पत्र लेखन के कितने प्रकार होते हैं ?

पत्र के माध्यम से हम अपने विचार दूसरे व्यक्ति तक पहुँचा देते हैं। पत्र-लेखन से अपना संदेश, अपना मंतव्य, अपना समाचार दूसरे व्यक्ति के पास तक पहुँचते हैं। पत्र के माध्यम से जहां संदेश/समाचार मिलता है, वही उस सामग्री में झाँक कर उसके लेखक के व्यक्तित्व को समझने में सहायता मिलती है। पत्र से तात्पर्य पत्र सम्प्रेषण का …

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ठुमरी शैली की उत्पत्ति एवं विकास

ठुमरी की उत्पत्ति तीन चार सौ वर्ष पूर्व भारतीय संगीत में ध्रुपद गायन का प्रचार था। परिस्थितिवश ख्याल गायन का प्रादुर्भाव हुआ। धीरे-धीरे ध्रुपद का स्थान ख्याल ने ले लिया। मनुष्यों के बदलती हुई भावनाओं और विचार के परिवर्तन के कारण ख्याल के पश्चात क्रमश: टप्पा, ठुमरी, भावगीत, फिल्मी गीत प्रचलित हुआ। राग की शुद्धता व …

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ख्याल गायन शैली क्या है?

ख्याल का अर्थ है कल्पना इसमें राग के नियमों में कई स्वर समूहों की लय व ताल के साथ कल्पना कर, राग का स्वरूप स्थापित किया जाता है। ख्याल गायन में विलम्बित, मध्य एवं द्रुत लय की रचनाएं गाई जाती हैं। इसमें आलाप – ‘अकार’  ‘अ’, ‘आकार’ अर्थात ‘आ’, ‘उकार’ अर्थात ‘उ’ एवं ‘इकार’ अर्थात ‘इ’ …

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ध्रुपद गायन शैली / धमार गायन शैली क्या है?

ध्रुपद गायन शैली ख्याल से पुरानी है। ध्रुपद के बाद ही ख्याल का जन्म हुआ। इसमें सरगम एवं तानों का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसके स्थान पर दुगुन, तिगुन, चौगुन एवं कठिन लयकारी का प्रयोग कलाकार की सामर्थ के अनुसार किया जाता है।  इस गायन शैली में ताल के साथ रचना प्रस्तुत करने से …

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भारत के 8 शास्त्रीय नृत्य

भारतीय नृत्य-कला की उत्पत्ति एवं विकास की अपनी एक स्वतन्त्र परम्परा रही है। इसकी उत्पत्ति वैदिक काल से ही हो चुकी थी। जिसका प्रमाण वेदों में पर्याप्त रूप में प्राप्त होता है। वेदों को मानव जीवन के धर्म, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, सभ्यता एवं कला कौशल का विशाल स्रोत माना गया है। इसलिए इसे विश्वकोश कहा गया …

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गिटार की उत्पत्ति और भारत में गिटार का इतिहास

गिटार की उत्पत्ति  वास्तव में किसी भी वाद्य के उत्पत्ति के बारे में ठीक-ठीक जानकारी प्राप्त करना एक कठिन कार्य है क्योंकि प्राचीनकाल से ही आवश्यकताओं के आधार पर हर समय कुछ न कुछ प्रयोग होते ही रहे हैं। जब कोई प्रयोग समय के साथ धीरे-धीरे सफल हो जाता है और जनसामान्य का ध्यान उस तरफ आकर्षित …

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कब हुआ वायलिन का आविष्कार जानिए पूरा इतिहास

भारतीय संगीत का प्राचीनतम रूप वेदों में मिलता है। प्राचीन काल से ही भारतीय संगीत भक्तिमय और अनुष्ठानों से सम्बद्ध रहा है। चारों देवों में कहीं-कहीं पर बाण, गोथा, अघाटी, कर्करी तथा गर्गर तन्त्रीं वाद्य का वर्णन किया गया है। शारगंदेव कृत ‘संगीत रत्नाकर’ में नाद ब्रह्म का वर्णन करते हुए कहा है- चैतन्य सर्वभूतनम्। याज्ञवल्क्य …

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सारंगी की उत्पत्ति और सारंगी के प्रकार

सारंगी सारंगी की उत्पत्ति भारतवर्ष के प्राचीन, पौराणिक संगीत ग्रन्थों के आधार पर इस मधुर वाद्य सारंगी का आविष्कार श्रृंगी ऋषि’ को माना जाता है। श्रृंगी ऋषि से यह वाद्य पुलस्त्य को, पुलस्त्य से विश्रवस तथा उनसे राक्षसराज रावण ने प्राप्त किया। देश, काल और परिस्थिति के अनुसार इस वाद्य के स्वरूप, आकार, वादनशैली तथा उपयोगिता …

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वाराणसी का क्षेत्रफल, जनसंख्या, जलवायु एवं आर्थिक विशेषताएँ

वाराणसी विश्व के प्राचीनतम नगरों में से एक है जो अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्वविख्यात है। यह भारत के राज्य उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध शहर है, इसे हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र शहर माना जाता है। प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्कट्वेन ने लिखा है ‘‘बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परम्पराओं से पुराना है, …

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लोक कल्याणकारी राज्य का अर्थ, परिभाषा, लक्षण व कार्य

लोक कल्याणकारी राज्य का तात्पर्य एक ऐसे राज्य से होता है जिसके अंतर्गत शासन की शक्ति का प्रयोग किसी वर्ग विशेष के कल्याण हेतु नहीं वरन् संपूर्ण जनता के कल्याण के लिए किया जाता है। इस रूप में लोक कल्याणकारी राज्य का विचार नया नहीं है। भारत में प्राचीन काल से रामराज्य की जो धारणा प्रचलित …

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