तनाव का अर्थ, लक्षण एवं कारण

तनाव वर्तमान जीवन की एक बड़ी समस्या है। मनोवैज्ञानिकों ने तनाव के कर्इ तरीकों से परिभाषित कर उसे समझने का प्रयास किया है। इन मनोवैज्ञानिकों में हैंस सेली का नाम सर्वाधिक प्रमुखता से लिया जाता है। आइये हम तनाव की प्रमुख परिभाषाओं को जानें। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हैंस सेली ने अपनी पुस्तक ‘द स्ट्रेस ऑफ लाइफ’ में …

Read more

वृक्क की संरचना एवं कार्य

मानव शरीर की उदरीय गुहा के पश्च भाग में रीढ के दोनों ओर दो वृृक्क स्थित होते हैं। ये बैगंनी रंग की रचनायें होती है जो आकार में बहुत बडी नहीं होती है। इन वृृृक्कों के पर टोपी के समान अधिवृक्क ग्रन्थियां नामक रचना पायी जाती हैं। ये वृक्क शरीर में रक्त को छानकर, रक्त की …

Read more

आहार का पाचन

सर्वप्रथम भोजन को मुँह से चबाते है तत्पश्चात निगलते है भोजन अमाशय में नलीनुमा संरचना (ग्रासनली) द्वारा जाता है , फिर छोटी आंत एवं बडी आंत में पहुंचता है। मुख्य रूप से छोटी आंत में भोजन का पाचन होता है एवं शरीर के लिये उपयेागी सरल पोषक तत्त्वों को आहार से यकृत में प्रतिहारिणी शिरा द्वारा …

Read more

असामान्य मनोविज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

असामान्य व्यवहार के बारे में अध्ययन करना अपने आप में कोर्इ नया कार्य नहीं है, क्योंकि यह कार्य बहुत प्राचीन समय से किया जाता रहा है। असामान्य मनोविज्ञान की एक लम्बी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। मनोरोगों के अध्ययन का प्रारंभ मानवजाति के अभिलिखित इतिहास से ही होता है। अत्यधिक प्राचीन समय में मानसिक विकृतियों का कोर्इ ऐतिहासिक …

Read more

श्वसन तन्त्र की संरचना एवं कार्य

श्वास-प्रश्वास मनुष्य के जीवन का लक्षण है। मनुष्य भोजन के अभाव में कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, जल के अभाव में कुछ घंटे बीता सकता है किन्तु श्वास-प्रश्वास अथवा वायु के अभाव में कुछ क्षणों में ही जीवन लीला पर प्रश्न चिºन स्थापित हो जाता है।शरीर विज्ञान के अनुसार यदि चार मिनट तक शरीर …

Read more

आहार के स्रोत

मानव आहार प्राणी आहार माँस,मछली, अण्डा, दूध वनस्पति आहार अनाज, दाल, शर्करा, सब्जियाँ, फल, सूखेफल, मसाले आपके मन में यह जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो रही होगी कि आहार के स्रोत से हमारा क्या आशय है? वस्तुत: आहार के स्रोत से हमारा आशय यह है कि हमें आहार कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है। जिन भी पदार्थों …

Read more

आकाश तत्व क्या है ?

संसार में पंच महा भूतो में आकाश तत्व प्रधान होता है। यह सबसे अधिक उपयोगी एवं प्रथम तत्व हैै। जिस प्रकार परमात्मा असीम एंव निराकार है उसी प्रकार आकाश तत्व का असीम एवं निराकार है। आकाश तत्व का उसी प्रकार नाश नही हो सकता जिस प्रकार र्इश्वर को कभी नश्ट नहीं किया जा सकता। भारतीय मान्यताओं …

Read more

पाचन तंत्र के कार्य एवं प्रमुख अंग

व्यक्ति साधारण रूप में जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह वास्तव में भी तभी हमारे लिए उपयोगी होता है जब हम इस लायक हो जाये कि शरीर के अन्तर्गत रक्त कोशिकाओ एवं अन्य कोशिकाओं तक पहुॅच कर शक्ति व ऊर्जा उत्पन्न कर सके। यह कार्य पाचन प्रणाली के विभिन्न अंग मिलकर करते हैं। पाचन …

Read more

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धान्त

मनुष्य प्रकृति का एक हिस्सा है। उसका शरीर इन्हीं प्रकृति तत्व से बना है। प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धान्त नितान्त मौलिक है इनके अनुसार प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करने से रोग पैदा होते है तथा प्राकृतिक नियमों का पालन करते हुए पुन: निरोग हो सकते है। मनुष्य शरीर में स्वाभाविक रूप एक ऐसी प्रकृति प्रदत्त्ा पायी …

Read more

हृदय की संरचना, कार्य, कोष्टक एवं कपाट

हृदय की संरचना हृदय गुलाबी रंग का शंक्वाकार अन्दर से खोखला मांसल अंग होता है। यह शरीर के वक्ष भाग के वक्ष भाग में फेफडो के बीच स्थित होता है। हृदय ये ही रूधिर वाहिनियॉ रक्त को पूरे शरीर में ले जाती है। तथा फिर इसी से वापस लेकर आती है। सामान्यत: मनुष्य शरीर में रक्त …

Read more