मोटापा के कारण, लक्षण एवं वैकल्पिक चिकित्सा

आज नि:संदेह मोटापा विश्व के अनेक देशों मे सर्वव्यापी समस्या के रूप में चिकित्सा विज्ञान के लिए बन गया है। मोटापा बढ़ने के साथ – साथ यह अनेक रोगों को जन्म देता है। यह शारीरिक अंगों की कुशलता को कम कर उनके कार्यो को प्रभावित करता है। मोटापे से अनेक रोग उत्पन्न होते है। जैसे – …

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अम्ल पित्त – कारण, लक्षण एवं वैकल्पिक चिकित्सा

अम्ल पित्त रोग से आशय – सर्वप्रथम् यह जानना आवश्यक है कि अम्ल पित्त है क्या है ? आयुर्वेद में कहा गया है- अम्लं विदग्धं च तत्पित्तं अम्लपित्तम्। जब पित्त कुपित होकर अर्थात् विदग्ध होकर अम्ल के समान हो जाता है, तो उसे अम्ल पित्त रोग की संज्ञा दी जाती है। पित्त को अग्नि कहा जाता …

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रॉलेक्ट एक्ट क्या है ?

प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों ने अंगरेजी साम्राज्य की सुरक्षा के लिए बहुत अधिक सहयागे किया। उन्हें यह उम्मीद थी कि युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगी। लेकिन सरकार की भारतीयों को स्वायत्तता देने की कोर्इ इच्छा नहीं थी। वह तो देश में फैल रही राष्ट्रीयता एवं …

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लखनऊ समझौता क्या है ?

1913 र्इ. में मुस्लिम लीग पर राष्ट्रवादी मुसलमानो का प्रभाव अत्यन्त प्रबल हो गया। इसी वर्ष लीग ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसके अनुसार लीग का उदेश्य औपनिवेशिक राज्य की प्राप्ति निश्चित हुआ। 1914 र्इ. में लीग ने भारत के अन्य जातियों के राजनीतिक नेताओं से मिलकर काम करने का निश्चय किया। काँग्रेस एवं लीग को …

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उग्रवादी तथा क्रांतिकारी आन्दोलन (1906-1919 र्इ.)

उग्रवाद के उदय के कारण 1. राजनीतिक कारण –  सरकार द्वारा कांग्रेस की मांगों की उपेक्षा करना – 1892 र्इ. के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा जो भी सुधार किये गये थे, अपर्याप्त एवं निराशाजनक थे। लाला लाजपत राय ने कहा , ‘भारतीयों को अब भिखारी बने रहने में ही संतोष नहीं करना चाहिए और न उन्हें अंग्रेजों …

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स्वदेशी आन्दोलन क्या है ?

स्वदेशी आन्दोलन बंगाल – विभाजन आंदोलन अंतत: स्वदेशी आंदोलन में परिणत हो गयां बंगालियों ने महसूस किया कि संवैधानिक आंदोलन अर्थात् जनसभाओं में भाषण देना, प्रेस द्वारा प्रचार, निवेदन, आवेदन-पत्र एवं सम्मेलन आदि बेकार है। ब्रिटिश सरकार का विरोध बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन द्वारा किया जाना चाहिए। बहिष्कार के मलू में आर्थिक अवधारणा हैं इसके दो …

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लार्ड कर्जन के सुधार

कर्जन के आंतरिक प्रशासनिक सुधार- लार्ड कर्जन ने जनवरी,1899 र्इ. में भारत के वायसराय का पद ग्रहण किया। लार्ड कर्जन एक योग्य शासक था। उसके द्वारा किये गये भारतीय समस्याओं से संबंधित आंतरिक प्रशासनिक सुधार इस प्रकार है :- 1. दुर्भिक्ष एवं महामारी की रोकथाम –  लार्ड कर्जन ने बडे धैर्य से इनका सामना किया। उसने …

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बंगाल विभाजन (1905 र्इ.)

भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बंगाल विभाजन का एक विशिष्ट स्थान है। बंगाल प्रान्त के अन्तर्गत खास बंगाल, बिहार, उड़ीसा, तथा छोटा नागपुर थे।इस विशाल प्रान्त से सरकार को प्रतिवर्ष ग्यारह करोड़ रूपये से भी अधिक का राजस्व प्राप्त होता था। सरकार का विचार था कि इतने बड़ा प्रान्त पर एक व्यक्ति का शासन …

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रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था  यह व्यवस्था 1792 र्इ. में मद्रास पे्रसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गर्इ। थॉमस मुनरो 1820 र्इ. से 1827 र्इ. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद कैप्टन मुनरो ने इसे 1820 र्इ. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया। इसके तहत कंपनी तथा रैयतों (किसानो) …

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स्थायी बंदोबस्त क्या है ?

ब्रिटिश कंपनी (र्इस्ट इण्डिया कंपनी) द्वारा बंगाल में 1793 र्इ. में इस्तमरारी (स्थायी) बन्दोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत कंपनी द्वारा निश्चित की गर्इ राशि को प्रत्येक जमींदार द्वारा रैयतों से एकत्रित कर जमा करनी होती थी। गाँव से राजस्व एकत्रित करने का कार्य जमींदार द्वारा नियुक्त अधिकारी ‘अमला’ किया करता था। यदि जमींदार राजस्व …

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