भारतीय विदेश नीति के सिद्धांत क्या है?

किसी भी देश की विदेश नीति मुख्य रूप से कुछ सिद्धान्तों, हितों एवं उद्देश्यों का समूह होता है जिनके माध्यम से वह राज्य दूसरे राष्ट्रों के साथ संबंध स्थापित करके उन सिद्धान्तों की पूर्ति हेतु कार्यरत रहता है। इसी प्रकार प्रत्येक राज्यों की अपनी विदेश नीति होती है जिसके माध्यम से वे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने …

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राजनय के कार्य क्या है?

सरल शब्दों में राजनय एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से राष्ट्र एक-दूसरे के साथ संबंध बनाये रखते है। राजनय दो राष्ट्रों के मध्य संचार का साधन है, प्रेषित संदेश नहीं। यह बातचीत के माध्यम से राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक लक्ष्यों और हितों को प्राप्त करने का साधन है। इनसाइक्लोपीडिया ऑफ ब्रिटानिका राजनय को परिभाषा देते हुए …

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कार्ल मार्क्स का जीवन परिचय || Biography of Karl Marks

कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनका जन्म प्रशिया के राईन प्रान्त के ट्रीचर नामक स्थान पर हुआ था। उनकी माता हालैंड की एक यहूदी महिला थी। छः वर्ष की अवस्था तक उनका पालन-पोषण यहूदी संस्कारों के अनुरूप हुआ। उसके पिता हरशेल मार्क्स एक वकील थे और उसकी …

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कृषि में हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं? इसके लाभ एवं हानि की विवेचना

हरित क्रांति, हरित एवं क्रांति शब्द के मिलने से बना है। क्रांति से तात्पर्य किसी घटना में तेजी से परिवर्तन होने तथा उन परिवर्तनों का प्रभाव आने वाले लम्बे समय तक रहने से है। हरित शब्द कृषि फसलों का सूचक है। अत: हरित क्रांति से तात्पर्य कृषि उत्पादन में अल्पकाल में विशेष गति से वृद्धि का …

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रिकार्डो का आर्थिक विकास सिद्धांत

डेविड रिकार्डो के विकास सम्बन्धी विचार उनकी पुस्तक “The Principles of political Economy and Taxation” (1917) में जगह पर अव्यवस्थित रुप में व्यक्त किये गये। इनका विश्लेषण एक चक्करदार मार्ग है। यह सीमान्त और अतिरेक नियमों पर आधारित है। शुम्पीटर ने कहाँ रिकार्डो ने कोई सिद्धांत नही प्रतिपादित किया केवल स्मिथ द्वारा छोड़ी गयी कड़ियों को …

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भूमि सुधार से आप क्या समझते हैं भारत में इसके उद्देश्य स्पष्ट कीजिए?

भूमि सुधार एक विस्तृत धारणा है जिसमें सामाजिक न्याय की दृष्टि से जोतों के स्वामित्व का पुनर्वितरण तथा भूमि के इष्टतम प्रयोग की दृष्टि से खेती किए जाने वाले जोतों का पुनगर्ठन सम्मिलित है। नोबल पुरस्कार प्राप्त महान अर्थशास्त्री प्रो0 गुन्नार मिर्डल के अनुसार-’’भूमि सुधार व्यक्ति और भूमि के सम्बन्धों में नियोजन तथा संस्थागत पुनर्गठन है।’’  …

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आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व

विश्व के समस्त देशों में आर्थिक वृद्धि हुई है परन्तु उनकी वृद्धि दरें एक दूसरे से भिन्न रहती हैं। वृद्धि दरों में असमानताएं उनकी विभिन्न आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, तकनीकी एवं अन्य स्थितियों के कारण पाई जाती है। यहीं स्थितियां आर्थिक वृद्धि के कारक हैं। परन्तु इन कारकों का निश्चित रूप से उल्लेख करना भी एक …

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कृषि अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा एवं इसकी प्रकृति व क्षेत्र

कृषि अर्थशास्त्र में मनुष्य धन कमाने और उसे व्यय करने की समस्त क्रियाओं से उत्पन्न समस्याओं का अध्ययन किया जाता है । कृषि अर्थशास्त्र व्यावहारिक विज्ञान और आदर्श विज्ञान के साथ-साथ कला भी है। कृषि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र होता है। कृषि क्षेत्र का विकास दूसरे क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है।  कृषि …

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विकसित तथा अल्प विकसित देश में अंतर

मोटे तौर पर विश्व के देशों को दो भागों में बांटा जाता है – विकसित तथा अल्पविकसित अथवा धनी तथा निर्धन राष्ट्र। निर्धन देशों को कई नामों से पुकारा जाता है जैस निर्धन, पिछड़े, अल्प विकसित, अविकसित और विकासशील देश। वैसे तो यह सभी शब्द पर्यायवाची है परन्तु इनके प्रयोग में मतभेद रहा है।  उदाहरण के …

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घाटे की वित्त व्यवस्था की व्याख्या कीजिए

वर्तमान शताब्दी के प्रथम चतुर्थांश तक सन्तुलित और अतिरेक का बजट आदर्श बजट माना जाता था। परन्तु आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में विकास प्रक्रिया की विभिन्न आर्थिक और कल्याणकारी क्रियाओं में राज्य का एक समर्थ अभिकर्ता के रूप में प्रवेश होने के कारण सम्प्रति उसके कार्यक्षेत्र में अत्यन्त प्रसार हो गया है। परिणामत: राजकीय व्यय की मात्रा उत्तरोत्तर …

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