संरचनावादी सम्प्रदाय की विशेषताएँ और शिक्षा में योगदान

मनोविज्ञान में संरचनावादी विचारधारा के प्रवर्तक विलियम वुन्ट और टिचनर हैं। इन्होंने 1879 ई. में जर्मनी में लिपशिग नगर में सबसे पहली मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला की स्थापना की। इस प्रयोगशाला में मानसिक संरचना और क्रियाओं के प्रयोगात्मक अध्ययन का आरम्भ हुआ।  संरचनावादियों के अनुसार मनुष्य की चेतना विभिन्न मानसिक क्षमताओं और क्रियाओं का योग है। इस विचारधारा …

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प्रकार्यवाद का शिक्षा में योगदान

प्रकार्यवाद इस विचारधारा का विकास अमेरिका में (1842-1910) हुआ। इसका विकास संरचनावादी सम्प्रदाय की प्रतिक्रिया स्वरूप हुआ। इस विचारधारा पर डारविन के विकासवादी सिद्धन्त का प्रभाव है। प्रकार्यवाद को वास्तविक स्वरूप जाॅन डीवी और रोनेल्ड एंजिल ने दिया। इसकी दार्शनिक पृष्ठभूमि प्रयोजनवाद है। इस वाद का आधार क्यों और कैसे है?  इस सम्बन्ध् में वुडवर्थ महोदय …

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व्यवहारवाद का शिक्षा में योगदान

बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में संरचनावाद और प्रकार्यवाद का विरोध् होने के कारण व्यवहारवाद की स्थापना हुई। इसके पहले चेतना के तत्वों के अध्ययन पर बल दिया गया, जिसे कुछ मनोवैज्ञानिकों ने निरर्थक समझा और कहा कि चेतना का हमारे शरीर पर जो प्रभाव पड़ता है उसका अध्ययन सार्थक है। इसलिए चेतना की रचना के स्थान …

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मनोविश्लेषणवाद के प्रवर्तक कौन है इनके विचारों का संक्षिप्त विवरण

मनोविश्लेषणवाद के प्रमुख प्रवर्तक वियना के सिगमंड फ्रायड (1856-1939) थे। यह सम्प्रदाय विशेष रूप से अज्ञात मन की चेष्टाओं का अध्ययन करता है। डाॅ. फ्रायड ने मूर्छा और स्नायु रोगों की चिकित्सा के लिये सम्मोहन या मोह-निद्रा विधि को अपनाया। इस विधि द्वारा वह रोगियों को अचेतन अवस्था में करके उससे प्रश्न पूछता था। मोह-निद्रा के …

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अधिगम की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

अधिकांश व्यक्तियों की शिक्षण के विषय में भ्रमपूर्ण धारणा है। उनका मानना है कि शिक्षण का आशय रटने या ज्ञान को मस्तिष्क में ठूँसने से है परन्तु वास्तव में यह गलत है। शिक्षण एक सामाजिक घटना है। इसका अर्थ स्पष्ट करने के लिए निम्नलिखित परिभाषाओं को देखा जा सकता है। डॅा. माथुर- वर्तमान समय में शिक्षण …

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अधिगम स्थानांतरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, सिद्धांत

शिक्षा में सीखने के स्थानांतरण का अर्थ ‘सीखी हुई क्रिया या विषय का अन्य परिस्थितियों में उपयोग करना।’ दूसरे शब्दों में एक विषय या परिस्थिति में अर्जित ज्ञान का अन्य विषयों या परिस्थितियों के ज्ञानार्जन पर प्रभाव पड़ना ही अधिगम का स्थानांतरण कहलाता है। इसे ‘अधिगम संक्रमण’ या ‘अधिगमानान्तरण’ भी कहते हैं। उदाहारणार्थ- गणित सीखने से …

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शाब्दिक और अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण में अंतर

बुद्धि का मापन करने के लिए अनेक मनोवैज्ञानिकों ने अनेक बुद्धि-परीक्षण बनाए हैं। बुद्धि-परीक्षण के इतिहास के अध्ययन से ज्ञात होता है कि बिने के पूर्व भी अनेक बुद्धि-परीक्षण तैयार किये गये थे जिनमें कैन्टल का बुद्धि-परीक्षण भी था। किन्तु बिने ने साइमन की सहायता से 1905 में एक बुद्धि-परीक्षण तैयार किया, जिसका एक वैज्ञानिक आधार …

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व्यक्तित्व मापन की विधियां या परीक्षण

व्यक्तित्व मापन की विधियों से तात्पर्य एक ऐसे परीक्षण, यन्त्र या विधि से है, जिसके द्वारा व्यक्तित्व शीलगुणों का मूल्यांकन किया जाता है। मनोवैज्ञानिकों के मतानुसार व्यक्तित्व को उन गुणों या लक्षणों का समूह कहा गया है जिनके कारण विभिन्न व्यक्तियों में भिन्नता दिखाई देती है।  आधुनिक शिक्षा में व्यक्तिगत विभिन्नता को विशेष महत्व दिया जाता …

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पूंजीवादी एवं साम्यवाद में अंतर

साम्यवाद को कई मार्क्सवादी समाजवाद भी कहते हैं। समाजवाद तथा साम्यवाद ये दोनों ही विचारधाराएँ मानव मात्रा की समानता, विशेषतः आर्थिक समानता के विचार पर आधारित हैं और इसलिए प्रायः कई व्यक्ति इन्हें एक ही समझने की भूल कर लेते हैं। यथार्थ में इनके उद्देश्य, साधन, कार्यक्षेत्र तथा पद्धति में बहुत अधिक अंतर है। स्वयं मार्क्स …

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खड़ीबोली का नामकरण और क्षेत्र

हिंदी में गद्य-रचना के विकास-काल से खड़ी बोली का प्रभावी रूप में विकास हुआ है। आदि काल में डिंगल-पिंगल में रचना होती थी, तो मध्यकाल में अवध्ी और ब्रजभाषा काव्य-रचना की आधार भाषा थी। आधुनिक युग में हिंदी का यही रूप साहित्य-सृजन का आधार बना है। हिंदी भाषा में एकरूपता और बोध्गम्यता बढ़ाने का प्रयास एक …

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