डिप्रेशन (अवसाद) के कारण और लक्षण

अवसाद एक प्रमुख रोग है। विषाद या अवसाद से आशय मनोदशा में उत्पन्न उदासी से होता है अथवा यह भी कहा जा सकता है कि अवसाद से तात्पर्य एक नैदानिक संलक्षण से है, जिसमें सांवेगिक अभिप्रेरणात्मक, व्यवहारात्मक, संज्ञानात्मक एवं दैहिक या शारीरिक लक्षणों का मिश्रित स्वरूप होता हे।  इसे ‘‘ नैदानिक अवसाद’’ (clinical Depression) की संज्ञा …

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वाक्य में पदों का क्रम

वाक्य में पदक्रम एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व हैं संस्कृत जैसे श्लिष्ट योगात्मक भाषाओं में पदक्रम इतना महत्त्वपूर्ण नहीं क्योंकि शब्द के साथ जुड़ी हुई विभक्ति सर्वत्रा अपना वही अर्थ देगी चाहे उस पद को किसी भी स्थान पर रख दें। जैसे रामः पुस्तकं पठति वाक्य में पदों के स्थान बदलने से उनके अर्थ में कोई अन्तर नहीं …

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वाक्य रचना कैसे होती है समस्त प्रकार की वाक्य गतिविधियों का वर्णन

वाक्य रचना पदों के संयोग से होती है। इसमें मुख्यतः चार बातें आवश्यक मानी गई हैं- 1. पदक्रम या शब्दक्रम, 2. अन्वय, 3. लोप, 4. आगम।  1. पदक्रम- योगात्मक भाषाओं में पदक्रम अनिवार्य होता है। चीनी जैसी भाषाओं में पक्रम का अत्यन्त मह़वपूर्ण स्थान है। वियोगात्मक भाषाओं में भी पदक्रम के महत्व को अस्वीकार नहीं किया …

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आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का संक्षिप्त परिचय और इसका वर्गीकरण

आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का विकास मध्यकालीन अपभ्रंश भाषाओं से हुआ है। प्राचीन पाँच प्राकृतों से पाँच अपभ्रंश भाषाओं का विकास हुआ है। इन पाँच अपभ्रंशों के साथ ही ब्राचड एवं खस दो अपभ्रंशों को और लिया जाता है। ब्राचड (सं0 ब्राचड या व्राचट) का उल्लेख मार्कण्डेय के प्राकृत सर्वस्व में अपभ्रंश के 27 भेदों में मिलता …

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शिक्षा के कार्य क्या है ?

शिक्षा मानव जीवन के विकास की वह महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो जीवनपर्यंत चलती रहती है। यह व्यक्ति और समाज दोनों के विकास में योगदान देती है। इसके कार्य बहुमुखी हैं। इसके कार्यों के विषय में विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं। कुछ विचार निम्न प्रकार हैं-  एम. एल. जैक्स के अनुसार-‘‘शिक्षा को अनेकों कार्य …

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वेदांत दर्शन किसे कहते हैं इसके मूल सिद्धांत क्या है ?

वेद, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषदों के गूढ़ एवं विस्तृत चितन का अंतिम सार ही वेदांत दर्शन है। वादरायण व्यास (चौथी शताब्दी) पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इन समस्त ग्रंथों के सार तत्व को सूत्र रूप में प्रस्तुत किया। उनके द्वारा विरचित ग्रंथ का नाम ‘ब्रह्म सूत्र’ है। यही ग्रंथ वेदांत दर्शन का आदि ग्रंथ है। वादरायण के …

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बौद्ध दर्शन का अर्थ, परिभाषा और इसके मूल सिद्धांत

बौद्ध दर्शन की जन्मभूमि भारत है, यह बात दूसरी है कि उसका विकास भारत की अपेक्षा, बर्मा, श्याम, जावा, तिब्बत, चीन, कोरिया, मंगोलिया और जापान में अधिक हुआ है। प्रारंभ में यह मत भी एक धर्म के रूप में विकसित हुआ था। शाक्य गणाधिपति शुद्धोधन के पुत्र सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध, 567-487 ई. पू.) इसके प्रतिपादक थे। …

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निर्यात संवर्धन क्या है? निर्यात वृद्धि के लिए सरकार द्वारा अपनाये गये उपाय

निर्यात संवर्धन से अर्थ निर्यात प्रोत्साहन से लगाया जाता है जिसमें निर्यात वृद्धि के लिए पुराने निर्यातकर्ताओं को तथा नवीन कार्यकर्ताओं को निर्यात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।’’  इनके लिए उन्हें नगद सहायता दी जाती है।  बैंकों से ऋण प्रदान किये जाते हैं।  कुछ पूंजीगत एवं अन्य आवश्यक मशीनों व कच्चे माल को निर्यात …

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क्रेता किसे कहते हैं || क्रेता का अर्थ || क्रेता व्यवहार का अर्थ

क्रेता का अर्थ वस्तु के क्रय करने वाले से है। यह क्रेता दो प्रकार के होते हैं – एक तो वे जो वस्तुओं को कच्चे माल के रूप में क्रय करते हैं; जैसे कारखाने के मालिक द्वारा वस्तु बनाने के लिए वस्तुओं को क्रय करना, दूसरे वे जो वस्तुओं को स्वयं उपभोक्ता के लिए क्रय करते …

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प्रबंध की प्रमुख विशेषताएं, उद्देश्य, महत्व, स्तर एवं कार्य

प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व अन्य लोगों से कार्य कराने की कला को प्रबंध कहा जाता है। यह निर्धारित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से एवं दक्षतापूर्ण प्राप्त करने के लिए किये गए कार्यों की प्रक्रिया है। अत: प्रबंध को प्रभावशीलता एवं कार्यक्षमता से लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु कार्य कराने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित …

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