कार्यशील पूंजी का अर्थ, आवश्यकता, महत्व, प्रकार एवं स्रोत

किसी भी संगठन में कार्यशील पूंजी एक महत्वपूर्ण वित्त स्रोत है जिससे संगठन के दैनिक व्ययों या आवश्यकताओं के पूर्ति होती है। इसमें कार्यशील पूंजी का अर्थ, कार्यशील पूंजी की विचारधारा, कार्यशील पूंजी की आवश्यता एवं कार्यशील पूंजी को प्रभावित करने वाले तत्वों को क्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक व्यवसाय जगत में कार्यशील पूंजी किसी …

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मौद्रिक नीति का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं उपकरण

मौद्रिक नीति सरकार एवं केन्द्रीय बैंक द्वारा सोच समझकर उपयोग में लायी गर्इ मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि या कमी लाने की शक्ति है। यह शक्ति सरकार की आर्थिक नीति के उद्देश्यों की विस्तृत रूपरेखा को ध्यान में रखकर निवेश, आय व रोजगार को प्रभावित करने और कीमतों में स्थिरता लाने के लिये प्रयोग की जाती …

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समाचार एजेंसी का उद्धव और विकास

दुनिया के एक कोने की खबर दूसरे कोने तक पहुंचाने का काम आसान नहीं । हर पत्र-पत्रिका के लिए भी यह सम्भव नहीं कि वो हर छोटी-बड़ी जगह पर अपने संवाददाता तैनात कर सकें । इस मुश्किल को आसान बनाती हैं, समाचार समितियाँ यानी न्यूज एजेंसी। युनेस्को ने न्यूज एजेंसी को इस प्रकार परिभाषित किया है, …

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वित्त के स्रोत

किसी भी संगठन में वित्त के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके आधार पर एक संगठन अथवा संस्था का जन्म होता है। दीर्घकालीन, मध्यकालीन एवं अल्पकालीन वित्त के साधन संगठन के जीवन क्रम में अपरिहार्य है। प्रस्तुत इकार्इ में इनकी क्रमानुसार व्याख्या की गर्इ है जो एक कम्पनी के जीवन चक्र को निश्चित करते हैं …

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औद्योगिक नीति का अर्थ, महत्व एवं भारत में औद्योगिक नीति का विकास

आर्थिक नीति के अनेक पक्ष होते है जो देश में औद्योगिक निवेश और उत्पादन को प्रभावित करते है। सर्वप्रथम औद्योगिक लाइसेसिंग नीति हैं जो औद्योगिक उपक्रमों की स्थापना और उनके विकास को विनियमित करती है। द्वितीय आर्थिक शक्तियों एवं एकाधिकार के संकेन्द्रण पर नियंत्रण की नीति। तृतीय प्रौद्योगिकी, 80 पूँजीगत पदार्थों, उपकरणों एवं कच्चे माल के …

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सतावर की खेती कैसे करें

सतावर अथवा शतावरी भारतवर्ष के विभिन्न भागों में प्राकृतिक रूप से पार्इ जाने वाली बहुवष्र्ाीय आरोही लता है। नोकदार पत्तियों वाली इस लता को घरों तथा बगीचों में शोभा हेतु भी लगाया जाता है। जिससे अधिकांश लोग इसे अच्छी तरह पहचानते हैं। सतावर के औषधीय उपयोगों से भी भारतवासी काफी पूर्व से परिचित हैं तथा विभिन्न …

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पूंजी बजटन क्या है ?

पूंजी बजटन का आशय के विभिन्न स्त्रोतों से पूंजी प्राप्त करने केलिए बजट बनाने से नहीं है, बल्कि यह एक विनियोजन निर्णय है। इसलिए कि पूंजी बजटन पूंजी के दीर्घकालीन नियोजन से सम्बन्धित एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत पूंजीगत विनियोग की भावी लाभोत्पादकता का अध्ययन करना, उसकी पूंजी लागत की गणना करके अर्जन और लागत की …

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आर्थिक सुधार की आवश्यकता एवं क्षेत्र

सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार करने की पहले की नीतियों ने सार्वजनिक क्षेत्र को अकुषल बना दिया था तथा इस क्षेत्र में बहुत अधिक हानि हो रही थी। लाइसेंस और नियंत्रण प्रणाली ने निजी क्षेत्र द्वारा निवेश पर रोक लगा दिया तथा इसके कारण विदेषी निवेषक भी हतोत्साहित हो रहे थे। अत: विकास के पहले चार दषकों …

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सर्पगंधा की खेती कैसे करें

भारतीय महाद्वीप की जलवायु में सफलतापूर्वक उगाए जा सकने वाले औषधीय पौधों में न केवल औषधीय उपयोग बल्कि आर्थिक लाभ एवं मांग की दृष्टि से भी सर्पगंधा कुछ गिने चुने शीर्ष पौधों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दक्षिण पूर्वी एशिया का यह मूल निवासी पौधा भारतवर्ष के साथ-साथ बर्मा, बांग्लादेश, श्री लंका, मलेशिया, इंडोनेशिया तथा …

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जोखिम एवं आय विश्लेषण

जोखिम एवं आय की प्रारम्भिक विचारधारा यह है कि आधुनिक व्यवसाय में आय का सम्बन्ध जोखिम से सम्बन्धित है। वर्तमान समय में व्यवसाय में लाभ कमाना जोखिम के ऊपर निर्भर करता है। जिस व्यवसाय या पेशें में जितना अधिक जोखिम होता है, उस व्यवसाय एवं पेशा में उतना अन्धिाक लाभ की सम्भावना अधिक होती है। किसी …

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