शीत युद्ध के कारण और इसके प्रभाव

शीत युद्ध के कारण द्वितीय विश्व युद्ध में, सोवियत संघ, अमेरिका , इग्लैण्ड एवं फ्रांस, धुरी राष्ट्रों- जर्मनी, इटली एवं जापान के विरूद्ध, एक साथ थे। परंतु सोवियत सघ एवं इन तीन राष्ट्रों में वैचारिक मतभेद था- साम्यवाद एवं पूंजीवाद। अत: ये चार राष्ट्र, मजबूर होकर एक साथ थे, पर अन्दर ही अन्दर, वैचारिक मतभेद के …

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रूसी क्रांति 1917

क्रांति के कारण :  1917 की रूसी क्रांति के लिए जो परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं, उनका ब्यौरा है- (1) औद्योगिक क्रांति :  19वीं शदी के उत्तरार्द्ध में रूस में औद्योगिक क्रांति का श्रीगणेश हुआ । जिसके परिणामस्वरूप रूस में कर्इ औद्योगिक केन्द्र स्थापित हुए । इन औद्योगिक कारखानों में लाखों की संख्या में ग्रामीण मजदूर आकर कार्यरत …

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रूसी क्रांति 1905

क्रांति का तात्पर्य –  क्रांति का अर्थ मात्र रक्तपात नहीं है, बल्कि अत्यन्त शीघ्रता के साथ होने वाले आमूल परिवर्तन को क्रांति कहा जाता है । एक रूसी विद्वान ने कहा है कि क्रांति उस समय होती है, जब उसके पीछे कोर्इ सामाजिक माँग होती है । क्रांति के सम्बंध में लार्ड मैकाले का कथन है …

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साम्राज्यवाद का अर्थ

साम्राज्यवाद के अर्थ को समझना आसान नही है। अलग-अलग विद्वानों ने अनेकों तरह से इसके सार को समझानें की कोशिश कर इसे काफी कठिन कर दिया है। फिर भी इसके अर्थ को सरल भाषा में कहें तो वह, यह है कि, पूंजीवाद जब अपने विकास के चर्मोत्कर्ष पर पहुंच जाता है तो, वह साम्राज्यवाद में परिवर्तित …

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पूंजीवाद का अर्थ एवं उत्पत्ति

पूंजीवाद का अर्थ –  पूंजीवाद शब्द उस सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था के लिए प्रयोग होता है जिसमें कि अधिकांश विश्व आज रह रहा है। यह आम तौर से धारणा रही है कि, यदि हमेशा नहीं तो यह मानव इतिहास में अधिकांश समय रहा है। पर यह सत्य है कि, पूंजीवाद अभी कुछ शताब्दियों से ही विश्व में …

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राष्ट्रवाद का अर्थ

राष्ट्रवाद का अर्थ –  राष्ट्रवाद (NATION) राष्ट्र का जन्म लेटिन भाषा शब्द नेशों से हुआ है, जो सामूहिक जन्म अथवा वंश के भाव को व्यक्त करता है, परंतु आधुनिक काल में इसका अर्थ राष्ट्रीयता (NATIONALITY) शब्द का समरूपी होने पर ‘राष्ट्र’ शब्द किसी राष्ट्रीयता की सामान्य राजनीतिक चेतना का घोतक है जो, ए. जिम्मर्न के अनुसार …

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की विशेषताएं

संयुक्त राष्ट्र संध ने शिक्षा के अधिकार को ‘मानवाधिकार’ की मान्यता प्रदान की है। शिक्षा के अधिकार को मानवाविधार के सार्वभौमिक घोशणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) के अनुच्छेद 26 में, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अन्तराष्ट्रीय प्रसंविदा की धारा 14 में स्थान दिया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के यूनेस्को एवं अन्य अंग शिक्षा के …

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संसद का गठन

संसद का गठन  संविधान के अनुच्छेद 79 में संसद के गठन के लिए उपबंध किया गया है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोक सभा होंगे। इस प्रकार संसद के तीन अंग हैं- (1) राष्ट्रपति, (2) …

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उपराष्ट्रपति का निर्वाचन, कार्यकाल एवं शक्तियां

भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोर्इ लाभ का पद धारण नहीं करेगा। राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से उसके पद में हुर्इ रिक्ति की दशा में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि निर्वाचित नया …

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राष्ट्रपति का निर्वाचन, कार्यकाल एवं शक्तियां

भारत का राष्ट्रपति  संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। संघ की कार्यपालिका शक्ति इसी में निहित की गर्इ है। अनुच्छेद 53 में उपबन्ध किया गया है कि- संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान के उपबन्धों के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा …

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