निबंध का अर्थ, परिभाषा, उद्भव और विकास

साहित्य की प्रमुख दो विधाएँ ‘गद्य-पद्य’ हैं। गद्य आधुनिक काल की प्रमुख देन है। गद्य की अनेक विधाओं में निबंध विशेष विधा है। मुद्रण कला के विकास ने पत्र-पत्रिकाओं के प्रचार-प्रसार को अत्यधिक बढ़ा दिया जिसके परिणामस्वरूप निबंध की लोकप्रियता एवं वैविध्य में वृद्धि होती गई। उन्नीसवीं सदी के छठे दशक में भारतेंदु युग में निबंध …

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रिपोर्ताज किसे कहते हैं? – अर्थ, परिभाषा

यह गद्य में लेखन की एक विशिष्ट शैली है। रिपोर्ताज से आशय इस तरह की रचनाओं से है जो पाठकों को किसी स्थान, समारोह, प्रतियोगिता, आयोजन अथवा किसी विशेष अवसर का सजीव अनुभव कराती हैं। गद्य में पद्य की सी तरलता और प्रवाह रिपोर्ताज की विशेषता है। अच्छा रिपोर्ताज वह है जो पाठक को विषय की …

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उर्दू साहित्य का इतिहास और उर्दू साहित्य का विकास

आगरा तथा दिल्ली के आस-पास की हिंदी अरबी-फारसी तथा अन्य विदेशी शब्दों के सम्मिश्रण से विकसित हुई है। इसका दूसरा नाम ‘उर्दू’ भी है। मुसलमानी राज्य में यह अंतरप्रांतीय व्यवहार की भाषा थी। 19वीं शताब्दी में ‘हिंदुस्तानी’ का शब्द उर्दू का वाचक बन गया था। इसी को पुराने ‘एंग्लो इंडियन’, मूर भी कहते थे। स्पेन तथा …

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ज्ञानाश्रयी शाखा की विशेषताएं

ज्ञानाश्रयी शाखा की विशेषताएं निर्गुण उपासना इस शाखा के कवियों ने ईश्वर को निर्गुण माना है। निराकार ब्रह्म की भक्ति को आलम्बन बनाना कठिन होता है। इसके सम्बन्ध में ज्ञान की चर्चा सुलभ होती है। कबीर ने सिद्धों और नाथों की विचारधारा को और आगे बढ़ाया और निर्गुण, निराकार, अव्यक्त और घट. घटवासी ब्रह्म की उपासना …

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सूफी शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ? सूफी मत का भारत में प्रवेश कब और कैसे हुआ

सूफी मत इस्लाम धर्म का ही एक अंग है। सूफी शब्द की उत्पत्ति सूफी शब्द कैसे चल पड़ा? कुछ लोगों की धारणा है कि सऊदी अरब के एक पवित्र नगर मदीना में मस्जिद के सामने एक सुफ्फा (चबूतरा) था, उस पर जो फकीर बैठते थे, वे सूफी कहलाये। प्रसिद्ध इतिहासकार अलबरूनी (जन्म काल 1971 ई.) ने …

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सूफी काव्य की प्रमुख विशेषताएं

सूफी मत के विकास क्रम में प्रसिद्धि प्राप्त सूफियों के षिश्य प्रषिश्य बनते गये और उन्होंने भिन्न सम्प्रदायों और उपसम्प्रदायों का रूप ग्रहण किया और यही सम्प्रदाय शनै: शनै: सभी देशों में फैल गये। विश्व के प्रमुख महान सूफी प्रस्थान अरब, ईरान, ईराक, मध्य ऐषिया, सिरिया, उत्तरी-अफ्रीका तथा भारत रहे है। इस मत ने अरब में …

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रामकाव्य की प्रमुख विशेषताएं

रामकाव्य ने भारतीय जनता को बहुत प्रभावित किया है। इसने भक्ति के उदात रूप को जनता के सन्मुख उपस्थित किया है। रामकाव्य जनता का मनोरंजन करता है। आधुनिक काल में जो रामलीलाएँ होती है, उनसे आबाल वृद्ध, ग्रामीण एवं नागरिक सभी का मनोरंजन होता है और इस मनोरंजन के द्वारा मानसिक उन्नयन भी। राम मर्यादा पुरुषोत्तम …

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अष्टछाप के कवियों के नाम और सामान्य परिचय

अष्टछाप के संस्थापक विट्ठलनाथ थे। ग्रन्थ रचना की अपेक्षा विट्ठलनाथ द्वारा किये गये सम्प्रदाय संगठन सम्बन्धी कार्य अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। पिता के और अपने चार-चार शिष्यों को मिलाकर विट्ठलनाथ जी ने ‘अष्टछाप’ नाम से गायक कवियों का एक दल बनाया।  हिन्दी साहित्य में अष्टछाप के इन कवियों का विशेष महत्व है। अष्टछाप के इन कवियों का परिचय आगे …

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रीतिकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएं

वस्तुतः उत्तर मध्य काल के नामकरण को लेकर विद्वानों में मतभेद रहे हैं। मिश्रबधुओं ने इसे अलंकृत काल कहा है तो आचार्य शुक्ल ने इसे रीतिकाल नाम दिया है। पं. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने इसे शृंगार काल कहा। इसी प्रकार डाॅ. रमाशंकर शुक्ल रसाल ने इसे कला कला कहा है और डाॅ. भगीरथ मिश्र ने इसे …

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रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ एवं धाराएँ

सम्पूर्ण रीति साहित्य को तीन वर्गों में विभक्त किया जा सकता है। (1) रीतिशास्त्रीय काव्य, (2) रीतिबद्ध काव्य, (3) रीतिमुक्त काव्य। किन्तु इस सन्दर्भ में विद्वानों में मतभेद है। डॉ. नगेन्द्र द्वारा सम्पादित ‘हिन्दी साहित्य’ के इतिहास में लिखा गया है। “रीतिकालीन कविता के प्रसंग में विद्वानों ने तीन प्रकार के काव्य का विवरण दिया गया …

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