योग का अर्थ, परिभाषा महत्व और उद्देश्य

ज्ञान का मूल वेदों में निहित है। दार्शनिक चिन्तन तथा वैदिक ज्ञान का निचोड आत्म तत्व की प्राप्ति है। आत्मतत्व की प्राप्ति का साधन योग विद्या के रूप में इनमें (वेद) उपलब्ध है। योगसाधना का लक्ष्य कैवल्य प्राप्ति है। वैदिक ग्रन्थ, उपनिषद्, पुराण और दर्शन आदि में यत्र-तत्र योग का वर्णन मिलता है। जिससे यह पुष्टि …

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विपणन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकृति, कार्य और महत्व

विपणन का अर्थ एवं परिभाषाएं प्रारंभिक समय में विपणन से तात्पर्य वस्तुओं के क्रय-विक्रय से था। दूसरे शब्दों में माल को उत्पादक से उपभोक्ता तक पहुंचाने वाली सभी क्रियाओं को विपणन में सम्मिलित किया जाता था। उत्पादन बाहुल्य एवं विविधता के फलस्वरूप विपणन के क्षैत्र में आमूल-चूल परिवर्तन हुए तथा विपणन का केन्द्र बिन्दु उपभोक्ता बन …

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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम

निजी कम्पनियां ऐसे क्षेत्रों में उद्योग लगाने हेतु रूचि नहीं लेते थे जिसमें, भारी पूंजी निवेश हो लाभ कम हो, सगर्भता की अवधि (जेस्टेशन पीरियड) लम्बी हो जैसे-मशीन निर्माण, आधारभूत ढ़ांचा, तेल अन्वेषण आदि इसी तरह निजी उद्यमी उन क्षेत्रों को ही प्राथमिकता देते हैं जहां संसाधन सुलभता से उपलब्ध हों जैस-कच्चे माल, श्रमिक, विद्युत, बाजार …

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परिवहन का अर्थ, महत्व एवं प्रकार

परिवहन का अर्थ वर्तमान अर्थव्यवस्था में परिवहन या यातायात सेवा का अत्यधिक महत्व है। परिवहन सेवाएं आर्थिक सामाजिक एवं राजनैतिक प्रगति की सूचक हैं। आप जानते है कि माल का उत्पादन एक स्थान पर होता है और उपयोग विभिन्न स्थानों पर। आजकल माल का बाजार न केवल प्रदेश और देश वरन पूरे विश्व में फैला हुआ …

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वाणिज्य क्या है ?

वाणिज्य व्यवसाय के दो अंग हैं-  उद्योग और वाणिज्य। उद्योगों का कार्य जहां समाप्त होता है, वहीं वाणिज्य का कार्य आरम्भ होता है। उद्योगों में वस्तुओं का उत्पादन होता है। इन वस्तुओं को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की क्रिया वाणिज्य है। इस प्रकार वाणिज्य के अन्तर्गत उत्पादन स्थल से निर्मित वस्तु प्राप्त करके उपभोक्ता तक पहुंचाने की समस्त …

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व्यावसायिक क्रियाओं का वर्गीकरण

यदि आप अपने आस पास की व्यावसायिक क्रियाओं को देखेंगे तो पायेंगे कि अर्थव्यवस्था में निम्नांकित क्रियाएं होती है- पदार्थो का उत्खनन या निष्कर्षण;  वस्तुओं का विनिर्माण;  एक स्थान से वस्तुए खरीद कर विभिन्न स्थानों में बेचना;  भवन, सड़क एवं पुलों आदि का निर्माण;  वस्तुओं का भण्डारण, परिवहन, बैंिकग, बीमा, विज्ञापन, आदि सेवाएं प्रदान करना;  उपरोक्त …

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भारत की प्रमुख फसलें

चॉवल-  चावॅल भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है। देश की कुल कृषि भूमि के लगभग 30प्रतिशत भाग में इसकी कृषि की जाती है। शीतकालीन को अगहनी अमन ग्रीष्मकालीन (दिसम्बर से अप्रेल) चॉवल के बोरों तथा “ारदकालीन (जून से अक्टूबर) चॉवल को ओस के नाम से जाना जाता हैं। उत्पादन:- चाँवल उत्पादन एंव क्षेत्रफल की दृष्टि से …

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जल संसाधन क्या है ?

जल ही जीवन हैं। यह बात पूर्ण रूप से सत्य हैं। पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य ग्रहों में किसी भी जगह सिर्फ जल का न होना ही वहां का सूनापन हैं। जल का उपयोग पीने के अतिरिक्त कृषि करने, सिंचार्इ करने, कारखानों, जल व़िद्युत निर्माण आदि कार्यो में होता हैं। जल की इसी उपयोगिता एवं महत्व को …

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मृदा संसाधन क्या है ?

मृदा या मिट्टी चट्टानों द्वारा ही निर्मित होती हैं। पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर आज तक एवं भविष्य में परिवर्तनकारी शक्तियां कार्यरत हैं। जो धरातल पर भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन भी करती हैं। इसके साथ ही अपक्षय एवं अपरदन की शक्तियां भी कार्यरत हैं। मृदा की परिभाषा-  ‘‘मृदा भूमि की वह ऊपरी परत हैं जिसका निर्माण …

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भारत का भौतिक स्वरूप

प्राचीन काल से भारत सोने की चिड़िया व दूध की नदियों का देश कहा जाता था और अब वह दिन दूर नहीं जब कि वह पूर्ण विकसित होकर पुन: धन धान्य की स्थिति प्राप्त कर लेगा। वर्तमान में केवल भारत वर्ष तथा इंडिया शब्द संवैधानिक रूप से अधिकृत है। आकार की दृष्टि से भारत संसार का …

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