आसन क्या है ?

स्थिर और सुखकर शारीरिक स्थिति मानसिक संतुलन लाती है और मन की चंचलता को रोकती है। आसनो की प्रारंभिक स्थिति में अनेक प्रकारान्तरों के द्वारा अपने शरीर को अन्तिम स्थिति के अभ्यास के लिए तैयार किया जाता है। महर्षि घेरण्ड, घेरण्ड संहिता में आसनों के सन्दर्भ में बताते हैं कि इस संसार में जितने जीव-जंतु हैं, …

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क्रियायोग क्या है ?

महर्षि पतंजलि ने मध्यम कोटि के साधकों की चित्तशुद्धि के लिए क्रियायोग का उपदेश दिया है। यहाँ पर पाठकों के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि साधक से क्या तात्पर्य है। बी.के.एस. आयंगर के अनुसार ‘‘साधक वह है जो अपने मन व बुद्धि को लगाकर क्षमतापूर्वक, समर्पण भाव से व एकचित्त होकर साधना करता …

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पतंजलि योग सूत्र का परिचय एवं परिभाषा

योग सूत्र का परिचय आप जानते होंगे कि भारत में बहुत से सूत्र ग्रन्थ लिखे गए, जिनमें सार-रूप में बहुत सी जानकारियाँ उपलब्ध होती हैं। इन ग्रन्थों की अपनी एक परम्परा है। योग सूत्र भी इन्हीं सूत्र ग्रन्थ परम्परा का एक हिस्सा है। जिसमें योग परक विभिन्न दार्शनिक सिद्धान्तों को सार रूप में प्रस्तुत करने का …

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ईश्वर क्या है ?

शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से र्इश्वर शब्द र्इश धातु में वरच् प्रत्यय लगाकर बना है जिसका अर्थ है ऐश्वर्य युक्त, समर्थ, शक्तिशाली, स्वामी, प्रभु, मालिक, राजा, शासक आदि। हिन्दी संस्कृत कोश के अनुसार र्इश्वर शब्द का प्रयोग परमेश्वर, जगदीश्वर, परमात्मन, परमेश, स्वामी, शिव आदि अनेक रूपों में किया गया है। ऋग्वेद में र्इश धातु का प्रयोग …

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श्री अरविन्द का जीवन-दर्शन एवं शिक्षा-दर्शन

जीवन-दर्शन  श्री अरविन्द ने योग दर्शन के महत्व को रेखांकित करते हुए आधुनिक परिवेश के अनुरूप उसकी पुनव्र्याख्या की। उनके दर्शन को अनुभवातीत सर्वांग योग दर्शन के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने अपने विचार को योग की संकुचित व्याख्या तक सीमित रखने की जगह सत्य तक पहुँचने के लिए विभिन्न मार्गों को समन्वित रूप …

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आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय

शंकराचार्य का जन्म 788 र्इ0 में केरल प्रदेश के ‘कालदी’ नामक ग्राम में नम्बूद्री ब्राह्मण परिवार में हुआ था। कालदी ग्राम मालाबार में पेरियार नदी के किनारे वन क्षेत्र में स्थित है। कालदी में विद्याधिराज नामक एक प्रसिद्ध विद्वान थे। उनका पुत्र शिवगुरू था। यह परिवार परम्परागत रूप से शंकर का उपासक था। इन्हीं शिवगुरू के …

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मंत्र योग क्या है ?

शास्त्रों के अनुसार अनेक प्रकार के योग बताए गये हैं, इन सभी योग की साधना सबसे सरल और सुगम है। मंत्र योग की साधना कोर्इ श्रद्धा पूर्वक व निर्भयता पूर्वक कर सकता है। श्रद्धापूर्वक की गयी साधना से शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर अभीष्ट की प्राप्ति की जा सकती है। अपने लक्ष्य को मंत्र योग द्वारा …

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ज्ञानयोग क्या है ?

यदि हम इस तथ्य पर विचार करें कि यह ज्ञानयोग वस्तुत: है क्या? तो हम कह सकते हैं कि यह ध्यानात्मक सफलता की एक ऐसी प्रक्रिया है, जो हमे अपनी आन्तरिक प्रकृति के अत्यधिक पास लाकर हमारी आत्मिक ऊर्जा का हमें भान कराती है अर्थात स्वयं में छिपी हुर्इ अनंत संभावनाओं का साक्षात्कार कर ब्रह्मा में …

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भक्तियोग क्या है ?

जिज्ञासु पाठको भक्ति शब्द से आप निश्चित परिचित होंगे। आपने-अपने घर के मन्दिर में, उपासना गृहों में तीर्थो में, लोगों को पूजा पाठ करते देखा होगा। भारतीय चिन्तन में ज्ञान तथा कर्म के साथ भक्ति को कैवल्य प्राप्ति का साधन माना है। आपको कुछ प्रश्न अवश्य उत्तर जानने के लिए प्रेरित कर रहे होंगे जैसे भक्ति …

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कर्मयोग क्या है ?

कर्म शब्द कृ धातु से बनता है। कृ धातु में ‘मन’ प्रत्यय लगने से कर्म शब्द की उत्पत्ति होती है। कर्म का अर्थ है क्रिया, व्यापार, भाग्य आदि। हम कह सकते हैं कि जिस कर्म में कर्ता की क्रिया का फल निहित होता है वही कर्म है। कर्म करना मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। तथा कर्म …

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