संविधान में हिन्दी (अनुच्छेद 343 से 351 तक)

स्वतंत्रता संग्राम के दिनों अंग्रेजों के क्रूर अत्याचार व दमनात्मक शासन के कारण भारतीय जनमानस में अंग्रेजों के प्रति गहरी घृणा छा गर्इ थी। विदेशियों से मुक्ति पाने की छटपटाहट से राष्ट्रीय आन्दोलन का सूत्रपात हुआ। स्वराज्य का सपना, स्वदेशी की चाहत, स्वभाषा की मिठास और स्वतंत्रता की आकांक्षा इसी समय की उपज है। ‘स्वदेशी का …

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हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण

‘हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण’ शीर्षक इस लेख में हिन्दी वर्तनी के मानकीकरण एवं उसकी आवश्यकता पर सविस्तार चर्चा की गर्इ है। साथ ही मानक वर्तनी के प्रयोग का उदाहरण समझाया गया है। हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण  भारत के संविधान में हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। साथ ही कुछ अन्य …

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राष्ट्रभाषा तथा राजभाषा के रूप में हिन्दी

‘राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी’ शीर्षक इस लेख में राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा का सामान्य परिचय व उनके स्वरूप की चर्चा की गर्इ है। इसके अलावा राजभाषा की विशेषताएँ एवं उसके प्रयोग क्षेत्र पर भी सविस्तार विचार किया गया है। राष्ट्रभाषा बनाम राजभाषा  समाज में जिस भाषा का प्रयोग होता है साहित्य की भाषा उसी …

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सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी

भारत जैसे बहुभाषा-भाषी देश में सम्पर्क भाषा की महत्ता असंदिग्ध है। इसी के मद्देनजर ‘सम्पर्क भाषा (जनभाषा) के रूप में हिन्दी’ शीर्षक इस अध्याय में सम्पर्क भाषा का सामान्य परिचय देने के साथ-साथ सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी के स्वरूप एवं राष्ट्रभाषा और सम्पर्क भाषा के अंत:सम्बन्ध पर भी विचार किया गया है। सम्पर्क भाषा …

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मजदूरी से संबंधित अधिनियम

श्रमिकों के लिए केवल मजदूरी की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी अदायगी के तरीके, मजदूरी-भुगतान के अंतराल, उससे कटौतियां तथा उसके संरक्षण से संबद्ध अन्य कर्इ बातें भी महत्वपूर्ण होती है। मजदूरी की संरक्षा से संबद्ध कानूनों के बनाए जाने के पहले मजदूरी के भुगतान में कर्इ तरह के अनाचार हुआ करते थे। उदाहरणार्थ, …

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श्रम विधान क्या है ?

आधुनिक प्रचलन में ‘विधान’ शब्द से उच्च प्राधिकार से युक्त तथा जनता का प्रचुरता से प्रतिनिधित्व करने वाले विशिष्ट राजकीय अभिकरणों द्वारा बनाए गए विधि के नियमों का बोध होता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, विधान के अन्तर्गत मुख्यत: जनता के समर्थन प्राप्त विधानमंडलों तथा अन्य मान्यता प्राप्त सक्षम प्राधिकारियों द्वारा बनाए गए कानून सम्मिलित होते …

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सामाजिक सुरक्षा क्या है ?

‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का उद्गम औपचारिक रूप से सन् 1935 से माना जाता है, जबकि प्रथम बार अमरीका में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इसी वर्ष बेरोजगारी, बीमारी तथा वृद्धावस्था बीमा की समस्या का समाधान करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया। तीन वर्ष बाद सन् 1938 में ‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का …

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औद्योगिक दुर्घटना के कारण एवं निवारण

भारत में औद्योगीकरण के विकास के साथ विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा समस्या उत्पन्न हुर्इ है। प्रत्येक वर्ष, औद्योगिक दुर्घटना के मामले लाखों में दिखार्इ देते है, जिनमें वृहद, दुर्घटना, आंशिक नि:शक्तता, पूर्ण नि:शक्तता विभिन्न कारखानों, रेलवे, पत्रों, गोदी, तथा खानों में देखने को मिलती है। हमारे सांख्यिकीय कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 1000 …

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श्रमिक शिक्षा क्या है ?

किसी भी विकासशील देश में आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने के एक साधन के रूप में श्रमिकों की शिक्षा के महत्व को कम नहीं किया जा सकता। यह ठीक ही कहा गया है कि ‘‘किसी औ़द्योगिक दृष्टि से विकसित देश का बड़ा पूंजी भण्डार इसकी भौतिक सामग्री में नहीं वरन् जांचे हुए निष्कर्शो से इकट्ठा …

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श्रम कल्याण के सिद्धान्त एवं प्रशासन

कोर्इ भी श्रम कल्याण सम्बन्धी योजना अथवा कार्यक्रम तब तक प्रभावपूर्ण रूप से नही बनाया जा सकता जब तक कि समाज के नीति निर्धारक श्रम कल्याण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुये इसके सम्बन्ध में उपयुक्त नीति बनाते हुए अपने इरादे की स्पष्ट घोषणा न करें और इसे कार्यान्वित कराने की दृष्टि से राज्य का समुचित …

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