कारक परिभाषा, कारक के कितने भेद हैं? उदाहरण

कारक का अर्थ है – ‘करोति इति कारकम्’। जो क्रिया का निष्पादक होता है, उसे कारक कहते हैं। कैयट और भर्तृहरि का कथन है कि क्रिया साध्य है और कारक साधन है। इस प्रकार क्रिया को सिद्ध करने वाले को ‘कारक’ कहते हैं। संस्कृत व्याकरण के अनुसार सात कारक माने गए हैं। कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, …

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अधिगम स्थानांतरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, सिद्धांत

शिक्षा में सीखने के स्थानांतरण का अर्थ ‘सीखी हुई क्रिया या विषय का अन्य परिस्थितियों में उपयोग करना।’ दूसरे शब्दों में एक विषय या परिस्थिति में अर्जित ज्ञान का अन्य विषयों या परिस्थितियों के ज्ञानार्जन पर प्रभाव पड़ना ही अधिगम का स्थानांतरण कहलाता है। इसे ‘अधिगम संक्रमण’ या ‘अधिगमानान्तरण’ भी कहते हैं। उदाहारणार्थ- गणित सीखने से …

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साइटिका के कारण, लक्षण और घरेलू इलाज

सायटिका स्नायु तंत्र से संबंधित एक गम्भीर रोग है। जिसमें शरीर की सबसे बड़ी स्नायु (सियाटिक नर्व ) मुख्य रूप से प्रभावित होता है। यह सियाटिक स्नायु कमर क्षेत्र से निकल कर नितंभ, जांघ तथा पैर की ओर संवेदना संवाहित करता है। यह स्नायु जांघ की पेशियों में विभाजित होकर घुटने, पिण्डली तथा पैर में पीछे …

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वचन किसे कहते हैं ? वचन के प्रकार / वचन के कितने भेद होते हैं

वचन सामान्यतः वचन शब्द का प्रयोग किसी के द्वारा कहे गये कथन अथवा दिये गये आश्वासन के अर्थ में किया जाता है, किन्तु व्याकरण में वचन का अर्थ संख्या से लिया जाता है। वह, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।  वचन के प्रकार / वचन के भेद …

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अधिगम की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

अधिकांश व्यक्तियों की शिक्षण के विषय में भ्रमपूर्ण धारणा है। उनका मानना है कि शिक्षण का आशय रटने या ज्ञान को मस्तिष्क में ठूँसने से है परन्तु वास्तव में यह गलत है। शिक्षण एक सामाजिक घटना है। इसका अर्थ स्पष्ट करने के लिए निम्नलिखित परिभाषाओं को देखा जा सकता है। डॅा. माथुर- वर्तमान समय में शिक्षण …

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अल्सर के लक्षण और इसके मुख्य कारण

अल्सर रोग पाचन संस्थान से संबंधित है। अल्सर को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पेप्टिक अल्सर के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे उदर व्रण भी कहते हैं। आमाशय में लम्बे समय तक जलन या अति अम्लता या अम्लपित्त की स्थिति इस रोग को जन्म देता है। यह एक ऐसा रोग है जो प्रायः …

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लिंग किसे कहते है? // लिंग के कितने प्रकार होते है?

लिंग शब्द का अर्थ होता है चिह्न या पहचान। व्याकरण के अन्तर्गत लिंग उसे कहते हैं, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द के स्त्री या पुरुष जाति का होने का बोध होता है।  लिंग के भेद हैं? हिन्दी भाषा में लिंग दो प्रकार के होते हैं – (i) पुल्लिंग (ii) स्त्री लिंग ।  (i) पुल्लिंग: जिसके द्वारा किसी विकारी …

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तटस्थता वक्र का अर्थ , मान्यताएं एवं विशेषताएं

तटस्थता वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोगों को प्रकट करता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। इसका अभिप्राय यह हुआ कि एक तटस्थता वक्र पर जितने बिन्दु होते हैं वे दो वस्तुओं के उन संयोगों को प्रकट करते हैं जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। चूंकि …

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मनोविश्लेषणवाद के प्रवर्तक कौन है इनके विचारों का संक्षिप्त विवरण

मनोविश्लेषणवाद के प्रमुख प्रवर्तक वियना के सिगमंड फ्रायड (1856-1939) थे। यह सम्प्रदाय विशेष रूप से अज्ञात मन की चेष्टाओं का अध्ययन करता है। डाॅ. फ्रायड ने मूर्छा और स्नायु रोगों की चिकित्सा के लिये सम्मोहन या मोह-निद्रा विधि को अपनाया। इस विधि द्वारा वह रोगियों को अचेतन अवस्था में करके उससे प्रश्न पूछता था। मोह-निद्रा के …

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संधिवात के लक्षण और इसके मुख्य कारण

शरीर के संधियों को मुख्यतः प्रभावित करने वाले इस रोग को आर्थराइटिस या संधिवात कहा जाता है। हमारे शरीर में अधिकांश संधियाॅं विशेष प्रकार से निर्मित होती है जिसे श्लेषक संधि कहते हैं। श्लेषक संधि में अस्थियों के दोनों सिरे, उपास्थियों अर्थात् कार्टिलेज से निर्मित होती है जो उनके किनारों को पूर्णरूपेण चिकना बनाये रखता है। …

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