम दिया है। पं. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने इसे शृंगार काल कहा। इसी प्रकार डाॅ. रमाशंकर शुक्ल रसाल ने इसे कला कला कहा है और डाॅ. भगीरथ मिश्र ने इसे …

Read more

अष्टछाप के कवियों के नाम और सामान्य परिचय

अष्टछाप के संस्थापक विट्ठलनाथ थे। ग्रन्थ रचना की अपेक्षा विट्ठलनाथ द्वारा किये गये सम्प्रदाय संगठन सम्बन्धी कार्य अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। पिता के और अपने चार-चार शिष्यों को मिलाकर विट्ठलनाथ जी ने ‘अष्टछाप’ नाम से गायक कवियों का एक दल बनाया।  हिन्दी साहित्य में अष्टछाप के इन कवियों का विशेष महत्व है। अष्टछाप के इन कवियों का परिचय आगे …

Read more

रामकाव्य की प्रमुख विशेषताएं

रामकाव्य ने भारतीय जनता को बहुत प्रभावित किया है। इसने भक्ति के उदात रूप को जनता के सन्मुख उपस्थित किया है। रामकाव्य जनता का मनोरंजन करता है। आधुनिक काल में जो रामलीलाएँ होती है, उनसे आबाल वृद्ध, ग्रामीण एवं नागरिक सभी का मनोरंजन होता है और इस मनोरंजन के द्वारा मानसिक उन्नयन भी। राम मर्यादा पुरुषोत्तम …

Read more

सूफी काव्य की प्रमुख विशेषताएं

सूफी मत के विकास क्रम में प्रसिद्धि प्राप्त सूफियों के षिश्य प्रषिश्य बनते गये और उन्होंने भिन्न सम्प्रदायों और उपसम्प्रदायों का रूप ग्रहण किया और यही सम्प्रदाय शनै: शनै: सभी देशों में फैल गये। विश्व के प्रमुख महान सूफी प्रस्थान अरब, ईरान, ईराक, मध्य ऐषिया, सिरिया, उत्तरी-अफ्रीका तथा भारत रहे है। इस मत ने अरब में …

Read more

सूफी शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ? सूफी मत का भारत में प्रवेश कब और कैसे हुआ

सूफी मत इस्लाम धर्म का ही एक अंग है। सूफी शब्द की उत्पत्ति सूफी शब्द कैसे चल पड़ा? कुछ लोगों की धारणा है कि सऊदी अरब के एक पवित्र नगर मदीना में मस्जिद के सामने एक सुफ्फा (चबूतरा) था, उस पर जो फकीर बैठते थे, वे सूफी कहलाये। प्रसिद्ध इतिहासकार अलबरूनी (जन्म काल 1971 ई.) ने …

Read more

ज्ञानाश्रयी शाखा की विशेषताएं

ज्ञानाश्रयी शाखा की विशेषताएं निर्गुण उपासना इस शाखा के कवियों ने ईश्वर को निर्गुण माना है। निराकार ब्रह्म की भक्ति को आलम्बन बनाना कठिन होता है। इसके सम्बन्ध में ज्ञान की चर्चा सुलभ होती है। कबीर ने सिद्धों और नाथों की विचारधारा को और आगे बढ़ाया और निर्गुण, निराकार, अव्यक्त और घट. घटवासी ब्रह्म की उपासना …

Read more