संसद का गठन

संसद का गठन  संविधान के अनुच्छेद 79 में संसद के गठन के लिए उपबंध किया गया है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोक सभा होंगे। इस प्रकार संसद के तीन अंग हैं- (1) राष्ट्रपति, (2) …

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उपराष्ट्रपति का निर्वाचन, कार्यकाल एवं शक्तियां

भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोर्इ लाभ का पद धारण नहीं करेगा। राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से उसके पद में हुर्इ रिक्ति की दशा में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि निर्वाचित नया …

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राष्ट्रपति का निर्वाचन, कार्यकाल एवं शक्तियां

भारत का राष्ट्रपति  संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। संघ की कार्यपालिका शक्ति इसी में निहित की गर्इ है। अनुच्छेद 53 में उपबन्ध किया गया है कि- संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान के उपबन्धों के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा …

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चुनाव आयोग का गठन, कार्य एवं प्रक्रिया

चुनाव आयोग का गठन  इसकी शुरुआत उद्देशिका से ही हो जाती है भारतीय संविधान की उद्देशिका यह उद्घोशित करती है कि भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य है। लोकतन्त्र भारतीय संविधान का एक मूलभूत ढ़ँाचा है। किसी भी प्रजातान्त्रिक व्यवस्था वाले देश के लिए चुनाव एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। चुनाव द्वारा न केवल जन …

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भारत सरकार अधिनियम 1919

सन 1919 में जलियावाला बाग की दुर्घटना के विरोध में दिल्ली, लाहौर आदि स्थानों में उपद्रव हुए और पंजाब के कुछ भागों में फौजी शासन लगा दिया गया। नेताओं की गिरफ्तारी से असंतोष की अग्नि और भडक उठीं इस तूफान तथा विपत्ति के वातावरण में 1918 की रिपाटेर् में की गर्इ शिफारिशों से युक्त एक बिल …

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रॉलेक्ट एक्ट क्या है ?

प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों ने अंगरेजी साम्राज्य की सुरक्षा के लिए बहुत अधिक सहयागे किया। उन्हें यह उम्मीद थी कि युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगी। लेकिन सरकार की भारतीयों को स्वायत्तता देने की कोर्इ इच्छा नहीं थी। वह तो देश में फैल रही राष्ट्रीयता एवं …

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लखनऊ समझौता क्या है ?

1913 र्इ. में मुस्लिम लीग पर राष्ट्रवादी मुसलमानो का प्रभाव अत्यन्त प्रबल हो गया। इसी वर्ष लीग ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसके अनुसार लीग का उदेश्य औपनिवेशिक राज्य की प्राप्ति निश्चित हुआ। 1914 र्इ. में लीग ने भारत के अन्य जातियों के राजनीतिक नेताओं से मिलकर काम करने का निश्चय किया। काँग्रेस एवं लीग को …

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उग्रवादी तथा क्रांतिकारी आन्दोलन (1906-1919 र्इ.)

उग्रवाद के उदय के कारण 1. राजनीतिक कारण –  सरकार द्वारा कांग्रेस की मांगों की उपेक्षा करना – 1892 र्इ. के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा जो भी सुधार किये गये थे, अपर्याप्त एवं निराशाजनक थे। लाला लाजपत राय ने कहा , ‘भारतीयों को अब भिखारी बने रहने में ही संतोष नहीं करना चाहिए और न उन्हें अंग्रेजों …

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स्वदेशी आन्दोलन क्या है ?

स्वदेशी आन्दोलन बंगाल – विभाजन आंदोलन अंतत: स्वदेशी आंदोलन में परिणत हो गयां बंगालियों ने महसूस किया कि संवैधानिक आंदोलन अर्थात् जनसभाओं में भाषण देना, प्रेस द्वारा प्रचार, निवेदन, आवेदन-पत्र एवं सम्मेलन आदि बेकार है। ब्रिटिश सरकार का विरोध बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन द्वारा किया जाना चाहिए। बहिष्कार के मलू में आर्थिक अवधारणा हैं इसके दो …

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लार्ड कर्जन के सुधार

कर्जन के आंतरिक प्रशासनिक सुधार- लार्ड कर्जन ने जनवरी,1899 र्इ. में भारत के वायसराय का पद ग्रहण किया। लार्ड कर्जन एक योग्य शासक था। उसके द्वारा किये गये भारतीय समस्याओं से संबंधित आंतरिक प्रशासनिक सुधार इस प्रकार है :- 1. दुर्भिक्ष एवं महामारी की रोकथाम –  लार्ड कर्जन ने बडे धैर्य से इनका सामना किया। उसने …

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