संदेश लेखन क्या है ? संदेश लेखन का महत्व और कार्य

संदेश का अर्थ – चलना या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना है।
अपने विज्ञान में ताप संचार के बारे में पढ़ा होगा कि कैसे गरमी एक बिंदु से
दूसरे बिंदु तक पहुंचती है। इसी तरह टेलीफोन, तार या बेतार, तथा पत्र के जरिये
मौखिक या लिखित संदेश को एक स्थान से दूसरे पर भेजा जाता है। हम यहां दो
या दो से अधिक व्यक्तियों के बिच विचारों और भावनाओं का आदान – प्रदान की
बात कर रहे हैं। एक दूसरे से संदेश करते समय हम अपने अनुभवों को ही एक
दूसरे से बांटते हैं। संदेश दो या दो अधिक व्यक्तियों में ही नहीं हजारों – लाखों
लोगों के बीच होने वाले संदेश को भी शामिल किया जाता है इस प्रकार सूचनाओं,
विचारों और भावनाओं को लिखित रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना
ही संदेश है।

संदेश लेखन

संदेश लेखन का आशय यहां यांत्रिक हस्त कौशल से नहीं है। उसका आशय
शब्दों के सहारे किसी चीज पर विचार करने और उस विचारों को व्याकरणिक शुदृता
के साथ सुसंगठित रूप में अभिव्यक्त करने से है याद रहे संदेश विचारों की
अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं स्वयं विचार करने का साधन भी है। विचार करने
और उसे व्यक्त करने की यह प्रक्रिया संदेश कहलाती है।

संदेश लेखन का महत्व

जरा सोचिए क्या आप बिना बात किए रह सकते हैं? शायद नहीं अकेलेपन
और सोने के समय को छोड़ दिया जाए तो हम आप अधिकांश समय अपनी
छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने या अपनी भावनाओं और विचारों को प्रकट करने
के लिए एक – दूसरे से या समूह में बातचीत (संदेश) करने में लगा देते हैं। यहां
तक कि कई बार हम अकेले में खुद से बात करने लगते हैं। सचतो ये है कि हम
बिना किए रह ही नहीं सकते। यदि हमें समाज में रहना है और उसके विभिन्न
क्रिया कलापों में हिस्सा लेना है तो ये बिना संदेश के संभव ही नहीं है। हम चाहें
या न चाहें अपने दैनिक जीवन में हम संदेश बिना नहीं रहे सकते वास्तवे में संदेश
जीवन की निषानी है। मनुष्य जब तक जीवित है वह संदेश करता रहता है। यहां
तक बच्चा भी रोकर या चिल्लाकर सब का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

संदेश के प्रकार

संदेश एक जटिल प्रक्रिया है। उसके कई रूप या प्रकार है। एक दूसरे में भी काफी
घुल-मिले हैं।

  1. किसी को इशारे से बुलाना इसे सांकेतिक संदेश कहते हैं। 
  2. अपने से बड़ो को सम्मान से प्रणाम करते है तो उसमें मौखिक संदेश के
    साथ-साथ दोनों हथेलियों जोड़कर प्रणाम का इशारा भी करते है तो मौखिक
    और अमौखिक संदेश होता है।
  3. जब इम अकेले में किसी को याद करना, कुछ सोचने और योजना बनाना
    भी एक प्रकार की संदेश प्रक्रिया है इस में संचारक और प्राप्तकर्ता एक ही
    होते है इस अतः व्यक्ति संदेश कहते है। 
  4. जब दो व्र्यिक्त आपस में संदेश करते हैं तो ये अतंरवैक्ति संदेश होता है।
  5. जब एक समूह आपस में विचार-विमर्श या चर्चा करता है तो समूह संदेश
    कहलाता है।

