मृदा अपरदन क्या है ?

मृदा को अपने स्थान से विविध रासायनिक, भौतिक एवं जैविक क्रियाओं द्वारा हटाया जाना मृदा अपरदन कहलाता हैं। मृदा अपरदन से मृदा की अनेक समस्यायें उतपन्न हो जाती हैं। उर्वरा शक्ति का ह्रास, नाइट्रोजन की कमी, अत्याधिक पशुचारण, अम्लीय क्षारीय जल का बढ़ना, कॉस खरपतवार का बढ़ना एवं मरूस्थलीय रेत का प्रसार आदि मुख्य हैं। मृदा …

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अपक्षय क्या है ?

अपक्षय एक स्थानीय प्रक्रिया हैं, इसमें शैलो का विघटन और अपघटन मूल स्थान पर ही होता है विघटन तापमान में परिवर्तन और पाले के प्रभाव से होता हैं। इस प्रक्रिया में शैल टुकड़ों में बिखर जाते हैं अपघटन की प्रक्रिया में शैलों के अन्दर रासायनिक परिवर्तन होते है शैलों में विभिन्न प्रकार के खनिज कण एक …

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शैल के प्रकार एवं आर्थिक महत्व

शैल के प्रकार शैल अपने निर्माण की क्रिया द्वारा तीन प्रकार की होती है- आग्नेय शैल  अवसादी शैल  रूपान्तरिंत शैल 1. आग्नेय शैल आग्नेय शैल जैसा कि नाम से ही स्पष्ठ है कि इस शैल की उत्पत्ति अग्नि से हुर्इ होगी इसी आधार पर इसका नाम आग्नेय शैल रखा गया है यह अति तप्त चट्टानी तरल …

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भूगोल का अर्थ, परिभाषा एवं अध्ययन विधियां

भूगोल का अर्थ – भूगोल दो शब्दों से मिलकर बना है- भू + गोल हिन्दी में ‘भू’ का अर्थ है पृथ्वी और ‘गोल’ का अर्थ गोलाकार स्वरूप। अंग्रेजी में इसे Geography कहते हैं जो दो यूनानी शब्दों Geo (पृथ्वीं) और graphy (वर्णन करना) से मिलकर बना है। भूगोल का शाब्दिक अर्थ ‘‘वह विषय जो पृथ्वी का …

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प्रकाश संश्लेषण क्या है ?

प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइआक्साइड के संयोग से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं तथा इस प्रक्रिया में उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है। 6CO6 + 12H2O === C6H12O6 + 6H2O + CO2 प्रकश संश्लेषण में CO2 का स्थिरीकरण (अथवा अपचयन) कार्बोहाइड्रेटस (ग्लूकोज C6H12O6 ) …

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ऊतक क्या है ?

विभिन्न अंग जैसे कि पौधो के तने जड़ों और प्राणियों के अमाशय हृदय और फेफड़े विभिन्न प्रकार के ऊतको के बने होते है। ऊतक ऐसी कोशिकाओं का एक समूह होता है। जिसका उद्भव सरंचना और कार्य समान हाते हैं। इनके सामान्य उद्भव का अर्थ हैं कि वे भ्रूण में कोशिकाओं के एक ही स्तर से व्युत्पन्न …

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कोशिका संरचना एवं कार्य

सभी जीव जीवन की संरचनात्मक व कार्यात्मक इकाइयों से मिलकर बनते हैं जिन्हें कोशिकाए कहा जाता हैं। कुछ प्राणी जैसे प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया व कछु शैवाल एक ही कोशिका के बने होते हैं जबकि कवक, पौधे और जंतु अनेक कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं। मानव शरीर लगभग एक ट्रिलियन (108) कोशिकाओं से मिलकर बना हैं। कोशिकाओं …

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जगत मोनेरा, प्रोटिस्टा व फंजाई

जगत् मोनेरा जिसके अंतर्गत सभी बैक्टीरिया आते है और जगत प्रोटिस्टा जिसके अंतर्गत प्रोटोजोआ, डायटम और कुछ शैवाल आते हैं एक प्रकार से जीव जगत् में सबसे नीचे के वर्ग हैं। सभी बैक्टीरिया और अधिकांश प्रोटिस्टा और कर्इ कवक-सुक्ष्मदश्री होते हैं और इसीलिए इन्हें सामान्यत: सूक्ष्मजीव कहते है। जगत-मोनेरा- – जगत मोनेरा के अन्तर्गत सभी प्रोकेरियॉटिक, …

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क्रियायोग क्या है ?

महर्षि पतंजलि ने मध्यम कोटि के साधकों की चित्तशुद्धि के लिए क्रियायोग का उपदेश दिया है। यहाँ पर पाठकों के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि साधक से क्या तात्पर्य है। बी.के.एस. आयंगर के अनुसार ‘‘साधक वह है जो अपने मन व बुद्धि को लगाकर क्षमतापूर्वक, समर्पण भाव से व एकचित्त होकर साधना करता …

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पतंजलि योग सूत्र का परिचय एवं परिभाषा

योग सूत्र का परिचय आप जानते होंगे कि भारत में बहुत से सूत्र ग्रन्थ लिखे गए, जिनमें सार-रूप में बहुत सी जानकारियाँ उपलब्ध होती हैं। इन ग्रन्थों की अपनी एक परम्परा है। योग सूत्र भी इन्हीं सूत्र ग्रन्थ परम्परा का एक हिस्सा है। जिसमें योग परक विभिन्न दार्शनिक सिद्धान्तों को सार रूप में प्रस्तुत करने का …

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