भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जीवन परिचय, रचनाएं एवं साहित्यिक विशेषताएं

भारतेन्दु हरिश्चंद्र बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्होंने कविता के क्षेत्र में अपनी कवि प्रतिभा का परिचय दिया है। साथ ही, आधुनिक हिंदी गद्य के निर्माता के रूप में उनकी प्रसिद्धि रही है। उनके प्रयास और प्रेरणा के फलस्वरूप गद्य की विविध विधाओं नाटक, निबंध, आलोचना, उपन्यास, यात्रा वृत्त आदि का श्रीगणेश हुआ। हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र …

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न्यायपालिका की स्वतंत्रता से क्या समझते हैं न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाये रखने के लिए किये गये संवैधानिक प्रावधान

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि सरकार के अन्य दो अंग विधायिका और कार्यपालिका, न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप न करके उनके कार्यों में किसी भी प्रकार की बांधा न पहुंचाये ताकि वह अपना कार्य सही ढंग से करें और निष्पक्ष रूप से न्याय कर सके।’’ संघात्मक सरकार में संघ और राज्यों के मध्य विवाद …

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हीगल के राज्य संबंधी विचार, #Hegel

हीगल के राज्य संबंधी विचार सम्पूर्ण राजनीतिक चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण एवं मौलिक विचार हैं। उसके प्रमुख राज्य संबंधी विचार ‘फिनोमिनोलॉजी ऑफ स्पिरिट’ तथा ‘फिलोसॉफी ऑफ राइट’ नामक ग्रन्थों में वर्णित हैं। हीगल ने जर्मनी की तत्कालीन राजनीतिक दुर्दशा को देखकर अपने चिन्तन को खड़ा किया था ताकि जर्मनी का एकीकरण हो सके और जर्मनी एक शक्तिशाली राष्ट्र …

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भारतेंदु युग का नामकरण एवं समय सीमा। भारतेंदु युग की विशेषताएं

आधुनिक काल के हिंदी साहित्य का अंतर्विभाजन प्राय: सभी विद्वानों ने एक जैसा किया है किन्तु नामकरण एवं सीमा निर्धारण के विषय में मतैक्य नहीं है। विशिष्ट काल में विशेष साहित्यकार के प्रमुख योगदान को देखते हुए भारतेंदु हरिश्चन्द्र के नाम पर उनके युग को भारतेंदु कहा गया है। भारतेंदु युग का नामकरण आचार्य रामचन्द्र शुक्ल …

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ब्लॉग क्या होता है? | What is Blog in Hindi?

’ब्लाॅग’ वेब ब्लाॅग का संक्षिप्त रूप है, जो अमेरिका में 1977 के दौरान इंटरनेट में प्रचलित हुआ। प्रारंभ में कुछ ऑनलाइन जर्नलस के ब्लाॅग प्रकाशित किए गए थे जिसमें इंटरनेट के भिन्न क्षेत्रों में प्रकाशित समाचार, जानकारी इत्यादि लिंक होते थे तथा ब्लाॅग लिखने वालों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ भी उनमें होती थीं, इन्हें ब्लाॅग कहा जाने …

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हीगल के द्वंद्वात्मक सिद्धांत की व्याख्या

हीगल का द्वन्द्ववाद का विचार उसके सभी महत्त्वपूर्ण विचारों में से एक महत्त्वपूर्ण विचार है। यह विश्व इतिहास की सही व्याख्या करने का सबसे अधिक सही उपकरण है। हीगल ने इस उपकरण की सहायता से अपने दार्शनिक चिन्तन को एक नया रूप दिया है। इसी विचार के कारण हीगल को राजनीतिक चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण जगह …

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मैक्स वेबर के सत्ता के सिद्धांत || मैक्स वेबर के सत्ता के स्वरूप या प्रकार

मैक्स वेबर के अनुसार समाज में सत्ता विशेष रूप से आर्थिक आधारों पर आधारित होती, यद्यपि आर्थिक कारक सत्ता के निर्धारण में एकमात्र कारक नहीं कहा जा सकता। आर्थिक जीवन में यह सहज ही स्पष्ट है कि एक ओर मालिक वर्ग उत्पादन के साधनों तथा मजदूरों की सेवाओं पर अपने अधिकार को बढ़ाने का प्रयत्न करते …

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मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया के सिद्धांत

मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया के सिद्धांत का प्रतिपादन मैक्स वेबर ने अपनी महान कृति ‘Theory of Social and Economic Organisation’ में प्रवाहित किया है। मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया की अवधारणा को अपने चिन्तन का मूल आधार बनाया है। मैक्स वेबर के अनुसार मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के सन्दर्भ में निरन्तर किसी न किसी प्रकार की …

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दुर्खीम का आत्महत्या का सिद्धांत || दुर्खीम के आत्महत्या के प्रकार

आत्महत्या शब्द का प्रयोग उन सभी मृत्युओं के लिए किया जाता है जोकि स्वयं मृत व्यक्ति के किसी सकारात्मक या नकारात्मक ऐसे कार्य के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम होते हैं जिनके बारे में वह व्यक्ति जानता है कि वह कार्य इसी परिणाम अर्थात मृत्यु को उत्पन्न करेगा। दुर्खीम के आत्महत्या का सिद्धांत दुर्खीम द्वारा प्रतिपादित आत्महत्या …

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अगस्त काम्टे के तीन स्तरों का नियम

अगस्त काम्टे का जन्म (19 जनवरी 1798) एक कैथोलिक परिवार में मौटपेलियर फ्रांस में हुआ था। उनके माता-पिता फ्रांस की शाही सत्ता के समर्थक थे।। उस समय फ्रांसीसी क्रान्ति अपने चरम पर थी। उस वक्त ऐसी बहुत सी गतिविधियाँ घटित हो रही थी जिन्होंने आधुनिक विश्व की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। फ्रांसीसी क्रान्ति …

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