उत्पादन फलन किसे कहते है ? इसकी विशेषताएं

उत्पादन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत उत्पादन कार्य उत्पादन के अनेक साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, साहस तथा संगठन) के सामूहिक सहयोग एवं साधनों के एक विशेष सम्मिश्रण से सम्पन्न किया जाता है। उत्पादन के साधनों को अर्थशास्त्र की भाषा में आगत अथवा आदा कहा जाता है तथा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं को निर्गत अथवा प्रदा …

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कृषि मूल्य नीति से क्या अभिप्रायः है ? कृषि मूल्य नीति के उद्देश्य तथा मुख्य अंश

कृषि उत्पादन की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से किसानों तथा समाज पर बुरा प्रभाव पडता है। इसलिए एक कृषि मूल्य नीति का होना अत्यन्त आवश्यक है। कृषि मूल्य नीति, कृषि उत्पादन को बढाने के लिए, खाद्यानों की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तथा औद्योगिक क्षेत्र की कच्चेमाल की आवश्यकता की नियमित पूर्ति के लिये आवश्यक है। …

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कृषि लागत और मूल्य आयोग के कार्य

करते सरकार ने झा समीति की सिफारिशों को मानते हुए 1965 में ‘कृषि मूल्य आयोग‘ का गठन किया। 1980 में इस आयोग का नाम बदलकर ‘कृषि लागत तथा मूल्य आयोग रख दिया गया। आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य सचिव, दो सरकारी सदस्यों सहित तीन गैर सरकारी सदस्य होते हैं गैर सरकारी सदस्यों में कृषक समुदाय …

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अभिक्षमता परीक्षण क्या है, इसके मापन और प्रकार

अभिक्षमता मानव क्षमता का एक प्रमुख अंग है। इसका तात्पर्य विभिन्न क्षेत्रों में कौशल या ज्ञान प्राप्त करने की अर्जित तथा जन्मजात योग्यता से है। इसके आधार पर व्यक्तिगत विभिन्नताओं को बताया जा सकता है। फ्रीमैन के अनुसार अभिक्षता का तात्पर्य गुणों तथा विशेषताओं के एक ऐसे संयोग से होता है जिससे विशिष्ट ज्ञान तथा संगठित …

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मनोविज्ञान के क्षेत्र और उनका वर्णन

 मनोविज्ञान के क्षेत्र 1. नैदानिक मनोविज्ञान मनोविज्ञान की सबसे प्रचलित एवं प्रयुक्त शाखा, नैदानिक मनोविज्ञान है। नैदानिक मनोवैज्ञानिक का कार्य समस्या से ग्रसित लोगों को ठीक करना है ताकि वे अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में समायोजन स्थापित कर सकें। शोध निदान और उपचार नैदानिक मनोवैज्ञानिक के तीन मुख्य कार्य है- जिनकी विभिन्न विधियों के माध्यम से …

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भारत में कृषि विपणन व्यवस्था में पाए जाने वाले प्रमुख दोषों का वर्णन

कृषि विपणन से अभिप्राय कृषि उत्पाद के क्रय विक्रय से है। भारत में कृषि विपणन की जो व्यवस्था प्रचलित है। उसमें कृषक अपने उत्पाद को मेलों तथा ग्रामीण हाॅट में बेचता है। इसके अतिरिक्त नियमित मण्डियों द्वारा सरकारी खरीद भी कृषि विपणन का हिस्सा है। भारत की कृषि विपणन व्यवस्था में अनेक दोष है। जिन्हें दूर …

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NABARD – नाबार्ड की स्थापना, उद्देश्य, कार्य

नाबार्ड बैंक का पूरा नाम राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक है राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना के सम्बन्ध में 1981 में संसद में एक अधिनियम पारित किया गया, जिसे 30 दिसम्बर, 1981 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल गई। 12 जुलाई, 1982 को एक शीर्षस्थ बैंक के रूप में नाबार्ड की विधिवत् …

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कृषि प्रबंधन से आप क्या समझते हैं ? कृषि प्रबन्धन के उद्देश्य

कृषि प्रबन्धन में कृषि कार्यों को सुव्यवस्थित ढंग इस प्रकार सम्पादित किया जाता है कि किसान को अधिकतम लाभ प्राप्त हो। इसमें फार्म संगठन, संचालन, क्रय विक्रय तथा वित्तीय व्यवस्था आदि क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है। कृषि प्रबन्धन में फार्म सम्बन्धी सम्पूर्ण आंकड़ें एकत्र कर फार्म हेतु योजना बनाई जाती है। और कृषि आगतों को …

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विश्व व्यापार संगठन का भारतीय कृषि पर प्रभाव

विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के बाद से विश्व के विकसित तथा विकासशील देशों के मध्य व्यापार की संरचना एवं दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन परिलक्षित हुए। विश्व व्यापार संगठन द्वारा भारतीय व्यापार को भी अनेक दिशाओं में परिवर्तित किया। विकसित देशों द्वारा भारतीय कृषि के व्यापार एवं आन्तरिक कृषि व्यवस्थाओं को भी अपने हितों की ओर …

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उदारीकरण का कृषि पर प्रभाव

उदारीकरण का अर्थ है, औद्योगिक सेवा क्षेत्र और व्यापार से संबंधित नियमों एवं कानूनों के बंधनों में ढील देना ओर विदेशी कम्पनियों को घरेलू क्षेत्र में व्यापारिक और उत्पादन इकाईयाँ लगाने हेतु ओर प्रोत्साहित करना।  उदारीकरण का कृषि पर प्रभाव उदारीकरण की प्रक्रिया द्वारा भारत सरकार ने कृषि व्यापार को परिवर्तित करने का प्रयास किया। उदारीकरण …

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