अक्षर विन्यास का अर्थ, महत्व, अशुद्धियों के कारण, सुधार के नियम

अक्षर विन्यास अथवा वर्तनी की शुद्धता भाषा का अनिवार्य अंग है। अभिव्यक्ति में विचारों की क्रमिकता एवं सुसम्बद्धता कितनी ही सुव्यवस्थित क्यों न हो परन्तु यदि विचारों को व्यक्त करने वाली भाषा शद्ध नहीं हो तो उसका असर नगण्य होकर रह जाएगा। भाषा की शुद्धता तो मुख्यत: शुद्ध अक्षर विन्यास पर निर्भर करती है। शुद्ध वाक्य …

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समाजशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, उत्पत्ति, प्रमुख विशेषताएं

समाजशास्त्र एक महत्वपूर्ण सामाजिक विज्ञान है क्योंकि यह लोगों के जीवन से सीधा सरोकार रखता है। सभी मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं. सामाजिक संबंधों के बिना न बच्चों का ठीक से विकास हो पाता, न वयस्कों को दिशा मिल पाती। मानव अस्तित्व के लिए समाज का होना जरूरी है। इस प्रकार समाजशास्त्र समाज का सामान्य विज्ञान है। …

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करारोपण का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत एवं वर्गीकरण

करारोपण एक अत्यन्त प्राचीन अवधारणा है। सरकारों को अपने सार्वजनिक कार्यों को सम्पन्न करने के लिए करारोपण द्वारा अनिवार्य रूप से कुछ धनराशि बसूली जाती है जिसे जनता द्वारा अदा किया जाता है। करारोपण का निर्धारण सरकारों द्वारा मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता है। इसके लिये करारोपण के अनेक सिद्धान्तों का सहारा लिया जाता …

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उच्चारण शिक्षण का अर्थ, महत्व, सोपान एवं आवश्यकता

हिन्दी भाषा का ध्वनितत्व वैज्ञानिक है, नागरी भाषा में प्रत्येक ध्वनि के लिए निश्चित अक्षर हैं और उनका सटीक उच्चारण है। उच्चारण पर बल न देने पर उच्चारण दोष उत्पन्न होता है और भाषा का रूप विकृत होता है, उसका निश्चित रूप नहीं बन पाता है। भाषा के दो रूप हैं- मौखिक भाषा लिखित भाषा शुद्ध …

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सामंतवाद से क्या तात्पर्य है सामंतवाद की परिभाषा?

यूरोप और ऐशिया के सामान्यत: मध्यकाल के युग को सामंतवाद कहा जाता है क्योंकि इसका उदय, विकास और हृास इसी काल में हुआ। इस शब्द की विभिन्न परिभाषाएं हैं क्योंकि विभिन्न विद्वानों ने इसकी अलग-अलग व्याख्या की है। इसका प्रयोग ऐतिहासिक विकास की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं के सन्दर्भ में किया जाता है और ये अवस्थाएं कालक्रम के …

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कार्यात्मक वित्त का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

कार्यात्मक वित्त शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अमेरिकी अर्थशास्त्री प्रो0 लर्नर ने किया था। परन्तु वित्त को कार्यात्मक बनाने का श्रेय कीन्स को जाता है। कीन्स द्वारा वित्त का उपयोग मन्दी एवं बेरोजगारी को दूर करने के लिये किया गया। जिन सामान्य उपकरणों की कीन्स ने चर्चा की, कार्यात्मक वित्त के अन्तर्गत सम्मिलित किया जाता है। कार्यात्मक …

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राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांत (विकासवादी सिद्धांत, दैवीय सिद्धांत)

राज्य की उत्पत्ति राज्य एक ऐतिहासिक परिघटना है जो मानव के सामूहिक जीवन की उपज है- जब मानव प्राकृतिक अवस्था से निकलकर संगठित जीवन आरम्भ करता है। अत: ऐसा समय भी रहा है जब, जिसे हम राज्य कहते हैं, उसका आस्तित्व नहीं था। प्राचीन भारतीय स्रोतों के अध्ययन से राज्य की उत्पत्ति तथा विकास की जानकारी …

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पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय

पर्यावरण प्रदूषण एक ऐसी सामयिक समस्या है जिससे मानव सहित समस्त जैव जगत के लिए जीवन की कठिनाइयाँ बढ़ती जा रही है। पर्यावरण के तत्व यथा वायु, जल, मृदा, वनस्पति आदि के नैसर्गिक गुण हृासमान होते जा रहे है जिससे प्रकृति और जीवों का आपसी सम्बन्ध बिगड़ता जा रहा है। वैसे प्रदूषण की घटना प्राचीनकाल में भी …

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लोक व्यय अर्थव्यवस्था के किन-किन क्षेत्रों को प्रभावित करता है?

इसमें आप लोक व्यय के अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों से परिचित हो सकेंगे। जिससे उत्पादन, बृद्धि, वितरण और स्थिरीकरण पर पड़ने वाले प्रभावों को शामिल किया गया है। लोक व्यय का उत्पादन पर अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। प्रत्यक्ष प्रभावों के साथ परोक्ष रूप से भी प्रभावित करता है। बृद्धि को तीव्र …

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प्राकृतिक संसाधन किसे कहते हैं ? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।

प्राकृतिक संसाधनों का तात्पर्य उन से है जो मानव को प्रकृति द्वारा बिना कोई मूल्य चुकाए प्रदान किये जाते हैं । प्राकृतिक संसाधन में भूमि, मिट्टी, जल, वन, खनिज, समुद्री साधन, जलवायु, वर्षा समावेश किया जाता है प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। इन संसाधनों को मनुष्य अपने प्रयत्नों से उत्पन्न नहीं कर सकता। अन्य शब्दों में, प्राकृतिक …

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