निष्पादन मूल्यांकन क्या है ?

निष्पादन मूल्यांकन के लिए अनेक पर्यायवाची शब्दों का भी प्रयोग किया जाता है, जैसे-कर्मचारी मूल्यांकन, कर्मचारी निष्पादन,समीक्षा,कार्मिक मूल्यांकन, निष्पादन मूल्यांकन तथा कर्मचारी मूल्यांकन आदि। ये सभी शब्द समानार्थक हैं। निष्पादन मूल्यांकन की कुछ प्रमुख परिभाषायें निम्नलिखित प्रकार से है: डेल एस. बीच के अनुसार, ‘‘ निष्पादन मूल्यांकन किसी व्यक्ति का कार्य पर उसके निष्पादन तथा उसके …

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प्रशिक्षण क्या है ?

साधारण शब्दों में, प्रशिक्षण किसी कार्य विशेष को सम्पन्न करने के लिए एक कर्मचारी के ज्ञान एवं निपुणताओं में वृद्धि करने का कार्य है। प्रशिक्षण एक अल्पकालीन शैक्षणिक प्रक्रिया है तथा जिसमें एक व्यवस्थित एवं संगठित कार्य-प्रणाली उपयोग में लायी जाती हैं, जिसके द्वारा एक कर्मचारी किसी निश्चित उद्देश्य के लिए तकनीकी ज्ञान एवं निपुणताओं को …

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पदोन्नति का अर्थ

सामान्यत: लोग पदोन्नति का अर्थ ऐसे कार्य-परिवर्तन से लगाते हैं, जिसके फलस्वरूप किसी कर्मचारी की आय अथवा वेतन में वृद्धि हो जाये, परन्तु एक ही कार्य पर रहते हुए यदि कर्मचारी को अधिक वेतन दिया जाये तो इसे पदोन्नति नहीं कहा जा सकता। यह तो मात्र वेतन-वृद्धि होगी। पदोन्नति का सम्बन्ध अनिवार्य रूप से वेतन-वृद्धि से …

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चयन का अर्थ, विशेषताएं एवं महत्व

चयन, एक संगठन के अन्तर्गत रिक्त पदों को भरने के लिए अपेक्षित पात्रताओं तथा सामथ्र्य से युक्त व्यक्तियों (वे लोग जो आवेदन करते हैं, उनके सम्पूर्ण समूह में से) को चुनने की प्रक्रिया है। यद्यपि, संगठनों के अन्तर्गत पदोन्नति एवं स्थानान्तरण के लिए भी कुछ चयन पद्धतियाँ अपनायी जा सकती हैं, परन्तु यहाँ इस अध्याय में …

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कार्य विश्लेषण क्या है ?

मानवीय संसाधनों की अधिप्राप्ति, मानव संसांधन प्रबन्धन का प्रथम संचालनात्मक कार्य है, जिसे विभिन्न उप-कार्यों, जैसे-मानव संसाधन नियोजन, भर्ती तथा चयन में उप-विभाजित किया जा सकता है। प्रबन्धतन्त्र को एक कार्य के लिए अपेक्षित व्यक्ति के प्रकार तथा भविष्य में सेवायोजित किये जाने वाले व्यक्तियों की संख्या का निर्धारण करना आवश्यक होता है। दूसरे शब्दों में, …

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मानव संसाधन प्रबंधन की अवधारणा, विशेषताएँ एवं कार्य

मानव संसाधन प्रबंधन की अवधारणा प्रबंधन के क्षेत्र की एक नूतन अवधारणा है और यह आज सर्वाधिक प्रचलित अवधारणा के रूप में देखी जाती है। आरम्भ में यह अवधारणा रोजगार प्रबंधन, कार्मिक प्रबंधन, औद्योगिक सम्बन्ध, श्रम कल्याण प्रबंधन, श्रम अधिकारी, श्रम प्रबंधक के रूप में थी और 1960 और उसके बाद में मुख्य शब्द कार्मिक प्रबंधक …

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एनजीओ (NGO) के सहायतार्थ कार्यक्रम

इस में हम आपको उन कानूनों के विषय में बतायेगें जिनका की मुख्य रूप से संस्था वाले ज्ञान रखते है एवं जिनके माध्यम से वे जनहित सुनिश्चित करते है। यहॉ विभिन्न प्रकार के अधिकारों , कानूनों एवं अधिनियमों की विस्तृत चर्चा की गयी है जिसके अध्ययन के पश्चात आप यह जान सकेगें कि गैर सरकारी संगठन …

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एनजीओ (NGO) : भारत सरकार की विभिन्न योजनाएं

इस में हम भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की उन योजनाओं की जानकारी प्राप्त करेगें जो कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गैर सरकारी संगठनों को अनुदान राशि प्रदान करते हैं और जिनका मकसद् विभिन्न योजनाओं का लाभ आम जन तक पहॅुचाना होता है जिसमें मध्यस्थ की भूमिका में गैर सरकारी संगठन रहते हैं। यहॉ हमने …

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श्रमिक शिक्षा क्या है ?

किसी भी विकासशील देश में आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने के एक साधन के रूप में श्रमिकों की शिक्षा के महत्व को कम नहीं किया जा सकता। यह ठीक ही कहा गया है कि ‘‘किसी औ़द्योगिक दृष्टि से विकसित देश का बड़ा पूंजी भण्डार इसकी भौतिक सामग्री में नहीं वरन् जांचे हुए निष्कर्शो से इकट्ठा …

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श्रम कल्याण के सिद्धान्त एवं प्रशासन

कोर्इ भी श्रम कल्याण सम्बन्धी योजना अथवा कार्यक्रम तब तक प्रभावपूर्ण रूप से नही बनाया जा सकता जब तक कि समाज के नीति निर्धारक श्रम कल्याण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुये इसके सम्बन्ध में उपयुक्त नीति बनाते हुए अपने इरादे की स्पष्ट घोषणा न करें और इसे कार्यान्वित कराने की दृष्टि से राज्य का समुचित …

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