मानव शक्ति नियोजन का अर्थ एवं महत्व

इस वाक्य से स्पष्ट है कि मानव संसाधन नियोजन एक फर्म या संगठन की भावी भागों के लिए पूर्वानुमान की एक प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया द्वारा योग्य व कुशल व्यक्तियों की सही संख्या में आपूर्ति की जाती है। इस पूर्वानुमान प्रक्रिया की बाद ही HRM विभाग चयन व भरती की क्रिया प्रारम्भ कर सकता है। …

Read more

राष्ट्रीयता में बाधक तत्व

किसी भी राष्ट्र के नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना उस राष्ट्र के लिये प्राण वायु के समान है। क्योंकि राष्ट्र किसी भूमि से नहीं किसी निश्चित भूभाग में रहने वाले एक समान सोच वाले लोगों से बनती है, जिसे सभी लोग मिलकर एक राष्ट्र का नाम देते हैं। परन्तु कुछ निश्चित तत्व राष्ट्रीयता के विकास में …

Read more

अनुशासन का अर्थ एवं परिभाषा

अनुशासन शब्द अंग्रेजी के ‘डिसीप्लीन’ शब्द का पर्याय है कि जो कि ‘डिसाइपल’ शब्द से बना है। जिसका अर्थ है- ‘शिष्य’’ शिष्य से आाज्ञानुसरण की अपेक्षा की जाती है। हिन्दी ने संस्कृत की ‘शास्’ धातु से यह शब्द बना है। इसका अभिप्राय है नियमों का पालन, आज्ञानुसरण नियंत्रण। शाब्दिक अर्थ की दृष्टि से अनुशासन की प्रक्रिया …

Read more

अस्तित्ववाद (शिक्षा दर्शन)

अस्तित्ववाद बीसवी शताब्दी का नया दर्शन है। जहाँ विज्ञान और भौतिकवादी प्रवाह ने मनुष्य के अस्तित्व को ही मूल्यविहीन किया वही लोकतंत्रात्मक व समाजवादी राजनैतिक विचारधाराओं ने व्यक्ति के अस्तित्व से उपर समाज के अस्तित्व पर मुख्य चिन्ह लगा दिया तो मानव अस्तित्व को महत्व देने हेतु नयी दार्शनिक प्रवृत्ति का प्रादुर्भाव हुआ। इस विचारधारा ने …

Read more

प्रयोजनवाद क्या है ?

प्रयोजनवाद के लिये अंग्रेजी का शब्द ‘‘प्रैग्मेटिज्म’’ है। इस शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द प्रैग्मा से हुयी जिसका अर्थ है किया गया कार्य, व्यवसाय, प्रभावपूर्ण कार्य। कुछ विद्वानों ने इस शब्द की उत्पत्ति दूसरे यूनानी शब्द ‘‘प्रेग्मिटिकोस’’ से बताया है, जिसका अर्थ है प्रौक्टिकेबल अर्थात् व्यावहारिक इसके अनुसार प्रैग्मैटिज्म का अर्थ है व्यवहारिकता। इस दृष्टि से …

Read more

आदर्शवाद क्या है ?

आदर्शवाद अंग्रेजी के आइडियलिज्म का शाब्दिक अर्थ है। यह दर्शन की एक शाखा के लिये प्रयुक्त होता है। इस दर्शन में उच्च आदर्शों की बात की जाती है। इस दर्शन से सम्बंधित दार्शनिक विचार की चिरन्तन सत्ता में विश्वास करते हैं, अत: मूलत: यह दर्शन ‘‘विचारवादी दर्शन अथवा आइडियालिज्म’’ है। हिन्दी में उसका शब्दत: अनुवाद उभर …

Read more

प्रकृतिवाद (शिक्षा दर्शन)

प्रकृतिवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि दर्शन का आरम्भ आश्चर्य है। प्रकृति आश्चर्यमयी है। उसके भौतिक तत्व ने ही मनुष्य केा चिन्तन की प्रेरणा दी, अत: आरम्भ में हमें प्रकृति सम्बंधी विचार ही मिलते हैं। थेलीस ने जगत का मूल कारण जल बताया। एनेक्सी मैडम ने आध् ाार तत्व वायु को माना है। हैरेक्लाइट्स ने अग्नि को वास्तविकता …

Read more

विशिष्ट बालकों की शिक्षा

विशिष्ट बालक का अर्थ – विशिष्ट बालको को जानने से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि सामान्य बालक किसे कहते है। विद्यालय में हर समाज, हर वर्ग तथा भिन्न-भिन्न परिवारो से बालक आते है ये सभी विभिन्न होते हुये भी सामान्य कहलाते है। परन्तु कुछ ऐसे भी होते है तो शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक एवं सामाजिक गुणो …

Read more

जनतंत्र का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

आधुनिक युग जनतंत्र व्यवस्था का युग है। जनतांत्रिक शासन व्यवस्था सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। वर्तमान जनतंत्र साम्राज्यवादी प्रशासन के पश्चात् आया जबकि सम्पूर्ण विश्व औद्योगिक एवं भूमण्डलीकरण के प्रभाव में आया तो मनुष्य के अस्तित्व व अधिकारों में सर्वोच्चता आयी और विभिन्न देशों ने जनतंत्र शासन व्यवस्था को सहृदय होकर स्वीकारा। वैसे यह भी सत्य है …

Read more

स्वतंत्रता का अर्थ

व्यक्ति या कोर्इ भी सजीव प्राणी जीवन मेंं जो भी करता है या सोचता है उसमें अपनी इच्छा को ही प्रमुख मानता है। व्यक्ति अपनी इच्छा को किसी के अधीन नहीं रखना चाहता है और अपनी स्वतंत्र क्रियाओं में बाधा उसकी मनोवृत्ति एवं उपलब्धि को प्रभावित करती है और मनुष्य की स्वतंत्रता उसकी मनोवृत्ति से सम्बंधित …

Read more