वेदों का महत्व

वैदिक लोगों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहे थे । पशु-चारण व्यवस्था धीरे-धीरे कृषि अर्थव्यवस्था द्वारा विस्थापित होती जा रही थी, जो नियमित खेती और शिल्प तथा व्यापार के विकास पर आधारित थी । जनजातियों का बटवारा हुआ और वस्तुत: हमें एक सम्पूर्ण वर्ण-व्यवस्था देखने को मिलती है । इस समय में …

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ऋग्वैदिक कालीन सभ्यता और संस्कृति

ऋग्वैदिक काल भारतीय संस्कृति के इतिहास में वेदों का स्थान अत्यन्त गौरवपूर्ण है । वेद भारत की संस्कृति की अमूल्य सम्पदा है । आर्यो के प्राचीनतम ग्रन्थ भी वेद ही है । भारतीय संस्कृति में वेदो का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि हिन्दुओं के आचार विचार, रहन सहन, धर्म कर्म की विस्तृत जानकारी इन्ही वेदो से ही …

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मांग का अर्थ एवं नियम

माँग का अर्थ किसी वस्तु को प्राप्त करने से है। कितुं अर्थशास्त्र में वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा मात्र को माँग नहीं कहते बल्कि अर्थशास्त्र का संबध एक निश्चित मूल्य व निश्चित समय से होता है। माँग के, साथ निश्चित मूल्य व निश्चित समय होता है। प्रो. मेयर्स – “किसी वस्तु की माँग उन मात्राओं …

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व्यष्टि अर्थशास्त्र क्या है ?

अर्थशास्त्र को अध्ययन के दृष्टिकोण से कर्इ भागों में विभक्त किया गया। आधुनिक अर्थशास्त्र का अध्ययन एवं विशलेषण दो शाखाओं के रूप में किया जाता है- प्रथम, व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा द्वितीय समष्टि अर्थशास्त्र । व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत वैयक्तिक इकाइयों जैसे- व्यक्तियों,परिवारों फर्माें उद्योगों एवं अनेक वस्तुओं व सेवाओं की कीमतों इत्यादि का अध्ययन व विश्लेषण …

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ठोस अवस्था क्या है ?

प्रदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें अवयवी कण (अणु, परमाणु आयन आदि।) परस्पर अत्यन्त प्रबल आर्कशण द्वारा जुडे होते है। 1. आकार एवं आयतन निश्चित रहते है 2. घनत्व, गलनांक क्वथनांक के मान उच्च होते है।तथा संपीड़यता, विसरणशीलता लगभग नगंण्य होती है ठोस अवस्था कहलाती है। ठोस के गुण  1. विघुती्य गुण –  ठोसों में विघुती्य …

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द्रव्य की अवस्थाएँ

गैसो की तुलना में द्रव के अणु एक-दूसरे के अधिक समीप होते है। तथा उनमें आकर्षण बल अधिक होता है। इसे नगण्य नही माना जा सकता। ठोसो की तुलना में द्रव में अणुओं का स्थान निश्चित नही होता तथा न ही वे नियमित पैटर्न दिखाते है। अत: द्रव न तो गैसों के समान पूर्णत: अव्यवस्थित है …

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गैसीय अवस्था

पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाएँ होती है-ठोस, द्रव तथा गैस। आधुनिक अनुसन्धानों द्वारा एक अवस्था और ज्ञात की गयी है जिसे प्लाज्मा कहते है। ताप तथा दाब की परिस्थितियों के अनुसार पदार्थ एक समय में किसी एक भौतिक अवस्था में पाया जाता है। इन तीनों अवस्थाओं में कोर्इ सुस्पष्ट सीमांकन रेखा नहीं होती, किसी भी पदार्थ …

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भूगोल का अर्थ, परिभाषा एवं अध्ययन विधियां

भूगोल का अर्थ – भूगोल दो शब्दों से मिलकर बना है- भू + गोल हिन्दी में ‘भू’ का अर्थ है पृथ्वी और ‘गोल’ का अर्थ गोलाकार स्वरूप। अंग्रेजी में इसे Geography कहते हैं जो दो यूनानी शब्दों Geo (पृथ्वीं) और graphy (वर्णन करना) से मिलकर बना है। भूगोल का शाब्दिक अर्थ ‘‘वह विषय जो पृथ्वी का …

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प्रकाश संश्लेषण क्या है ?

प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइआक्साइड के संयोग से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं तथा इस प्रक्रिया में उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है। 6CO6 + 12H2O === C6H12O6 + 6H2O + CO2 प्रकश संश्लेषण में CO2 का स्थिरीकरण (अथवा अपचयन) कार्बोहाइड्रेटस (ग्लूकोज C6H12O6 ) …

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ऊतक क्या है ?

विभिन्न अंग जैसे कि पौधो के तने जड़ों और प्राणियों के अमाशय हृदय और फेफड़े विभिन्न प्रकार के ऊतको के बने होते है। ऊतक ऐसी कोशिकाओं का एक समूह होता है। जिसका उद्भव सरंचना और कार्य समान हाते हैं। इनके सामान्य उद्भव का अर्थ हैं कि वे भ्रूण में कोशिकाओं के एक ही स्तर से व्युत्पन्न …

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