औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954

भारत में यद्यपि आज शिक्षा का प्रचार प्रसार बहुत हो चुका है और शिक्षा की दर (Literacy rate) भी बढ़ गया है किन्तु इसके बावजूद अवैज्ञानिक उपचार, तंत्र-मंत्र, जादू-टोने इत्यादि के प्रति लोगों में अन्धविश्वास की कमी नहीं है। ऐसे में लोग तमाम लार्इलाज रोगों के उपचार के लिये ऐसे उपायों पर आसानी से विश्वास कर …

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शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923

यह निर्विवाद है कि देश की एकता और अखण्डता अत्यन्त महत्वपूर्ण चीज होती है और इनकी रक्षा के लिये कोर्इ भी बलिदान दिया जा सकता है। आखिर हमारे देश के वीर सपूत इन्हीं की रक्षा के लिये तो अपना जीवन तक न्योछावर कर सर्वोच्च बलिदान दे देते हैं। ऐसे में यदि कोर्इ सूचना ऐसी हो जिसका …

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परिवार नियोजन का अर्थ, महत्व एवं पद्धतियां

भारत विश्व में पहला देश है जिसने परिवार नियोजन कार्यक्रम को सरकारी स्तर पर अपनाया है भारत सन् 1951 से जनसंख्या को सीमित करने के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बढ़ती हुर्इ जनसंख्या और सीमित साधनों में नियन्त्रण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि जनसंख्या पर नियन्त्रण किया जाए। शाब्दिक रूप …

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कुपोषण के लक्षण, कारण एवं उपाय

कुपोषण पोषण वह स्थिति है जिसमें भोज्य पदार्थ के गुण और परिणाम में अपर्याप्त होती है। आवश्यकता से अधिक उपयोग द्वारा हानिकारक प्रभाव शरीर में उत्पन्न होने लगता है तथा बाहृा रूप से भी उसका कुप्रभाव प्रदर्शित हो जाता है। जब व्यक्ति का शारीरिक मानसिक विकास असामान्य हो तथा वह अस्वस्थ महसूस करे या न भी …

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सन्तुलित आहार की परिभाषा

‘‘यह आहार सन्तुलित होता है। जिसमें सभी आहार वर्ग जैसे ऊर्जा देने वाला आहार, शरीर संवर्धन करने वाला आहार और सुरक्षातमक आहार उचित परिणाम में हों। जिससे कि व्यक्ति को सभी पोषक तत्व न्यूनतम मात्रा में प्राप्त हो जाये।’’ C.Gopalan सन्तुलित आहार वह है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थों को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में …

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आहार एवं पोषण का अर्थ, परिभाषा

जीवधारियों को जैविक कार्यो के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा भोज्य पदार्थो के जैव-रासायनिक आक्सीकरण से प्राप्त होता है। सम्पूर्ण प्रक्रिया को जिसके अन्तर्गत जीवधारियों द्वारा बाह्य वातावरण से भोजन ग्रहण करके उसे कोशिका में ऊर्जा उत्पादन करने या जीवद्रव्य में स्वांगीकृत करके मरम्मत या वृद्धि में प्रयुक्त करता है; पोषण कहते है। पोषण …

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जन स्वास्थ्य की अवधारणा

मनुष्य के जीवन और उसकी खुशी के लिए स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण किसी अन्य वस्तु की कल्पना कर पाना कठिन है क्योंकि स्वास्थ्य मानव जीवन की एक अनमोल सम्पत्ति है मानव जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकारते हुए संविधान में इसे राज्य सूची में शामिल किया गया है। यहाँ राज्य का यह दायित्व है कि …

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मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936

प्रारंभ में यह अधिनियम कारखानों और रेलवे-प्रशासन में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के साथ लागू था, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमाह से अधिक नही थी। बाद में इसे कर्इ अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा नियोजनों में लागू किया गया। इनमें मुख्य हैं –(1) ट्राम पथ सेवा या मोटर परिवहन-सेवा,(2) संघ की सेना या वायुसेना या भारत …

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सामुदायिक विकास का अर्थ, परिभाषा

शाब्दिक रूप से सामुदायिक विकास का अर्थ- समुदाय का विकास या प्रगति। इसके पश्चात भी सामुदायिक विकास की अवधारणा इतनी व्यापक और जटिल है कि इसे केवल परिभाषा द्वारा ही स्पष्ट कर सकना बहुत कठिन है। जो परिभाषा दी गयी है, उनमें किसी के द्वारा एक पहलू पर अधिक जोर दिया गया है और किसी में …

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महिलाओं से संबंधित कानून

महिलाओं से संबंधित कानून 1. मातृत्व लाभ अधिनियम (1961) – यह अधिनियम पूरे भारत वर्ष में महिला कर्मचारियों पर लागू होता है। यह अधिनिमय अधिकतम 12 सप्ताह का अवकाश उन महिलाओं को प्रदान करता है जो मातृत्व सुख प्राप्त करती है। यह लाभ प्राप्त करने वाली महिला माँ बनने के दिन के ठीक पहले 6 सप्ताह तथा …

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