शुभ और अशुभ किसे कहते हैं ?

जो वस्तु हमारी इच्छा की पूर्ति करती हे उसे हम शुभ मानते हैं। धन-संपत्ति को शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। शुभ हमें लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता प्रदान करता है। सुखवादियों ने शुभ को ही सुख या आनंद स्वीकार किया है, अत: जो आचरण शुभ के उद्देश्य से किया …

Read more

क्रिएटिव कामन्स लाइसेंस के प्रकार || Creative Commons attribution License Kya hai

Creative Commons क्रिएटिव कॉमन्स एक संस्था है जिसकी स्थापना ‘‘मुफ्त कानूनी उपकरणों के माध्यम से सृजनात्मकता तथा ज्ञान को साझा करने तथा उपयोग में लाने को सक्षम बनाने’’ के लिए की गयी थी। यह कॉपीराइट लाइसेंस के एक समुच्य का बना है जो बौद्धिक संपदा के हिस्सों के निर्माणकर्ताओं को मदद देता है कि वे पहुँच …

Read more

लोकनाट्य के प्रकार

लोकनाट्य, लोक मनोरंजन का एक ऐसा साधन है, जिसमें मंचीय नाटकों जैसी शास्त्रीयता नहीं होती और न ही किसी तरह का दिखावा। अधिक तामझाम के बिना भी ये दर्शकों से सीधा तादात्म्य स्थापित कर लेते हैं।’’  एक अन्य परिभाषा के मुताबिक ‘‘ मनोरंजन एवं सामाजिक शिक्षा के लिए की गई सामूहिक अभिव्यक्ति ही लोकनाट्य है, जिसमें …

Read more

यदि कोई महिला घरेलू हिंसा की शिकार है तो उसके अधिकार

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 कब पारित हुआ महिलाओं के प्रति उनके कुटुम्ब के भीतर ही होने वाली हिंसा से संरक्षण के लिए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 को पारित किया गया है। अधिनियम की धारा 2 के अन्तर्गत पीड़ित व्यक्ति से तात्पर्य किसी ऐसी महिला से है जो प्रत्युत्तरदाता की घरेलू रिश्ते में …

Read more

अधिनियम की धारा 2(1)(स) के अनुसार सती का अर्थ

वित्तीय या राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस प्रकार के आपराधिक शोषण के विरुद्ध कार्यवाही करने हेतु अधिनियम में उपबन्ध किये गये हैं। सती निवारण अधिनियम 1987 अधिनियम की धारा 4(1) के अनुसार यदि कोई स्त्री सती होती है, तब जो कोई ऐसे सती होने का प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्ष रूप से दुष्प्रेरण (Abetment) करता है, वह मृत्युदण्ड …

Read more

लोकगाथा / लोककथा के विभिन्न प्रकारों का विवेचना

लोकगाथा लोकगीतों का ही एक विस्तारित और परिवर्धित स्वरूप है। लोकगाथा में लोक तत्व, गेयता और कथा तत्व का संतुलित सामंजस्य होता है। लोकगाथाएं इस तरह की गेय रचनाएं हैं, जिनमें कोई लोकप्रिय कथा हो और उसे सजीव ढंग से कहा गया हो। इस दृष्टि से लोकगाथाएं लोकगीतों की तुलना में एक संचार माध्यम के रूप …

Read more

प्लेटो का शैक्षिक विचार || Plato’s Educational Theory

प्लेटो प्लेटो का जन्म एथेन्स में 428-27 ई. पू. में हुआ। उसके पिता का नाम अरिस्तोन एवं माता का नाम पेरिकतिओन था। प्लेटो का वास्तविक नाम अरिस्तोक्लीज था। उसके कन्धे भरे हुए और चौड़ा थे, इसी कारण उसके व्यायाम शिक्षक ने उसे प्लातोन कहना शुरू किया क्योंकि प्लेटो शब्द का अर्थ ही होता है चैड़ा-चपटा। प्लेटो …

Read more

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और शैक्षिक विचार

स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के एक बंगाली कायस्थ परिवार में 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। इनका वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ते के उच्च न्यायालय में एटर्नी (वकील) थे। वे बड़े बुद्धिमान, ज्ञानी, उदार, परोपकारी एवं गरीबों की रक्षा करने वाले थे। स्वामी जी की माँ श्रीमती भुवनेश्वर …

Read more

रवीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय एवं शैक्षिक विचार

रवीन्द्रनाथ टैगोर  रबीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 में कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। वह एक बंगाली परिवार में जन्म लिए थे। टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर एक जाने-माने समाज सुधारक थे। रबीन्द्रनाथ ठाकुर एक बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे। …

Read more

अरविन्द घोष के शैक्षिक विचार

अरविन्द घोष एक महान शिक्षाविद एवं दार्शनिक थे। वे अपने शैक्षिक विचारों को अपनी पुस्तक “नेशनल सिस्टम ऑफ एजुकेशन” तथा “आन एजुकेशन” में व्यक्त किए हैं। उपनिषद् एवं वेदान्त के मौलिक सार तत्व उनके जीवन दर्शन के आधार थे। उन्होंने आध्यात्मिक अभ्यास, योग तथा ब्रह्मचर्य को अपने जीवन में विशेष महत्व दिया। एक आदर्शवादी के रूप …

Read more