संदेश लेखन का दोष

विवरण के सुसंबदृ होने के साथ-साथ सुसंगत होना भी अच्छे संदेश
लेखन की खासियत है। आपकी कही गई बातें न सिर्फ आपस में जुड़ी हुई हों
बल्कि उनमें तालमेल भी हो अगर आपकी दो बातें आपस में ही एक दूसरे का
खंडन करती हों यह संदेश लेखन का ही नहीं किसी भी तरह की अभिव्यक्ति का
एक अक्षम्य दोष है उदाहरण के लिए – मौसम की चर्चा करते करते आप एकाएक
राजनीति पर बात करने लगें और ऐसा करने का कोई ठोस आधार या कारण न
हो-

संदेश लेखन के कार्य

  1. संदेश का प्रयोग हम कुछ हासिल करने या प्राप्त करने के लिए करते है।
    जैसे किसी मित्र से किताब मांगने के लिए। 
  2. कुछ जानने और बताने के लिए भी हम संदेश का प्रयोग करते हैं। जैसे
    किसी को कोई सूचना देने या सूचना प्राप्त करने के लिए। 
  3. संदेश का प्रयोग हम आपसी संपर्कों को बढ़ाने और बनाए रखने के लिए भी
    करते हैं ये सामाजिक, व्यक्तिगत या समूहगत संदेश हो सकती है। 
  4. संदेश का प्रयोग हम अपनी रुचि की किसी वस्तु या विषय के प्रति
    प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए भी करते हैं। ये प्रतिक्रिया सकारात्मक या
    नकारात्मक हो सकती है। 
  5. संदेश का प्रयोग निमंत्रण देने के लिए भी करते हैं ये निमंत्रण किसी
    समहारो के लिए होते है जैसे शादी, उदघाटन, आमसभा आदि। 
  6. संदेश का उपयोग हम अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए भी करते हैं
    जैसे खुषी, गम आदि।
    7. संदेश के द्वारा हम किसी के व्यवहार को नियंत्रित करने की कोषिष कर
    सकते हैं यानी हम एक खास तरीके से व्यवहार के लिए कह सकते हैं। 
  7. संदेश के प््रायोग हम सरकारी और गैर सरकारी र्कायालों के अधिकारियों को
    किसी स्थिति से अवगत कराने के लिए भी कर सकते हैं।
  8. संदेशों के द्वारा हम जनता को देष-दुनिया के हालात से परिचित कराने और
    उसके प्रति सजग और जागरूक भी कर सकते हैं। 
  9. संदेश सरकार और समाज के बीच प्रतिक्रिया करने के लिए अच्छा
    माध्यम है। 
  10. संदेश राय व्यक्त करने और विचारा-विमर्श के मंच के रूप में भी
    काम करते हैं। 
  11. संदेशों के मध्यम से हम सरकार या किसी संगठन या संस्था में
    कोई अनियमितता बरती जा रही ये निगरानी भी कर सकते हैं। 
  12. अपने आस पास घटित घटनाओं को संदेश द्वारा अभिव्यक्त कर सकते
    हैं। 
  13. हमारे मन में किसी कार्य के प्रति उदासीनता को संदेश द्वारा व्यक्त
    कर सकते हैं। 
  14. अपने मौलिक अधिकारों को संदेश लेखन के द्वारा व्यक्त कर सकते
    हैं। 
  15. किसी विषय के साहचर्य से जो भी सार्थक और सुसंग विचार हमारे
    मन में आते हैं उन्हें हम संदेश लेखन के द्वारा व्यक्त कर सकते है।

संदेश लेखन के क्षेत्र

संदेश लेखन के विषयों की संख्या अपरिमित है। आपके सामने की दीवार,
उस दीवार पर टंगी घड़ी, उस दीवार में बाहर की खुलता झरोखा-कुछ भी उसका
विषय हो सकता है। अर्थात संदेश लेखन का क्षेत्र व्यापक है इस की कोई सीमा
नहीं है।

संदेश लेखन की विशेषता 

संदेश लेखन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ये है कि हमारे मन की जो बात हम
मौखिक रूप से व्यक्ति नहीं कर पाते वो बात हम बहुत ही आसानी से लिख कर
व्यक्त कर सकते हैं।

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