Low blood pressure निम्न रक्तचाप के लक्षण क्या है ?

निम्न रक्त चाप शब्द का प्रयोग प्रायः ऐसे स्थिति की ओर संकेत करता है जहाॅं शरीर का रक्त दाब सामान्य स्तर से कम हो जाता है। यह स्थिति कुछ उम्र की सामान्य घटना है। उच्च रक्त चाप की तरह ही निम्न रक्त चाप को सही-सही परिभाषित करना कठिन होगा क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति अलग-अलग होती …

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मौखिक अभिव्यक्ति शिक्षण : अर्थ महत्व, उद्देश्य और विशेषताएँ

मानव प्रधानतः अपनी अनुभूतियों तथा मनोवेगों की अभिव्यक्ति उच्चरित अथवा मौखिक भाषा में ही करता है प्रिय छात्रो! लिखित भाषा तो गौण तथा उसकी प्रतिनिधि मात्रा है, क्योंकि भावों की अभिव्यक्ति का साधन साधारणतः उच्चरित भाषा ही होती है। भावों के आदान-प्रदान का एक ही साधन है- भाव या वाणी। आधुनिक जनतांत्रिक युग में जीवन की …

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शिक्षा के कार्य क्या है ?

शिक्षा मानव जीवन के विकास की वह महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो जीवनपर्यंत चलती रहती है। यह व्यक्ति और समाज दोनों के विकास में योगदान देती है। इसके कार्य बहुमुखी हैं। इसके कार्यों के विषय में विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं। कुछ विचार निम्न प्रकार हैं-  एम. एल. जैक्स के अनुसार-‘‘शिक्षा को अनेकों कार्य …

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कब्ज के लक्षण, कारण, कब्ज को जड़ से खत्म करने के उपाय?

कब्ज की वजह से मल त्याग में भी अनियमितता आ जाती है। इससे कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। सामान्य व्यक्ति एक नियत समय पर शौच आदि से निवृत हो जाता है, जबकि कब्ज से पीडि़त व्यक्ति में यह समय सुनिश्चित नहीं होता है। मल का सुखा एवं कड़ापन शौच की अवधि को और …

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खड़ीबोली का नामकरण और क्षेत्र

हिंदी में गद्य-रचना के विकास-काल से खड़ी बोली का प्रभावी रूप में विकास हुआ है। आदि काल में डिंगल-पिंगल में रचना होती थी, तो मध्यकाल में अवध्ी और ब्रजभाषा काव्य-रचना की आधार भाषा थी। आधुनिक युग में हिंदी का यही रूप साहित्य-सृजन का आधार बना है। हिंदी भाषा में एकरूपता और बोध्गम्यता बढ़ाने का प्रयास एक …

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आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का संक्षिप्त परिचय और इसका वर्गीकरण

आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का विकास मध्यकालीन अपभ्रंश भाषाओं से हुआ है। प्राचीन पाँच प्राकृतों से पाँच अपभ्रंश भाषाओं का विकास हुआ है। इन पाँच अपभ्रंशों के साथ ही ब्राचड एवं खस दो अपभ्रंशों को और लिया जाता है। ब्राचड (सं0 ब्राचड या व्राचट) का उल्लेख मार्कण्डेय के प्राकृत सर्वस्व में अपभ्रंश के 27 भेदों में मिलता …

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पर्यायवाची शब्द / पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं

प्रायः यह देखने को मिलता है कि एक ही अर्थ के लिए अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता है जैसे कमल के लिए पद्म, पंकज, जलज आदि। ये शब्द पर्यायवाची कहलाते हैं। यद्यपि प्रत्येक शब्द का अपना विशिष्ट अर्थ होता है। परन्तु कालान्तर में इन विशिष्ट अर्थों का लोप हो जाता है और ये एक ही …

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पूंजीवादी एवं साम्यवाद में अंतर

साम्यवाद को कई मार्क्सवादी समाजवाद भी कहते हैं। समाजवाद तथा साम्यवाद ये दोनों ही विचारधाराएँ मानव मात्रा की समानता, विशेषतः आर्थिक समानता के विचार पर आधारित हैं और इसलिए प्रायः कई व्यक्ति इन्हें एक ही समझने की भूल कर लेते हैं। यथार्थ में इनके उद्देश्य, साधन, कार्यक्षेत्र तथा पद्धति में बहुत अधिक अंतर है। स्वयं मार्क्स …

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वाक्य रचना कैसे होती है समस्त प्रकार की वाक्य गतिविधियों का वर्णन

वाक्य रचना पदों के संयोग से होती है। इसमें मुख्यतः चार बातें आवश्यक मानी गई हैं- 1. पदक्रम या शब्दक्रम, 2. अन्वय, 3. लोप, 4. आगम।  1. पदक्रम- योगात्मक भाषाओं में पदक्रम अनिवार्य होता है। चीनी जैसी भाषाओं में पक्रम का अत्यन्त मह़वपूर्ण स्थान है। वियोगात्मक भाषाओं में भी पदक्रम के महत्व को अस्वीकार नहीं किया …

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वाच्य किसे कहते हैं? वाच्य के कितने भेद होते हैं। उदाहरण सहित

वाक्य में प्रयुक्त क्रिया रूप कर्ता, कर्म या भाव किसके अनुसार प्रयुक्त हुआ है, इसका बोध कराने वाले कारकों को वाच्य कहते हैं।  वाच्य तीन प्रकार के होते है- कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य। क्रिया में कर्ता की प्रधानता होने पर कर्तृवाच्य, कर्म की प्रधानता होने पर कर्मवाच्य और केवल भाव या क्रिया (यापार) की प्रधानता होने …

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