मैस्लो का व्यक्तित्व का मानवतावादी सिद्धांत क्या है? इसकी सीमायें एवं गुण क्या-क्या है

एब्राहम मैस्लो का व्यक्तित्व सिद्धांत। मैस्लों का व्यक्तित्व सिद्धांत मानवतावादी आन्दोलन से प्रेरित है, जिसमें मानवीय व्यक्तित्व के विकास में बाह्य कारकों की तुलना में व्यक्तिगत मूल्यों, आत्मनिर्देश तथा व्यक्तिगत वर्धन इत्यादि मानवीय एवं आन्तरिक कारकों पर अधिक बल दिया गया है।  मैस्लों द्वारा व्यक्तित्व विकास में आन्तरिक कारकों पर अत्यधिक बल दिये जाने के कारण …

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शुम्पीटर के विकास मॉडल की आलोचनात्मक व्याख्या

जोसेफ एलोई शुम्पीटर ने जर्मन भाषा मे। प्रकाशित The Theory of Economic Development में पहली बार 1911 में अपना सिद्धान्त दिया। The Theory of Economic Development का 1934 में अंग्रेजी संस्करण आया। शुम्पीटर के बाद में अन्य पुस्तकें ‘‘व्यापार चक्र’’ तथा पूंजीवाद, समाजवाद, प्रजातन्त्र भी आयी जिनमें उन्होनें अपने विचारों में सुधार करके आर्थिक विकास के बारे में पूर्ण …

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निर्यात संवर्धन क्या है? निर्यात वृद्धि के लिए सरकार द्वारा अपनाये गये उपाय

निर्यात संवर्धन से अर्थ निर्यात प्रोत्साहन से लगाया जाता है जिसमें निर्यात वृद्धि के लिए पुराने निर्यातकर्ताओं को तथा नवीन कार्यकर्ताओं को निर्यात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।’’  इनके लिए उन्हें नगद सहायता दी जाती है।  बैंकों से ऋण प्रदान किये जाते हैं।  कुछ पूंजीगत एवं अन्य आवश्यक मशीनों व कच्चे माल को निर्यात …

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हृदय रोग के व्यक्ति में कौन – कौन से लक्षण पाये जाते हैं ?

हृदय-रक्त-संचरण क्रिया का यह सबसे मुख्य अंग है। यह नाशपाती के आकार का मांसपेशियों की एक थैली जैसा होता है। हाथ की मुट्ठी बाँधने पर जितनी बड़ी होती है, इसका आकार भी उतना ही बड़ा होता है। इसका निर्माण धारीदार एवं अनैच्छिक पेशी – ऊतकों द्वारा होता है। वक्षोस्थि से कुछ पीछे की ओर तथा बाँयें …

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क्रेत्समर एवं शेल्डन का व्यक्तित्व सिद्धांत – Kretschmer and Sheldon’s personality theory

क्रेत्समर एवं शेल्डन के अनुसार व्यक्तित्व की अवधारणा- क्रेत्समर एवं शेल्डन दोनों ने ही मानवीय व्यक्तित्व का आधार शरीर की संरचना एवं क्रियाविधि को माना है। अर्थात्- मनुष्य का शारीरिक गठन तथा उसके उसकी शारीरिक गतिविधियों के आधार पर किसी प्राणी के व्यक्तित्व का विश्लेषण किया जा सकता है।  क्रेत्समर एवं शेल्डन दोनों ही विद्वानों का …

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रचना शिक्षण का अर्थ, परिभाषा, विधियां तथा उद्देश्य

रचना शब्द ‘composition’ का हिन्दी रूपान्तरण है। भाषा के क्षेत्र में रचना के अन्तर्गत भावों व विचारों को शब्द-समूहों में सँवारते है। विचारों को क्रमबद्ध करके शब्द-समूह में व्यक्त करना, आत्माभिव्यक्ति का अभ्यास, भावों एवं विचारों की अभिव्यक्ति, तथा कलात्मक ढंग से विचार व्यक्त करना ही रचना है। रचना के प्रकार रचना के दो प्रकार है …

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बौद्ध दर्शन का अर्थ, परिभाषा और इसके मूल सिद्धांत

बौद्ध दर्शन की जन्मभूमि भारत है, यह बात दूसरी है कि उसका विकास भारत की अपेक्षा, बर्मा, श्याम, जावा, तिब्बत, चीन, कोरिया, मंगोलिया और जापान में अधिक हुआ है। प्रारंभ में यह मत भी एक धर्म के रूप में विकसित हुआ था। शाक्य गणाधिपति शुद्धोधन के पुत्र सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध, 567-487 ई. पू.) इसके प्रतिपादक थे। …

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उच्च रक्तचाप के लक्षण एवं कारण क्या है ?

उच्च रक्तचाप-आयु वर्ग विशेष के लिए मान्य अधिकतम रक्त-चाप से अधिक रक्त-चाप हो जाना उच्च रक्तचाप कहलाता हैं। उच्च रक्तचाप को हाइपरटेन्शन (Hypertension) तथा हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) अति रक्तदाब, रक्तभार वृद्धि, धमनी जरा रोग आदि नामों से भी जाना जाता हैं। जब तक शरीर की धमनियाँ और रक्त-नलिकाएँअपनी स्वाभाविक दशा में रहती हैं, …

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लेखन शिक्षण का अर्थ, उद्देश्य, गुण, विधि, प्रविधियाँ

आधुनिक समय में व्यक्ति अपने मनोभावों का प्रकटीकरण भाषा के माध्यम से दो रूपों में करता है। 1. मौखिक भाषा के माध्यम से 2. लिखित भाषा के माध्यम से । मौखिक रूप के अन्तर्गत भाषा का ध्वन्यात्मक रूप एवं भावों की मौखिक अभिव्यक्ति है। जब इन ध्वनियों को प्रतीकों के रूप में व्यक्त किया जाता है, …

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वेदांत दर्शन किसे कहते हैं इसके मूल सिद्धांत क्या है ?

वेद, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषदों के गूढ़ एवं विस्तृत चितन का अंतिम सार ही वेदांत दर्शन है। वादरायण व्यास (चौथी शताब्दी) पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इन समस्त ग्रंथों के सार तत्व को सूत्र रूप में प्रस्तुत किया। उनके द्वारा विरचित ग्रंथ का नाम ‘ब्रह्म सूत्र’ है। यही ग्रंथ वेदांत दर्शन का आदि ग्रंथ है। वादरायण के …

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