शैक्षिक अवसरों की समानता की आवश्यकता

शैक्षिक अवसरों की समानता का अर्थ हमें समानता को जानने के लिए बाध्य करता है। ‘समानता’ का तात्पर्य यह नहीं है कि सब हर प्रकार से समान हों। ऐसा असंभव है। समानता का तात्पर्य अवसर की समानता से है। राज्य की ओर से सबको समान समझा जाये। जाति, रंग, नस्ल, धर्म आदि के कारण किसी के …

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संघीय शासन प्रणाली क्या है व इसके आधारभूत तत्व

संघीय व्यवस्था वह रूप है, जिसमें शक्ति का विभाजन आंशिक रूप से केन्द्र सरकार और राज्य सरकार अथवा क्षेत्रीय सरकारों के मध्य होता है। संघवाद संवैधानिक तौर पर शांति को साझा करता है क्योंकि इसमें स्वषासन तथा साझा शासन की व्यवस्था होती है आजादी के बाद से अब तक भारतीय राजनीति में कई ऐसे परिवर्तन हुए …

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शिक्षा का संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

सभ्यता के विकास के साथ-साथ श्रम-विभाजन की प्रक्रिया और अधिक जटिल होती गयी, परिणामतः सीखने की प्रक्रिया में ‘‘विद्यालय’’ व्यवस्था की शुरूआत हुई। इससे परिवार तथा परिवार के बाहर की व्यवस्था प्रक्रियाओं तथा संबंध निर्धारण की प्रक्रिया की जानकारी दी जाने लगी। यही मुख्य कारण है जिससे संस्कृति का प्रसार अधिक तीव्र हुआ है। इस हेतु …

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व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, सामान्य सिद्धांत

व्यावसायिक शिक्षा दो शब्दों के संयोग से निर्मित है। जिसमें पहला शब्द व्यवसाय एवं दूसरा शब्द शिक्षा है। ’’व्यवसाय’’ शब्द जीविकोपार्जन के लिए अपनाये जाने वाले कारोबार के अर्थ में है तथा शिक्षा-संबंधित व्यवसाय के प्रशिक्षण युक्त सीखने से है। तात्पर्य-व्यावसायिक शिक्षा वह शिक्षा है जो व्यवसाय संचालन संबंधी जानकारी प्रदान करती है। व्यवसाय व तकनीकी …

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डॉ0 भीमराव अंबेडकर के धार्मिक विचार, आर्थिक विचार, शिक्षा सम्बन्धी विचार

अंबेडकर का जन्म मध्य भारत के एक छोटे से शहर मऊ में एक अछूत परिवार में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उनके परिवार का सैन्य-सेवा से संबंध था। वे महार जाति के सदस्य थे। अंबेडकर के दादा मलोजी सैन्य सेवा में थे और अंबेडकर के पिता रामजी मऊ सैनिक स्कूल के प्रभारी सुबेदार-मेजर थे। रामजी …

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जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत

जीन पियाजे (Jean Piaget) स्विट्जरलैंड निवासी एक मनोवैज्ञानिक थे। ‘‘बालकों का वृद्धि और विकास किस विशेष तरह से होता है’’ इस विषय के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि थी जिसके लिए उन्होंने स्वयं के बच्चों को अपनी खोज का आधार बनाया। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते गये, उनकी मानसिक विकास सम्बन्धी क्रियाओं का वे बड़ी बारीकी से …

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संदेश लेखन क्या है ? संदेश लेखन का महत्व और कार्य

संदेश का अर्थ – चलना या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना है। अपने विज्ञान में ताप संचार के बारे में पढ़ा होगा कि कैसे गरमी एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक पहुंचती है। इसी तरह टेलीफोन, तार या बेतार, तथा पत्र के जरिये मौखिक या लिखित संदेश को एक स्थान से दूसरे पर भेजा …

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परिपत्र किसे कहते हैं इसकी विशेषताएं

जिन पत्रों के मााध्यम से सूचनाओं और आदेशों को प्रसारित किया जाता है, उन्हें परिपत्र कहा जाता है। परिपत्र को अंग्रेजी में Circular कहते हैं। प्रत्येक कार्यालय में प्रायः कई सूचनाएं, आदेश, प्रसारित होते रहते हैं। वे सूचनाएं एवं आदेश जो सभी अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों के संबंध में होते है वे परिपत्र के माध्यम से भेजे …

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वाचन किसे कहते हैं ? वाचन की परिभाषा और भेद

जब हम कोई पुस्तक, पत्र या लिखित सामग्री आदि को पढ़ते है, उसी को वाचन कहते है। वाचन में शब्द के साथ ध्वनि एवं अर्थ दोनों ही निहित होते है।  वाचन की परिभाषा 1- वाचन वह जटिल अधिगम (सीखने) की प्रक्रिया है, जिसमें दृश्य, श्रव्य एवं गति सर्किटों को मस्तिष्क के अधिगम से संबंध होता है। …

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सस्वर वाचन का अर्थ, उद्देश्य, महत्व, गुण, भेद

सस्वर का अर्थ है जोर से अथवा स्वयं सहित वाचन करना। हम देखते है अनेक अनौपचारिक अवसरों पर व्याख्यान देते समय वाद-विचार एवं गोष्ठियों में अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से कहने के लिए यही वाचन का रूप प्रयुक्त होता है। शुद्ध, प्रभावपूर्ण वाचन श्रोताओं पर विशिष्ट प्रभाव डालता है। यही नहीं बल्कि वक्ता का अपना …

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