आधुनिकीकरण का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

आधुनिकीकरण सामाजिक परिवर्तन की एक बहुआयामी प्रक्रिया है जो समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक ढांचे को बदल देती है। यह परंपरा में परिवर्तन करने की घोषणा करता ह ै। आधुनिकीकरण का अर्थ आधुनिकीकरण शब्द एक प्रक्रिया का बोध कराता है। आधुनिकीकरण से तात्पर्य सतत् एवं लगातार होने वाली क्रिया से है। साथ ही आधुनिकीकरण …

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जजमानी व्यवस्था क्या है इसके पतन के कारण

‘जजमानी’ वैदिक शब्द है जिसका इस्तेमाल उस संरक्षक के लिए होता है जो समुदाय के लिए कोई यज्ञ संपन्न कराने के निमित्त से किसी ब्राह्मण को नियुक्त करता है। अपने मूल अर्थ में जजमानी आर्थिक संबंध का मतलब सेवाओं के बदले उपहारों का विनिमय था या भविष्य में हो सकता था। यह अर्थ आज भी नहीं …

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संपर्क भाषा किसे कहते हैं ?

भारत विभिन्नताओं का देश है। यहाँ भाषाओं की संख्या सैकड़ों में है। बाइस भाषाएँ तो संविधान की अष्टम सूची में ही उल्लिखित हैं। इस दृष्टि में यहाँ संपर्क भाषा का विशेष महत्व है। भारत के इतिहास का अवलोकन करें तो हम पाते हैं कि यहाँ युगों से ‘मध्य देश’ की भाषा सारे देश की माध्यम भाषा …

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उत्तर आधुनिकता का अर्थ एवं परिभाषा

उत्तर आधुनिकता के सम्बन्ध में अधिकतम चिंतक एवं समीक्षक पहले वाले अर्थ को अधिक महत्व देते हैं यद्यपि दूसरे अर्थ के समर्थक चिंतक भी मौजूद है जो उत्तर आधुनिकता को आधुनिकता (वाद) का पुनर्लेखन मानते हैं दोनों ही अर्थों में इतना तो निश्चित है कि आधुनिकता या उसके वादी-रूप ने जो कुछ परोसा था, वह अब …

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प्रजाति क्या है इसका वर्गीकरण

प्रजाति शब्द को अनेक अर्थो में प्रयुक्त किया जाता है। यूनानियों ने संपूर्ण मानव जाति को ग्रीक अथवा यवनों में वर्गीकृत किया था, परन्तु इनमें से किसी भी समूह को प्रजाति नहीं कहा जा सकता। ‘प्रजाति’ शब्द को कभी-कभी राष्टींयता (nationality) का समानार्थक समझकर प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरणतया, फ्रेंच, चीनी एवं जर्मनी को प्रजाति कहा …

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राष्ट्रभाषा किसे कहते हैं ? राष्ट्रभाषा हिंदी का स्वरूप और विकास

राष्ट्रभाषा किसी भी भाषा का प्रारंभिक रूप बोली होती हैं सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक आदि कारणों से कोई बोली विकसित होकर भाषा का रूप धारण कर लेती है। उसका प्रयोग क्षेत्र विस्तृत हो जाता है। भिन्न-भिन्न बोलियों के प्रयोक्ता समाज-जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उस भाषा का प्रयोग करने लगते हैं। विद्वानों के प्रयासों से भाषा …

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जाति व्यवस्था के गुण और जाति व्यवस्था के दोषों की विवेचना

समय-समय पर भारतीय जाति-व्यवस्था की विभिन्न लेखकों द्वारा आलोचना की गई है। समाज में जितनी बुराइयां हैं, उन सबके लिए जाति-व्यवस्था को दोषी ठहराया गया है। परन्तु एक मात्र यही तथ्य कि इतने आक्षेपों के बावजूद भी यह पहले की भांति अभी तक चल रही है, इस बात का प्रमाण है कि यह व्यवस्था इतनी बुरी …

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हिंदी की संवैधानिक स्थिति का परिचय

भारत सरकार द्वारा राजभाषा हिंदी प्रचार-प्रसार के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। सभी मंत्रालयों के साथ हिंदी सलाहकार समितियाँ बनाई गई हैं। इन समितियों की बैठक भी त्रैमासिक होने का प्रावधान है। इन बैठकों में राजभाषा प्रयोग के लेखा-जोखा पर विचार किया जाता है। वर्तमान समय में राजभाषा हिंदी के आकर्षक रूप से प्रयोग …

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जाति व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धान्त

जाति व्यवस्था की ठीक उत्पत्ति की खोज नहीं की जा सकती। इस व्यवस्था का जन्म भारत में हुआ, ऐसा कहा जाता है। भारत-आर्य संस्कृति के अभिलेखों में इसका सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है तथा उन तत्वों का निरन्तर इतिहास भी मिलता है, जिनसे जाति व्यवस्था का निर्माण हुआ। जिन लोगों को भारत-आर्य कहा जाता है, वे भाषाशास्त्रीय …

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देवनागरी लिपि तथा हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण

प्राचीन नागरी लिपि का प्रचार उत्तर भारत में नवीं सदी के अंतिम चरण से मिलता है, यह मूलत: उत्तरी लिपि है, पर दक्षिण भारत में भी कुछ स्थानों पर आठवीं सदी से यह मिलती है। दक्षिण में इसका नाम नागरी न होकर नंद नागरी है। आधुनिक काल की नागरी या देवनागरी, गुजराती, महाजनी, राजस्थानी तथा महाराष्ट्री …

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