आर्थिक संवृद्धि तथा आर्थिक विकास को कैसे मापा जाय ? मापदण्ड के रूप में क्या आधार चुना जाय?

आर्थिक संवृद्धि तथा आर्थिक विकास को कैसे मापा जाय ? मापदण्ड के रूप में क्या आधार चुना जाय? इसके सम्बन्ध में अर्थशास्त्रियों में मतभेद हैं। विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने इसको मापने के सम्बन्ध में अनेक मापदण्डों की चर्चा की है। वाणिकवादी अर्थशास्त्री किसी देश में सोने एवं चांदी की मात्रा को ही आर्थिक संवृद्धि का सूचक मानते …

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सार्वजनिक ऋण किसे कहते हैं सार्वजनिक ऋण के स्रोतों को या वर्गीकरण निम्न 8 आधारों पर किया जा सकता है

जब सार्वजनिक आय की तुलना में सार्वजनिक व्यय अधिक होता है तथा इस सार्वजनिक व्यय की पूर्ति सार्वजनिक ऋण लेकर की जाती है, जिसे सार्वजनिक ऋण कहते हैं। सरकार जब सार्वजनिक व्यय सम्बन्धी आवश्यकता की पूर्ति करारोपण के द्वारा नहीं कर पाती है। तथा घाटे की वित्त व्यवस्था का भी सहारा नहीं ले पाती है। ऐसे …

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आर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि का आशय, आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर

आर्थिक विकास की यह प्रथम इकाई है, इसके अध्ययन के से आप आर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि का आशय, आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर और आर्थिक विकास की प्रकृति को जान सकेगें। आर्थिक वृद्धि एवं विकास का विश्लेषण विकास का अर्थशास्त्र अल्पविकसित देशों के आर्थिक विकास की समस्याओं से सम्बन्ध रखता है। यद्यपि आर्थिक …

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परम्परागत बजटिंग की अवधारणा को स्पष्ट करने के बाद बजटिंग की मुख्य विशेषताओं का वर्णन

सामान्यत: दी जाने वाली सार्वजनिक बजटिंग की अवधारणा को परम्परागत बजटिंग से ही सम्बन्धित किया जाता रहा है। आपको यहाँ यह समझने में आसानी होगी कि परम्परागत बजटिंग के अन्तर्गत उन विधियों, व्ययों तथा मदों को सामान्य रूप से शामिल किया जाता है जिन्हें विगत वर्षों या समयावधियों में महत्व दिया जाता रहा है। इस प्रकार …

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पाठ्यक्रम क्या है पाठ्यक्रम निर्माण के मुख्य सिद्धांत कौन कौन से हैं?

पाठ्यक्रम हिन्दी भाषा का शब्द है । इसे अग्रेंजी भाषा मे ‘Curriculum’ कहते है। ‘Curriculum’ शब्द की उत्पति लेटिन भाषा के शब्द ‘Currer’ से हुई है , जिसका अर्थ है ‘दौडना’ । वर्तमान युग में पाठ्यक्रम का अर्थ अध्ययन में आनेवाली सभी क्रियाओं तथा विषयों से लिया जाता है। इस प्रकार पाठ्यक्रम से अभिप्राय उन सभी …

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कर विवर्तन क्या है कर विवर्तन के सिद्धांत?

उत्पादक कर की राशि थोक विक्रेता से वसूल लेता है, थोक विक्रेता फुटकर विक्रेता से वसूल लेता है कर के टालने की इस प्रक्रिया को कर-विवर्तन कहते है। कर विवर्तन क्या है?  कर विवर्तन उस क्रिया को कहा जाता है जिसके द्वारा कर का आंशिक या कुल भार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर टाला जाता …

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कविता का अर्थ, परिभाषा

कवि या रचनाकार जिस मंजिल से गुजरता है अर्थात् जो वह जीवन में भोगता है उसे वर्णित करता जाता है, वही कविता है ।  कविता की परिभाषा महावीरप्रसाद द्विवेदी के अनुसार :– “कविता का विषय मनोरंजन एवं उपदेश जनक होना चाहिए।” डॉ. नगेन्द्र के अनुसार – “छंदमयी की कविताओं का विषय वैयक्तिक जीवन की राग-विरागमयी, अनुभूतियों …

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करापात की अवधारणा को स्पष्ट करने के साथ विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गयी करारोपण की परिभाषा

कर के टालने की प्रक्रिया जब समाप्त हो जाती है और जिस व्यक्ति पर इसका भार अन्त में, पड़ता है उस व्यक्ति पर करापात हुआ माना जाता है। उपभोक्ता पर करापात होता है।  जब सरकार किसी व्यक्ति या संस्था पर कर लगाती है तो वह व्यक्ति या संस्था उस कर की राशि को स्वयं वहन न …

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विराम चिन्ह किसे कहते है विराम चिन्ह कितने प्रकार के होते है?

किसी भी बात को लिखते वक्त विराम चिन्ह का बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। विराम चिन्हों के माध्यम से वाक्य के प्रकार व ठहराव की जानकारी मिलती है। किसी के द्वारा कही गयी बात को सिर्फ लिख देने से यह पता नहीं चलता कि वह बात किस अंदाज में बोली गयी। विराम चिन्हों के माध्यम से …

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करारोपण के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव

कराकरोपण अर्थव्यवस्था के समस्त मुख्य भागों को प्रभावित करता है। कार्य करने की क्षमता एवं इच्छा पर करारोपण का प्रभाव करारोपण की प्रकृति के आधार पर पड़ता है जो उसी दिशा में उत्पादन को प्रभावित करता है। बचत करने की क्षमता तथा इच्छा का उत्पादन से सीधा सम्बन्ध है। इसके साथ उत्पादन के संसाधनों द्वारा भी …

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