प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य, लाभ, प्रकार

प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है – प्राण + आयाम। प्राण = जीवनी शक्ति। आयाम – विस्तार या धारण करना, नियंत्रण करना या रोकना, अर्थात श्वास तथा प्रश्वास की गति को अवरूद्व करना ही प्राणायाम है। जिस प्रकार स्वास्थ्य की वृद्धि के लिए व्यायाम का विशेष महत्व है, उसी प्रकार प्राण शक्ति की वृद्धि के …

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सिद्ध सिद्धांत पद्धति के लेखक कौन हैं?

यह एकमात्र ऐसी पुस्तक है जो नाथ योगियों के हठ पंथ के दार्शनिक सिद्धांतों पर प्रकाश डालती है, इसलिए यह महत्त्वपूर्ण है। यह वर्ष 2010  में प्रकाशित की गई है। यह एक बहुत ही व्यवस्थित ढंग से लिखा गया ग्रंथ है जिसमें 350 छंद हैं जो छह अध्यायों में विभाजित है। सिद्ध सिद्धांत पद्धति के लेखक …

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स्वस्थ रहने के लिए क्या और कब खाना चाहिए?

स्वस्थ जीवन जीने के लिए अनिवार्य है कि हम अच्छी चीजे करें और एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं। आधुनिक दुनिया जीवन शैली की व्यापक विकृतियों की विडंबना का सामना कर रही है, जिसमें परिवर्तन लाने की आवश्यकता है और जिसे व्यक्ति स्वयं ला सकते हैं।  यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि कार्य, भोजन, व्यायाम और सोने के …

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स्वस्थ शरीर के लक्षण या स्वस्थ शरीर की पहचान कैसे करें?

सामान्य रूप से शरीर के बाहरी तथा आन्तरिक अंग कार्य करते रहते हैं, तो शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा माना जाता है। सामान्य रूप से शारीरिक स्वास्थ्य के लक्षण हैं। स्वस्थ शरीर उसे कहा जायेगा जिसे किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं है वह प्रसन्न होकर अपना हर कार्य सरलता पूर्वक कर लेता है।  डाॅ. लूई कूने के …

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स्वस्थ रहने के नियम, स्वस्थ जीवन शैली के नियम

स्वास्थ्य ही जीवन है। यदि स्वास्थ्य अच्छा है, तो व्यक्ति सुखी और सम्पन्न दिखायी देता है, निर्धनता क अभाव में भी वह उत्साही कार्यनिष्ठ तथा आत्मशक्ति ये भरपूर होता है। यहाँ पर हम कुछ स्वस्थ रहने के नियमों की चर्चा कर रहे हैं, जिनका पालन करने से स्वास्थ्य सदैव उत्तम बना रहता है, रोग पनपते नहीं …

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रोग क्या है इसके कारण

जब हमारा खान-पान, रहन-सहन, आहार-विहार अप्राकृतिक एवं दूषित हो जाता है तब हमारे शरीर में दोष जिसे विजातीय द्रव्य कहते हैं, एकत्रित हो जाता है। शरीर में संचित विष ही रोग है। शरीर से मल और दूषित पदार्थों के हटाने के प्रयत्न को रोग कहते हैं। रोगों के प्रकार मानव शरीर के तीन पहलू बताये हें-  …

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विजातीय द्रव्य क्या है इसके बनने के कारण?

शरीर के भीतर जो बेकार चीज होती है, जैसे- मल, मूत्र, पसीना, कफ, दूषित सांस, दूषित रक्त, दूषित मांस, पीप आदि जो शरीर को विषाक्त व दूषित करते हैं, शरीर का विनाश करते हैं, शरीर के लिए अनुपयोगी है, उसे ही दोष, विकार, मल या विजातीय द्रव्य के नाम से जाना जाता है।  विजातीय द्रव्य क्या …

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शारीरिक रोग किसे कहते हैं ? शारीरिक रोग के कारण

शरीर में जब किसी प्रकार का कष्ट या तकलीफ होता है या शरीर के अंग अपने-अपने कार्य जब सही ढंग से नहीं कर पाते तब उसे शारीरिक रोग कहते हैं।  शारीरिक रोग की परिभाषा आक्फोर्ड शब्दकोश के अनुसार- ‘‘शारीरिक रोग शरीर के या शरीर के किसी अंग की वह दशा है जिसमें इसके कार्य बाधित होते …

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तीव्र रोग किसे कहते है ?

जब शरीर में या उसके किसी भाग में अधिक मल एकत्र हो जाता है तो उसका निष्कासन तीव्र रोगों के रूप में होने लगता है, जो कुछ ही दिन रहकर उस संचित मल को शरीर से निकालकर स्वतः ही चले जाते हैं। जिनकी जीवनीशक्ति प्रबल और अधिक होती है, उन्हें ही तीव्र रोग होता है। जिस रोग …

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आयुर्वेद के प्रमुख चार ग्रंथ कौन से हैं ?

संसार के प्राचीनतम ग्रन्थों में ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद एवं सामवेद हैं। इन चारों वेदों में आयुर्वेद चिकित्सा का भी वर्णन है। अथर्वेद में आयुर्वेद में आयुर्वेद का विस्तृत वर्णन मिलता है तथा आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद माना गया है। आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ  आयर्वेद में उपलब्ध ग्रन्थों को वृहत्त्रयी एवं लघुत्रयी कहा गया है। चरकसंहिता …

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