केन्द्रीय सचिवालय का संरचना एवं कार्य प्रणाली

प्रत्येक मंत्रालय में निम्नतम स्तर पर एक अनुभाग होता है, जिसमें एक अनुभाग अधिकारी होता है तथा कई सहायक और टंकक होते हैं, जो अनुभाग अधिकारी के अधीन काम करते हैं। यह अनुभाग इसे आवंटित किए गए विषय से सम्बन्धित कार्य को करता है। इस अनुभाग को कार्यालय भी कहा जाता है। दो अनुभागों से मिलकर …

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पारितंत्र के प्रकारों का नाम बताइये।

पारितंत्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1935 में ए.जी. टॉसले द्वारा किया गया था। पारितंत्र की अवधारणा मुख्यरूप से दो पहलुओं के चारों ओर घुमती हैं। यह विभिन्न घटकों और उपघटकों के बीच अंतर्सबंधों का अध्ययन करती हैं।  पारितंत्र के विभिन्न घटकों के मध्य ऊर्जा का प्रवाह जो इस बात के लिये आवश्यक निर्धारक हैं कि एक …

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द्विसदनीय विधायिका क्या है? || द्विसदनीय विधायिका के पक्ष और विपक्ष में तर्क

द्विसदनीय विधायिका की परम्परा ब्रिटेन की देन है। सबसे पहले ब्रिटेन में संसद के दो सदन विकसित हुए थे। बाद में सभी प्रजातन्त्रीय देशों ने ब्रिटिश प्रतिमान का ही अनुसरण किया है और उनमें द्विसदनीय विधायिकाएं हैं। प्रत्येक देश में निम्न सदन जन साधारण का प्रतिनिधित्व करता है और उच्च सदन जनता के कुछ विशिष्ट वर्गों का …

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एक सदनीय विधायिका किसे कहते है? || एक सदनीय विधायिका के पक्ष और विपक्ष में तर्क

जिस देश में व्यवस्थापिका का एक सदन होता है उसे एक सदनीय विधायिका कहा जाता है। यह पद्धति आज विश्व के अनेक देशों में प्रचलित है। यह पद्धति 18वीं तथा 19वीं सदी के दौरान अधिक लोकप्रिय रही और आज भी है। इस पद्धति के समर्थकों का कहना है कि लोकप्रिय सम्प्रभुता जनता में निवास करती है …

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भारत में सामंतवाद का उदय और विकास

भारत में मौर्योतर-काल और गुप्तकाल में कुछ राजनैतिक और प्रशासनिक प्रवृतियों के कारण और विशेष तौर पर गुप्तकाल में राज्य-व्यवस्था सांमतवादी ढांचे में ढ़लने लगी थी। प्रो0 रामशरण शर्मा के अनुसार इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रवृति ब्राÎह्यणों को भूमिदान देने की थी।  मौर्यकाल एवम् मौर्यो से पूर्व पाली साहित्य में मगध और कोसल के शासकों द्वारा ब्राह्मणों …

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रूसो का समान्य इच्छा सिद्धांत | Rousseau’s General Will

रूसो रूसो का सामान्य इच्छा का सिद्धांत यह सिद्धांत रूसो के दर्शन का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण, मौलिक, केन्द्रीय एवं रोचक विचार है। यह रूसो के सम्पूर्ण राजनीतक दर्शन की आधारशिला है। इसी धारणा के आधार पर रूसो ने स्वतन्त्रता, अधिकार, कानून, सम्प्रभुता, राज्य की उत्पत्ति, संगठन आदि विषयों पर अपने विचार प्रकट किये हैं।  रूसो का सामान्य …

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समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास

समाजशास्त्र का उद्भव बहुत पुराना नहीं है। समाजशास्त्र को अस्तित्व में लाने का श्रेय फ्रांस के विद्वान आगस्त कोंत को जाता है। जिन्होंने 1838 में इस नए विज्ञान को समाजशास्त्र नाम दिया। मैकाइवर कहते है कि ‘‘विज्ञान परिवार में पृथक नाम तथा स्थान सहित क्रमबद्ध ज्ञान की प्राय: सुनिश्चित शाखा के रूप में समाजशास्त्र को शताब्दियों …

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NITI AAYOG | नीति आयोग की स्थापना के उद्देश्य संरचना कार्य

1950 से, भारत सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से पूरे देश में तेजी से सामाजिक और आर्थिक विकास लाने का प्रयास किया। इस कार्य को करने के लिए मुख्य संस्थान योजना आयोग था, जिसे 1950 में प्रारम्भ किया गया था और यह 2014 के अंत तक कार्य कर रहा था। इसके बाद जनवरी 1, 2015 को, योजना …

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प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन कब हुआ

सर्वप्रथम, प्रशासनिक सुधारों के लिए कई समितियों का गठन किया गया। इन समितियों ने प्रशासन के विभिन्न पहलुओं के सम्बन्ध में सुझाव दिए। प्रशासनिक सुधार आयोग इस ओर लिए गए कदमों में एक महत्वपूर्ण संस्थान है। भारत सरकार ने दो आयोगों का गठन किया, जिसमें पहला प्रशासनिक सुधार आयोग 1966-70 की अवधि में स्थापित किया गया और …

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भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के कार्य || भारत में FSSAI के कार्य

भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 को सरकार द्वारा पारित किया गया। यह अधिनियम सभी खाद्य मामलों के लिए एकल प्राधिकरण की स्थापना करता है, जो खाद्य सुरक्षा और मानकों से संबंधित मामलों में एक स्वायत्त संस्थान होगा। FSSAI का पूरा नाम Food Safety and Standards Authority of India (खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम) है। इस …

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