मानवेन्द्र नाथ राय के राजनीतिक विचार

मानवेन्द्र नाथ राय के चिन्तन का विकास मानवेन्द्र नाथ राय का राजनीतिक चिन्तन अनेक उतार-चढ़ावों से परिपूर्ण है। अपने जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में जब उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया तो वे एक क्रान्तिकारी स्वभाव के व्यक्ति थे। लेकिन अपने जीवन के अन्तिम पड़ाव में एक उदारवादी विचारक बन गए। लेकिन प्रारम्भ से …

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व्यक्तित्व विकार का अर्थ, परिभाषा, लक्षण, कारण एवं प्रकार

व्यक्तित्व विकार का अर्थ व्यक्तित्व विकृति एक प्रकार से अपरिपक्व व्यक्तित्व विकास का परिणाम होता है। इसमें ऐसे लोगों को सम्मिलित किया जाता है, जिनके व्यक्तित्व के शीलगुण तथा उनका विकास इतने अपरिपक्व एवं विकृत ढंग से होता है कि ये अपने वातावरण की प्राय: प्रत्येक वस्तु, घटना, परिस्थिति, व्यक्ति के बारे में एक दोषपूर्ण प्रत्यक्षण …

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अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप, अध्ययन क्षेत्र

अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने से पहले अंतरराष्ट्रीय संबंध को समझना आवश्यक है। समकालीन समय में अंतरराष्ट्रीय संबंध से तात्पर्य संप्रभुता राष्ट्र-राज्य के बीच संबंधों तथा अन्य गैर-राज्य अधिकर्ताओं जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों एवं बहु-राष्ट्रीय निगमों की नीतियों, गतिविधियों व भूमिकाओं सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और मुद्दों के अध्ययन से है। इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय संबंध अपनी …

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मानवेन्द्र नाथ राय का जीवन परिचय उनकी प्रमुख रचनाएं

मानवेन्द्र नाथ राय का जन्म 6 फरवरी, 1886 को पश्चिमी बंगाल (भारत) के परगना जिले के अरबेलिया गांव में हुआ। मानवेन्द्र नाथ राय का बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य था। मानवेन्द्र नाथ राय के पिता पंडित दीन बन्धु भट्टाचार्य एक स्कूल अध्यापक थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा भिंगरीपोटा में हुई। वे प्रारम्भ से ही क्रान्तिकारी विचारों के …

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तनाव क्या है इसके कारण और लक्षण?

तनाव एक मानसिक रोग न होकर मानसिक रोगों का मूल कारण है। तनाव को यदि हम कुछ सटीक शब्दों में स्पष्ट करना चाहें तो कह सकते हैं कि मन:स्थिति एवं परिस्थिति के बीच संतुलन का अभाव ही तनाव की अवस्था है।   कहने का तात्पर्य यह है कि जब व्यक्ति के सामने कोई ऐसी समस्या या …

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संविधान द्वारा राज्यपाल को पर्याप्त व्यापक शक्तियाँ दी गयी है। राज्यपाल की शक्तियों का अध्ययन इन रूपों में किया जा सकता है।

संविधान का अनुच्छेद 153 व्यवस्था करता है कि प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा। एक ही व्यक्ति एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल भी हो सकता है। राज्यपाल राष्ट्रपति के द्वारा पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है तथा वह राष्ट्रपति की इच्छा तक अपने पद पर बना रहता है। इसका अर्थ यह …

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लेनिन का सिद्धांत (पूंजीवादी साम्राज्यवाद, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, सर्वहारा-वर्ग की तानाशाही )

व्लादीमीर इलिच लेनिन का जन्म 9 अप्रैल, 1870 को रुस के यूलियानोवस्क मे हुआ। उनका वास्तविक नाम व्लादीमीर इलचि उल्यानोव था। लेनिन बी0ए0 पास करने के बाद कलान विश्वविद्यालय में कानून की शिक्षा प्राप्त करने चला गया, वहां पर उसे क्रांतिकारी क्रियाकलापों के कारण एक बार विश्वविद्यालय से निष्कासित किया गया।  लेनिन ने अपनी कुशाग्र बुद्धि …

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व्यक्तित्व का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

साधारणतः व्यक्तित्व का अर्थ व्यक्ति के बाह्य रूप, रंग तथा शारीरिक गठन आदि से लगाया जाता है। दैनिक जीवन में प्रायः हम यह सुना करते हैं कि अमुक व्यक्ति का व्यक्तित्व बड़ा अच्छा है, प्रभावशाली है या खराब है। अच्छे व्यक्तित्व का अभिप्राय यह है कि उस व्यक्ति की शारीरिक रचना सुन्दर है, वह स्वस्थ एवं …

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लोकसभा की शक्तियां तथा उसके कार्य

लोकसभा को निम्न सदन या प्रथम सदन कहा जाता है । यह सदन जनता का प्रतिनिधित्व करता है । लोकसभा में सदस्यों की संख्या 552 से अधिक नहीं होगी । जिसमें 530 सदस्य राज्यों के चुनाव क्षेत्रों से निर्वाचित तथा 20 सदस्य संघ राज्य क्षेत्रों के चुनाव क्षेत्रों से निर्वाचित होते हैं । राष्ट्रपति ऐसे दो …

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लेनिन का जीवन परिचय एवं महत्वपूर्ण रचनाएं

व्लादीमीर इलिच लेनिन  व्लादीमीर इलिच लेनिन का जन्म 9 अप्रैल, 1870 को रुस के यूलियानोवस्क नामक स्थान पर एक मध्यमवर्गीय सरकारी निरीक्षक के घर हुआ। लेनिन का पूरा नाम व्लादीमीर इलचि उल्यानोव था। जब वे निर्वासित होकर साबबेरिया में लेना नदी के किनारे रहने लगे तो उनका नाम लेनिन पड़ गया। लेनिन के पांच भाई-बहन थे। वे …

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