मौखिक अभिव्यक्ति शिक्षण : अर्थ महत्व, उद्देश्य और विशेषताएँ

मानव प्रधानतः अपनी अनुभूतियों तथा मनोवेगों की अभिव्यक्ति उच्चरित अथवा मौखिक भाषा में ही करता है प्रिय छात्रो! लिखित भाषा तो गौण तथा उसकी प्रतिनिधि मात्रा है, क्योंकि भावों की अभिव्यक्ति का साधन साधारणतः उच्चरित भाषा ही होती है। भावों के आदान-प्रदान का एक ही साधन है- भाव या वाणी। आधुनिक जनतांत्रिक युग में जीवन की …

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लेखन शिक्षण का अर्थ, उद्देश्य, गुण, विधि, प्रविधियाँ

आधुनिक समय में व्यक्ति अपने मनोभावों का प्रकटीकरण भाषा के माध्यम से दो रूपों में करता है। 1. मौखिक भाषा के माध्यम से 2. लिखित भाषा के माध्यम से । मौखिक रूप के अन्तर्गत भाषा का ध्वन्यात्मक रूप एवं भावों की मौखिक अभिव्यक्ति है। जब इन ध्वनियों को प्रतीकों के रूप में व्यक्त किया जाता है, …

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रचना शिक्षण का अर्थ, परिभाषा, विधियां तथा उद्देश्य

रचना शब्द ‘composition’ का हिन्दी रूपान्तरण है। भाषा के क्षेत्र में रचना के अन्तर्गत भावों व विचारों को शब्द-समूहों में सँवारते है। विचारों को क्रमबद्ध करके शब्द-समूह में व्यक्त करना, आत्माभिव्यक्ति का अभ्यास, भावों एवं विचारों की अभिव्यक्ति, तथा कलात्मक ढंग से विचार व्यक्त करना ही रचना है। रचना के प्रकार रचना के दो प्रकार है …

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शुम्पीटर के विकास मॉडल की आलोचनात्मक व्याख्या

जोसेफ एलोई शुम्पीटर ने जर्मन भाषा मे। प्रकाशित The Theory of Economic Development में पहली बार 1911 में अपना सिद्धान्त दिया। The Theory of Economic Development का 1934 में अंग्रेजी संस्करण आया। शुम्पीटर के बाद में अन्य पुस्तकें ‘‘व्यापार चक्र’’ तथा पूंजीवाद, समाजवाद, प्रजातन्त्र भी आयी जिनमें उन्होनें अपने विचारों में सुधार करके आर्थिक विकास के बारे में पूर्ण …

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लोक नृत्य क्या है ? भारत में प्रचलित प्रमुख लोकनृत्यों का संक्षिप्त विवरण

आम लोगों में प्रचलित नृत्यों को लोक नृत्य कहा जाता है। सामान्यतः इसका जन्म क्षेत्र-विशेष में होता है, और यह उस क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और संस्कार को समावेशित कर लेती हैं। लोक नृत्य शास्त्रीय बंधनों से स्वतंत्र होते है। और इसका आयोजन उद्धत भावनाओं से प्रेरित होकर किया जाता है। भारत के प्रत्येक राज्य में …

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अल्पाधिकार (Oligopoly ) किसे कहते हैं एवं अल्पाधिकार की विशेषताएं

अल्पाधिकार अपूर्ण प्रतियोगिता का एक महत्वपूर्ण रूप है। अल्पाधिकार उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें किसी वस्तु के दो या दो से अधिक (परन्तु बहुत अधिक नहीं) उत्पादक या विक्रेता होते हैं। यद्यपि कुछ या अधिक फर्मों के मध्य कोई सीमा निर्धारण कठिन है। परन्तु यदि एक वस्तु के उत्पादकों की संख्या दो से दस …

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लगान के प्रकार

लगान के प्रकार लगान के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैंः आर्थिक लगान केवल भूमि के प्रयोग के लिए किया जाने वाला भुगतान आर्थिक लगान कहलाता है। अर्थशास्त्र में लगान शब्द का प्रयोग आर्थिक लगान के लिए ही किया जाता है। अतएव रिकार्डों तथा दूसरे परम्परावादी अर्थशास्त्रियों के अनुसार, ‘‘आर्थिक लगान वह लगान है जो केवल भूमि की …

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ब्याज किसे कहते हैं || ब्याज का प्रतिष्ठित सिद्धांत || ब्याज की परिभाषा

साधारणतया पूंजी के सेवाओं के लिए किए जाने वाले भुगतान को ब्याज कहा जाता है परन्तु अर्थशास्त्र में पूंजी शब्द का प्रयोग कई अर्थों में किया जाता है। पूंजी शब्द का प्रयोग मशीनों, इमारत, कारखानों तथा नकद पूंजी के लिए किया जाता है। पूंजी की इन सभी विभिन्न प्रकार की सेवाओं के लिए किया जाने वाला …

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लाभ के सिद्धांत

राष्ट्रीय आय में से उद्यमी को मिलने वाला भाग लाभ कहलाता है। एक उद्यमी का मुख्य कार्य अनिश्चितता को सहन करना या जोखिम उठाना होता है। उद्यमी को इन कार्यों के बदले में जो आय प्राप्त होती है, उसे लाभ कहा जाता है। लाभ की परिभाषा अर्थशास्त्रियों ने लाभ शब्द की परिभाषा दो प्रकार से की हैः-  …

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तटस्थता वक्र का अर्थ , मान्यताएं एवं विशेषताएं

तटस्थता वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोगों को प्रकट करता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। इसका अभिप्राय यह हुआ कि एक तटस्थता वक्र पर जितने बिन्दु होते हैं वे दो वस्तुओं के उन संयोगों को प्रकट करते हैं जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। चूंकि …

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