हिक्स के व्यापार चक्र सिद्धांत की व्याख्या, मान्यताएं, आलोचना

हिक्स ने व्यापार चक्र के सिद्धांत की व्याख्या 1950 में अपनी पुस्तक “Contribution to the Theory of theTrade Cycle”में की। हिक्स ने भी सैम्युअलसन की तरह गुणक तथा त्वरक की अन्तर्क्रिया द्वारा व्यापारिक चक्रों की घटने की व्याख्या की है। इन दोनों में अन्तर यह है कि हिक्स ने व्यापार चक्र को आर्थिक विकास से जोड़ …

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व्यावसायिक वातावरण की विशेषताएं, महत्व, आयाम/तत्व

व्यावसायिक वातावरण से अभिप्राय उन व्यक्तियों, संस्थानों तथा शक्तियों से होता है जो व्यावसायिक उद्यम के परिचालन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। व्यावसायिक वातावरण की विशेषताएं (1) बाह्य शक्तियों की समग्रता : व्यावसायिक वातावरण संस्था के बाहर की शक्तियों/घटकों का योग होता है जिनकी प्रकृति सामूहिक होती है। (2) विशिष्ट एवं साधारण शक्तियाँ : …

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नियंत्रण (प्रबंधन) से आप क्या समझते है? नियन्त्रण की सीमाएँ/दोष

 – नियंत्रण से तात्पर्य में नियोजन के अनुसार क्रियाओं के निष्पादन से है। नियन्त्रण इस बात का आश्वासन है कि संगठन के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग प्रभावी एवं दक्षतापूर्ण ढंग से हो रहा है। – नियंत्रण कार्य को वास्तविक निष्पादन की पूर्व निर्धारित कार्य से तुलना क रूप …

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कर (Tax) किसे कहते हैं कर कितने प्रकार के होते हैं?

किसी भी प्रकार की गतिविधि, आय अथवा उत्पादन पर सरकार द्वारा वसूल की जाने वाली राशि को कर (Tax) कहते हैं। कर (Tax) दो प्रकार के होते हैं- 1. प्रत्यक्ष कर- इन करों को प्रत्यक्ष रूप से किसी आय अथवा सम्पत्ति के आधार पर वसूल किया जाता है। जैसे- आयकर, सम्पत्ति कर, निगम कर, उपहार कर आदि। 2. …

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पूंजी बाजार किसे कहते हैं?

यह दीर्घकालिक निधियों जैसे ऋणपत्रों तथा अंशपत्रों का बाजार है जो एक लम्बे समय के लिए जारी की जाती है। इसके अंतर्गत विकास बैंक, वाणिज्यिक बैंक तथा स्टॉक एक्सचेंज समाहित होते हैं।  पूंजी बाजार को दो भागों में बांटा जा सकता है। (1) प्राथमिक बाजार (2) द्वितीयक बाजार। 1. प्राथमिक बाजार   इसे नए निगर्मन बाजार के …

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डीमैट खाता क्या है? डीमैट खाता के लाभ

डीमैट खाता डीमेटिरियलाइजड खाते का संक्षिप्त नाम है। डीमैट खाते से अभिप्राय एक खाते से है, जो एक भारतीय नागरिक इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में व्यापार करने के लिए डिपोज़िटरी भागीदार (बैंकों, शेयर दलालों आदि) के पास खोला जाता है, जिसके द्वारा वह विभिन्न कम्पनियों की प्रतिभूतियों (अंशों, ऋण पत्रों आदि) को इलेक्ट्रॉनिक रूप में …

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का गठन, कार्य, अधिकारों व शक्तियों का वर्णन

स्टॉक एक्सचेंज में प्रतिभूतियों के क्रय विक्रय में पारदर्शिता लाने तथा सभी व्यवहारों को नियमानुसार संचालित करने के लिए जिस स्वतन्त्र इकाई का गठन 4 अप्रैल 1992 को किया गया। उसे सेबी कहते हैं।  सन् 1992 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम के अन्तर्गत भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) का गठन किया गया। गैर संवैधानिक …

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पूंजी संरचना को प्रभावित करने वाले कारक

पूंजी संरचना से अभिप्राय स्वामिगत तथा ग्रहीत निधि उधार कोषों के मिश्रण से है। एक अनुकूल पूंजी संरचना वह होती है जिसमें ऋण एवं समता का अनुपात ऐसा होता है जिससे कि समता अंशों के मूल्य तथा अंश धारकों की धनराशि बढ़ती है। एक फर्म की सम्मत पूंजी में ऋण्एा के अनुपात को वित्तीय उत्तेलक अथवा …

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स्थायी पूंजी किसे कहते हैं स्थिर पूंजी को प्रभावित करने वाले कारक?

दीघकालीन सम्पत्तियों में किये गये निवेश को स्थायी पूंजी कहा जाता है, जो एक लम्बे समय तक प्रयोग की जाती है। अत: स्थाई सम्पत्तियों को दीर्घकालीन वित्तीय स्रोतों से ही प्राप्त करना चाहिए। स्थायी पूंजी में बड़ी मात्रा में कोष लगाए जाते हैं तथा ऐसे निर्णयों को भारी क्षति उठाये बिना नहीं बदला जा सकता है।  …

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कार्यशील पूंजी किसे कहते हैं ?

कार्यशील पूंजी वह होती है जिसके माध्यम से दैनिक संचालन क्रियाओं को सुगम रूप में संचालित रखने में व्यवसाय को सहायता प्राप्त होती है। स्थाई  संपत्तियों में निवेश के अलावा प्रत्येक व्यावसायिक संगठन को चालू सम्पत्तियों में भी निवेश की आवश्यकता होती है जिन्हें एक वर्ष में रोकड़ या रोकड़ के समतुल्यों में परिवर्तित किया जा …

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