व्यवसायिक पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकृति, घटक एवं महत्व

व्यावसायिक पर्यावरण दो शब्दों-व्यवसाय एवं पर्यावरण के संयोग से बना है। व्यवसाय, विद्यमान पर्यावरण में रहकर अपनी क्रियाओं को संचालित करता है। व्यवसाय को पर्यावरण प्रभावित करता है और व्यवसाय पर्यावरण को प्रभावित करता है। अत: दोनों ही अन्तर्सम्बन्धित हैं। वास्तव में व्यावसायिक पर्यावरण उन सभी परिस्थितियों, घटनाओं एवं कारकों का योग है जो व्यवसाय पर …

Read more

शून्य आधार बजट क्या है ?

शून्य आधार बजटन ऐसी नियोजन एवं बजटन प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया जाता …

Read more

स्फीति लेखा-विधि का अर्थ, उद्देश्य, तकनीक, लाभ एवं दोष

स्फीति लेखा-विधि मूल्य-स्तर के परिवर्तनों का वित्तीय विवरणों पर पड़ने वाले प्रभाव की समस्या के समाधान के लिये वित्तीय लेखापालों द्वारा विकसित की गर्इ लेखा प्रणाली को ही स्फीति लेखा-विधि कहते हैं। यह वह तकनीक है जिसके द्वारा सामान्य मूल्य स्तर के परिवर्तनों को प्रदर्शित करने के लिये वित्तीय विवरण पुनर्वर्णित किये जाते हैं ताकि लेखांकन …

Read more

मानव संसाधन लेखांकन क्या है ?

मानव संसाधन लेखांकन को एक ऐसी लेखांकन पद्धति के रूप में माना जा सकता है, जिसके प्रयोग से मानव संसाधनों को सम्पत्ति के रूप में मान्यता प्रदान की जाती हो और अन्य भौतिक साधनों की भांति जिनके मूल्य को माप कर लेखा पुस्तकों में दर्ज किया जाता हो। इसके माध्यम से मानव संसाधनों के सम्बन्ध में …

Read more

मजदूरी से संबंधित अधिनियम

श्रमिकों के लिए केवल मजदूरी की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी अदायगी के तरीके, मजदूरी-भुगतान के अंतराल, उससे कटौतियां तथा उसके संरक्षण से संबद्ध अन्य कर्इ बातें भी महत्वपूर्ण होती है। मजदूरी की संरक्षा से संबद्ध कानूनों के बनाए जाने के पहले मजदूरी के भुगतान में कर्इ तरह के अनाचार हुआ करते थे। उदाहरणार्थ, …

Read more

सामाजिक सुरक्षा क्या है ?

‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का उद्गम औपचारिक रूप से सन् 1935 से माना जाता है, जबकि प्रथम बार अमरीका में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इसी वर्ष बेरोजगारी, बीमारी तथा वृद्धावस्था बीमा की समस्या का समाधान करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया। तीन वर्ष बाद सन् 1938 में ‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का …

Read more

मजदूरी एवं वेतन प्रशासन का अर्थ

मानवीय संसाधनों की अधिप्राप्ति के पश्चात् यह अत्यन्त आवश्यक होता है कि उन्हें संगठन के प्रति उनके योगदानों के लिए न्यायोचित रूप से पारिश्रमिक प्रदान किया जाये। पारिश्रमिक वह प्रतिपूरण है, जिसे एक कर्मचारी संगठन के लिए अपने योगदान के बदले में प्राप्त करता है। मजदूरी एवं वेतन पारिश्रमिक प्रक्रिया के प्रमुख अंग होते हैं, जिनका …

Read more

औद्योगिक दुर्घटना के कारण एवं निवारण

भारत में औद्योगीकरण के विकास के साथ विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा समस्या उत्पन्न हुर्इ है। प्रत्येक वर्ष, औद्योगिक दुर्घटना के मामले लाखों में दिखार्इ देते है, जिनमें वृहद, दुर्घटना, आंशिक नि:शक्तता, पूर्ण नि:शक्तता विभिन्न कारखानों, रेलवे, पत्रों, गोदी, तथा खानों में देखने को मिलती है। हमारे सांख्यिकीय कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 1000 …

Read more

श्रमिक शिक्षा क्या है ?

किसी भी विकासशील देश में आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने के एक साधन के रूप में श्रमिकों की शिक्षा के महत्व को कम नहीं किया जा सकता। यह ठीक ही कहा गया है कि ‘‘किसी औ़द्योगिक दृष्टि से विकसित देश का बड़ा पूंजी भण्डार इसकी भौतिक सामग्री में नहीं वरन् जांचे हुए निष्कर्शो से इकट्ठा …

Read more

श्रम कल्याण के सिद्धान्त एवं प्रशासन

कोर्इ भी श्रम कल्याण सम्बन्धी योजना अथवा कार्यक्रम तब तक प्रभावपूर्ण रूप से नही बनाया जा सकता जब तक कि समाज के नीति निर्धारक श्रम कल्याण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुये इसके सम्बन्ध में उपयुक्त नीति बनाते हुए अपने इरादे की स्पष्ट घोषणा न करें और इसे कार्यान्वित कराने की दृष्टि से राज्य का समुचित …

Read more