सामाजिक तथ्य की प्रमुख विशेषताएं (दुर्खीम)

सामान्यतया कहा जा सकता है कि सामाजिक तथ्य एक अत्यंत जटिल विचार है, जिसमें बाह्यता, बाध्यता और अपरिहार्यता के गुण विद्यमान होते हैं। दुर्खीम ने समाजशास्त्र की अपनी वैज्ञानिक दृष्टि को जिस मूलभूत सिद्धांत पर आधारित रख वह सामाजिक तथ्यों की वस्तुपरक वास्तविकता है। सामाजिक तथ्य कार्य करने, सोचने व अनुभव करने का वह तरीका है …

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दुर्खीम के श्रम विभाजन का सिद्धांत, श्रम विभाजन पर दुर्खीम के विचार

श्रम विभाजन से तात्पर्य किसी भी स्थाई संगठन में मिलजुलकर काम करने वाले व्यक्तियों, या समूहों द्वारा भिन्न किन्तु समन्वयात्मक क्रियाओं के संपादन से है। अर्थात समाज में किसी कार्य को संपादित करने वाले व्यक्तियों के बीच सम्पन्न की जाने वाली क्रियाओं एवं सेवाओं के वितरण एवं वैभिन्यकरण की प्रक्रिया श्रम विभाजन कहलाती है। जिसकी अभिव्यक्ति …

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प्रकार्यवाद के जनक कौन है ?

प्रकार्यवाद का अर्थ उस परिप्रेक्ष्य से है जिस तरह से समाजशास्त्र और सामाजिक नृविज्ञान में सिद्धांतों ने सामाजिक संस्थाओं या अन्य सामाजिक घटनाओं को मुख्य रूप से उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के संदर्भ में समझाया हे। जब हम कुछ सामाजिक संस्थाओं, सामाजिक गतिविधि या सामाजिक घटना की बात करते हैं, तो इसका मतलब हे …

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समाजीकरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

सामाजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो समाज के विभिन्न सरोकारों को समझने तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न समाजों में बच्चों को सामाजिक मूल्यों से अवगत कराने की अलग.अलग तरीके व परंपराये हैं। बच्चों के व्यक्तित्व के समुचित विकास के लिए उनका सामाजीकरण अनिवार्य है। सामाजीकरण के अंतर्गत बच्चों को परिवारों परिजनों तथा …

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समाजीकरण के सिद्धांत || सिगमंड फ्रायड चार्ल्स कूले तथा मीड़ के सिद्धांत

लगभग सभी समाजविज्ञानी एवं मनोविज्ञान विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि बच्चे के विकास के केंद्र में मूल रूप से “स्वत्व” (self) विद्यमान रहता है और सामाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा यह विकास संभव हो पाता है। इस अवधारणा को भली-भांति समझने के लिए सामाजीकरण के प्रमुख सिद्धांतों का विवरण देना आवश्यक है। सामाजीकरण के सिद्धांत …

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आधुनिकता का अर्थ और परिभाषा

आधुनिकता का अभिप्राय उस व्यवस्था से हैं जिसमें ओद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप कुछ ऐसे तत्व सम्मिलित हो गये हैं जो प्राचीन परम्पराओं में परिवर्तन ला रहैं हैं। आधुनिकता एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था का नाम हैं, जिसमें प्राचीन परम्पराओं के स्थान पर नवीन मान्यताओं को स्थान दिया गया है। आधुनिकता का अर्थ और परिभाषा आधुनिक शब्द अंग्रेजी …

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शैक्षिक समाजशास्त्र के उद्देश्य, क्षेत्र, महत्व, शिक्षा पर प्रभाव

शिक्षा के प्रति रुचि उत्पन्न हो जाने से समाजशास्त्र की एक नई शाखा कुछ ही वर्षों में विकसित की गई है, जिसे शैक्षिक समाजशास्त्र की संज्ञा दी जाती है। दूसरों शब्दों में भी कहा जा सकता है कि यह विज्ञान समाजशास्त्र का एक ऐसा अंग है जो शिक्षा एवं समाजशास्त्र का समन्वित रूप है। ध्यान देने …

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भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अंतर

संस्कृत और संस्कृति दोनों ही शब्द ‘संस्कार’ से बने है। संस्कार का अर्थ है कुछ कृत्यों (rituals)की पूर्ति करना। एक हिंदू जन्म से ही अनेक प्रकार के संस्कार करता है, जिनमें उसे विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभानी पड़ती है। संस्कृति का अर्थ होता हे विभिन्न संस्कारों के द्वारा सामूहिक जीवन के उद्देश्यो की प्राप्ति। यह परिमार्जन …

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आर्य समाज के 10 नियम क्या हैं ?

आर्य समाज की स्थापना 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती (1824-1883) ने की थी।, उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था। दयानन्द र्बाह्मण माता-पिता की संतान थे। उनकी शिक्षा पांच वर्ष की उम्र में शुरू हुई और आठ वर्ष की अवस्था में उनका यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। दयानन्द का धार्मिक तौर पर रूपान्तरण उस समय हुआ …

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आदिकाल का नामकरण और काल सीमा

जार्ज ग्रियर्सन ने आदिकाल को ‘चारण काल’ कहा है तथा इसकी सीमा 700 ई. से 1300 ई. माना है। मिश्रबन्धुओं ने आदिकाल को ‘प्रारम्भिक काल’ कहकर इसकी समय सीमा 700 वि. से 1444 वि. तक मानी है। आचार्य शुक्ल ने इसे ‘वीरगाथाकाल’ कहकर इसकी अवधि सं. 1050 से 1375 तक मानी है। डाॅ. रामकुमार वर्मा ने …

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