कर्नाटक का युद्ध (प्रथम, द्वितीय, तृतीय)

कर्नाटक का प्रथम युद्ध (1744 र्इ. से 1748 र्इ.) 1740 र्इ. में यूरोप में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार-युद्ध में एक और फ्रांस और दूसरी और ब्रिटेन था अत: दोनों के मध्य यूरोप में युद्ध प्रारम्भ हो गया। इस युद्ध के प्रतिक्रियास्वरूप भारत में भी ब्रिटिश और फ्रेंच कंपनियां परस्पर एक-दूसरे के विरुद्ध रण क्षेत्र में आ गर्इं। …

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आहार के कार्य

आहार के संबंध में आपने अब तक जितना अध्ययन किया है, उससे आप इस बात का अनुमान तो आसानी से लगा सकते हैं कि आहार का कार्यक्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है अर्थात् आहार के कार्यों का दायरा केवल शरीर तक ही सीमित नहीं है, वरन् यह प्राणी के समग्र विकास में सहायक है।  आहार के प्रमुख कार्य …

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लखनऊ समझौता क्या है ?

1913 र्इ. में मुस्लिम लीग पर राष्ट्रवादी मुसलमानो का प्रभाव अत्यन्त प्रबल हो गया। इसी वर्ष लीग ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसके अनुसार लीग का उदेश्य औपनिवेशिक राज्य की प्राप्ति निश्चित हुआ। 1914 र्इ. में लीग ने भारत के अन्य जातियों के राजनीतिक नेताओं से मिलकर काम करने का निश्चय किया। काँग्रेस एवं लीग को …

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उग्रवादी तथा क्रांतिकारी आन्दोलन (1906-1919 र्इ.)

उग्रवाद के उदय के कारण 1. राजनीतिक कारण –  सरकार द्वारा कांग्रेस की मांगों की उपेक्षा करना – 1892 र्इ. के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा जो भी सुधार किये गये थे, अपर्याप्त एवं निराशाजनक थे। लाला लाजपत राय ने कहा , ‘भारतीयों को अब भिखारी बने रहने में ही संतोष नहीं करना चाहिए और न उन्हें अंग्रेजों …

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महारानी विक्टोरिया की घोषणा तथा 1858 का अधिनियम

1 नवम्बर, 1858 र्इ0 को ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया ने एक घोषणा की जिसे भारत के प्रत्येक शहर में पढ़कर सुनाया गयां इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने उन मुख्य सिद्धान्तों का विवरण दिया जिसके आधार पर भारत का भविष्य का शासन निर्भर करता था। इस घोषणा का कोर्इ कानूनी आधार न था क्योंकि इसे ब्रिटिश …

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रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था  यह व्यवस्था 1792 र्इ. में मद्रास पे्रसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गर्इ। थॉमस मुनरो 1820 र्इ. से 1827 र्इ. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद कैप्टन मुनरो ने इसे 1820 र्इ. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया। इसके तहत कंपनी तथा रैयतों (किसानो) …

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स्थायी बंदोबस्त क्या है ?

ब्रिटिश कंपनी (र्इस्ट इण्डिया कंपनी) द्वारा बंगाल में 1793 र्इ. में इस्तमरारी (स्थायी) बन्दोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत कंपनी द्वारा निश्चित की गर्इ राशि को प्रत्येक जमींदार द्वारा रैयतों से एकत्रित कर जमा करनी होती थी। गाँव से राजस्व एकत्रित करने का कार्य जमींदार द्वारा नियुक्त अधिकारी ‘अमला’ किया करता था। यदि जमींदार राजस्व …

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1857 का विद्रोह : स्वरूप, कारण एवं परिणाम

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भारतीयों द्वारा स्वत्रतंता प्राप्ति के लिए किये गये संग्राम का इतिहास है। यह संग्राम ब्रिटिश सत्ता की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए भारतीयों द्वारा संचालित एवं संगठित आंदोलन है। विद्रोह का स्वरूप भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम 1857 र्इ. में ब्रिटिश सत्ता के विरूद्ध भारतीयों द्वारा पहली बार संगठित एवं हथियार बंद …

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लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति

1848 र्इ. से 1856 र्इ. का काल ब्रिटिश कालीन भारत के इतिहास में अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। इस काल में लॉर्ड डलहौजी भारत का गवर्नर जनरल रहा। वह बहुत ही सक्रिय प्रशासक था, उसने युद्धों और कूटनीतियों से भारतीय राज्यों पर अधिकार करके भारत में ब्रिटिश कंपनी के साम्राज्य का विस्तार किया। डलहौजी साम्राज्यवादी विचारों …

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आंग्ल-बर्मा सम्बन्ध

बर्मा में कंपनी की प्रारंभिक गतिविधियाँ भारत के पूर्व में बर्मा देश है जिसे म्यान्मार भी कहा जाता है। भारतीय साम्राज्य की रक्षा के लिए स्वाभाविक था कि कांग्रेस पूर्वी सीमा की भी रक्षा करे। मुगल सम्राटों ने आसाम के कुछ भागों को जीतकर अपने साम्राज्य में शामिल किया था। बंगाल पर अधिकार करने के बाद …

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